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Haldwani News: हल्द्वानी में गौरव सेनानी मिलन एवं पूर्व सैनिक सम्मान समारोह आयोजित

On: September 11, 2026 5:44 AM
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Haldwani News: हल्द्वानी में गौरव सेनानी मिलन एवं पूर्व सैनिक सम्मान समारोह आयोजित
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Haldwani News: उत्तराखंड की पावन धरा जिसे संपूर्ण राष्ट्र श्रद्धा से देवभूमि के रूप में पूजता है, वह अपने गर्भ में पराक्रम, बलिदान और अदम्य साहस की अनगिनत गाथाएं समेटे हुए एक जांबाज वीरभूमि भी है। हिमालय की ऊंची चोटियों से लेकर मैदानों तक, इस राज्य के हर परिवार का कोई न कोई सदस्य या तो मातृभूमि की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात है या फिर सेवानिवृत्त होकर समाज को अनुशासित जीवन की प्रेरणा दे रहा है। इसी गौरवशाली परंपरा और सैन्य अस्मिता को सर्वोच्च सम्मान देने के उद्देश्य से कुमाऊं के प्रमुख प्रवेश द्वार हल्द्वानी में ‘गौरव सेनानी मिलन एवं पूर्व सैनिक सम्मान समारोह’ का भव्य और गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। इस विशाल समारोह में कुमाऊं मंडल के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों से भारी संख्या में पधारे पूर्व सैनिकों, रणबांकुरों, वीर नारियों और उनके परिजनों ने प्रतिभाग कर आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समूचे प्रदेश की ओर से उपस्थित पूर्व सैनिकों और वीरांगनाओं का चरण वंदन करते हुए अत्यंत भावुक और विचारोत्तेजक संबोधन प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सैनिक केवल एक पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सर्वाेच्च समर्पण की जीवनशैली है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हमारे वीर सैनिकों ने अपनी जवानी, अपनी व्यक्तिगत खुशियां और जीवन का स्वर्णिम काल देश की सीमाओं की पहरेदारी और अखंडता के लिए अर्पित कर दिया। वे सीमा पर अपने वर्तमान की परवाह किए बिना डटे रहे, ताकि भारत का हर नागरिक अपने घरों में सुरक्षित और निर्भय होकर एक सुनहरे कल के सपने देख सके।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एक संवेदनशील और प्रेरणादायक व्याख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि एक सैनिक कभी पूर्व या भूतपूर्व नहीं होता। वर्दी भले ही उतर जाए, लेकिन उसके सीने में धड़कने वाला राष्ट्रभक्ति का जज्बा, आंखों का अनुशासन और मातृभूमि के लिए मर मिटने का संकल्प ताउम्र वैसा ही धधकता रहता है। इसलिए वे हमारे पूर्व सैनिक नहीं, बल्कि वास्तविक अर्थों में अभूतपूर्व हैं। जीवन के किसी भी पड़ाव पर पूर्व सैनिक अपने त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और विपुल अनुभवों के माध्यम से समाज, युवा पीढ़ी और संपूर्ण राष्ट्र को एक सकारात्मक और अनुशासित दिशा देने का अनुपम कार्य करते हैं।

एक सैनिक पुत्र होने के नाते अपनी निजी भावनाओं को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं फौजी परिवेश में पले-बढ़े हैं, इसलिए एक सैनिक, उसकी धर्मपत्नी और उसके बच्चों द्वारा झेले जाने वाले संघर्ष, अकेलेपन और अनुशासन की तपस्या को उन्होंने बहुत करीब से देखा और जिया है। उन्होंने कहा कि जब सीमा पर तनाव बढ़ता है, तो सैनिक के घर में चूल्हा किस मानसिक संताप और गर्व के बीच जलता है, इस दर्द और गौरव को वही समझ सकता है जिसके परिवार का खून सीमा की रक्षा में लगा हो। उत्तराखंड के समृद्ध सैन्य इतिहास का गौरवगान करते हुए उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के विक्टोरिया क्रॉस विजेता दरबान सिंह नेगी और गबर सिंह नेगी से लेकर आधुनिक भारत के जांबाज थल सेनाध्यक्ष जनरल बी.सी. जोशी और देश के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के अदम्य पराक्रम को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने रेखांकित किया कि देश की सीमाओं पर जब भी संकट के बादल मंडराए, उत्तराखंड के रणबांकुरों ने सबसे आगे खड़े होकर अपने लहू से स्वाभिमान की रेखा खींची है।

देश की बदलती सुरक्षा व्यवस्था और सामरिक आत्मनिर्भरता पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में आज भारत की रक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी और अभूतपूर्व बदलाव आए हैं। अतीत के उस दौर को पीछे छोड़ते हुए जब भारत रक्षा उपकरणों के लिए पूरी तरह दूसरे देशों के भरोसे रहता था, आज का नया भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन चुका है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत देश में आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइलें, तोपें और आधुनिक राइफलें निर्मित हो रही हैं। स्थिति यह है कि आज भारत न केवल अपनी रक्षा आवश्यकताओं को स्वदेशी तकनीक से पूरा कर रहा है, बल्कि दुनिया के अनेक देशों को उच्च गुणवत्ता वाले रक्षा उपकरणों का बड़े पैमाने पर निर्यात भी कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नया भारत है, जो अपनी सीमाओं की रक्षा और राष्ट्रीय हितों के संरक्षण के लिए कड़े, त्वरित और दृढ़ निर्णय लेने से तनिक भी नहीं हिचकिचाता।

पूर्व सैनिकों की दशकों से लंबित और उपेक्षित मांग वन रैंक-वन पेंशन के ऐतिहासिक समाधान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली सरकारों ने केवल आश्वासन दिए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व सैनिकों की भावनाओं को समझते हुए इस ऐतिहासिक निर्णय को धरातल पर उतारा। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस संकल्प के साथ काम कर रही हैं कि सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और उनके परिवारों का मान-सम्मान और सर्वांगीण कल्याण नीतियों के केंद्र में रहे।

राज्य सरकार द्वारा सैनिक कल्याण के क्षेत्र में लिए गए ऐतिहासिक नीतिगत निर्णयों की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राजधानी देहरादून के गुनियाल गांव में भव्य और दिव्य सैन्य धाम का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उत्तराखंड के चार धामों की तरह यह सैन्य धाम प्रदेश के पांचवें धाम के रूप में स्थापित किया जा रहा है। इस सैन्य धाम की आधारशिला में उत्तराखंड के प्रत्येक बलिदानी सैनिक के आंगन की पवित्र मिट्टी समाहित की गई है। यह पवित्र स्थल न केवल वीर सैनिकों के अदम्य शौर्य, त्याग और अमर शहादत का जीवंत प्रतीक बनेगा, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और भावी पीढ़ियों के मन में राष्ट्रभक्ति की अखंड लौ जलाए रखने की निरंतर प्रेरणा देगा।

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photo- Haldwani ex-servicemen meet Cm Dhami

मुख्यमंत्री ने आगे घोषणाओं और निर्णयों का ब्योरा देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले बलिदानी सैनिकों के परिजनों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि को दस लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे पचास लाख रुपये कर दिया है। इसी प्रकार राष्ट्र के सर्वाेच्च वीरता सम्मान परमवीर चक्र विजेताओं को प्रदान की जाने वाली एकमुश्त अनुदान राशि को पचास लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे दो करोड़ रुपये कर दिया गया है। बलिदानी सैनिक के परिवार के पुनर्वास और आर्थिक स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में सेवायोजित करने की व्यवस्था के अंतर्गत आवेदन की समय-सीमा को दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त राज्य के सेवारत सैनिकों और पूर्व सैनिकों को पच्चीस लाख रुपये तक की अचल संपत्ति की खरीद पर स्टाम्प शुल्क में पच्चीस प्रतिशत की विशेष छूट दी जा रही है। भूमि संबंधी विवादों, शस्त्र लाइसेंस और अन्य प्रशासनिक स्तरों पर पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए जिलाधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

समारोह में उपस्थित गणमान्य वक्ताओं ने भी सैनिकों के बलिदान और राज्य सरकार की पहलों की मुक्तकंठ से सराहना की। भाजपा के वरिष्ठ नेतृत्व नितिन नवीन ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड की देवतुल्य भूमि वास्तविक अर्थों में पराक्रम और राष्ट्रभक्ति की जननी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना आज अत्याधुनिक हथियारों और उच्च मनोबल से सुसज्जित होकर वैश्विक पटल पर एक अजेय शक्ति बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हमेशा परंपरा तोड़ी है और दीपावली जैसे पावन पर्व अपने परिवार के बजाय सीमा की अग्रिम चौकियों पर तैनात जवानों के संग बिताकर उनके मनोबल को हिमालय जैसी ऊंचाई दी है। सीमांत गांवों को देश का अंतिम गांव कहने की पुरानी औपनिवेशिक मानसिकता को बदलकर उन्हें देश का प्रथम गांव घोषित किया गया है, जिससे वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सीमावर्ती इलाकों का कायाकल्प हो रहा है। उन्होंने देहरादून में निर्मित हो रहे सैन्य धाम की अवधारणा को नमन करते हुए कहा कि यह उत्तराखंड सरकार का सैनिकों के प्रति अगाध आदर का सबसे जीवंत उदाहरण है।

सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि राज्य सरकार पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और उनके आश्रितों के सम्मान, चिकित्सा, स्वरोजगार और उनके बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू कर रही है। सैनिक कल्याण विभाग पूरी तरह संवेदनशील होकर काम कर रहा है और किसी भी पूर्व सैनिक अथवा वीर नारी की समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर तय समय में किया जा रहा है।

हल्द्वानी के इस गरिमामय आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि देवभूमि उत्तराखंड के जन-मानस में सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान का भाव केवल औपचारिक शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की नीतियों और समाज के आचरण में पूरी शिष्टता और कृतज्ञता के साथ प्रतिबिंबित हो रहा है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और वीर शहीदों के जयकारों की गूंज के साथ हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह के भीतर देशभक्ति की एक नई ऊर्जा और संकल्प का संचार कर दिया।


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