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Dehradun News: नशा मुक्ति अभियान का 14 सितंबर को डीएम देहरादून करेंगे शुभांरभ

On: September 11, 2026 4:30 AM
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Dehradun News: नशा मुक्ति अभियान का 14 सितंबर को डीएम देहरादून करेंगे शुभांरभ
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Dehradun News: उत्तराखंड की शांत और प्राकृतिक वादियों में बसे देहरादून की पहचान हमेशा से उच्च कोटि के शिक्षण संस्थानों, सांस्कृतिक विरासत और सुकून भरी जीवनशैली के रूप में रही है। समय के साथ बदलते सामाजिक परिवेश और आधुनिकता की अंधी दौड़ ने इस शांत वादी के सामने एक गंभीर चुनौती लाकर खड़ी कर दी है, जिसे हम नशे की लत के रूप में देखते हैं। युवा शक्ति, जो किसी भी राज्य और राष्ट्र की रीढ़ होती है, यदि गलत दिशा में भटकने लगे तो यह पूरे समाज के भविष्य के लिए एक बड़ा संकट बन जाता है। इस गंभीर संकट की रोकथाम और समाज को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से जनपद देहरादून में एक ऐतिहासिक और व्यापक स्तर पर नशा मुक्ति अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘नशामुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत जनपद में नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जनजागरूकता को नई ऊंचाई देने के लिए पंद्रह दिनों के सघन शपथ अभियान का ताना-बाना बुना गया है।

इस विशेष अभियान की विधिवत शुरुआत 14 सितंबर को सुबह ग्यारह बजे देहरादून के ऋषिपर्णा सभागार में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान द्वारा की जाएगी। यह अभियान केवल एक दिन की औपचारिकता बनकर नहीं रहेगा, बल्कि 14 सितंबर से प्रारंभ होकर 30 सितंबर तक लगातार पंद्रह दिनों तक जनपद के कोने-कोने में पूरी ऊर्जा के साथ संचालित किया जाएगा। प्रशासनिक स्तर पर इस अभियान को केवल सरकारी तंत्र तक सीमित रखने के बजाय इसे एक जनआंदोलन बनाने की योजना है। प्रशासन का मानना है कि जब तक समाज का प्रत्येक नागरिक, विशेष रूप से युवा, महिला समूह, श्रमिक वर्ग और सामाजिक संगठन इस लड़ाई में आगे नहीं आएंगे, तब तक समाज को इस बुराई से पूरी तरह मुक्त नहीं कराया जा सकता।

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photo- Mdano News Dehradun DM launch drug de-addiction campaign

ऋषिपर्णा सभागार से शुरू होने वाला यह संदेश जिले के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे, इसके लिए बहुस्तरीय कार्ययोजना बनाई गई है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस बार अभियान का दायरा केवल सभाओं और भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यवहारिक स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति को संकल्प से जोड़ना होगा। इसके अंतर्गत जिले के तमाम सरकारी विभागों के साथ-साथ निजी क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थाओं, औद्योगिक इकाइयों और ग्रामीण प्रशासनिक तंत्र को पूरी जिम्मेदारी के साथ दायित्व सौंपे गए हैं। यह अभियान इस बात का भी प्रमाण है कि जब प्रशासन और आम जनता एक ही मंच पर आकर किसी बुराई के खिलाफ खड़े होते हैं, तो उसके परिणाम अत्यंत सकारात्मक और दूरगामी होते हैं।

देहरादून को भारत की शिक्षा नगरी कहा जाता है। यहां देश और विदेश से लाखों छात्र उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और स्कूली शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। ऐसे में नशा तस्करों और असामाजिक तत्वों के निशाने पर सबसे पहले युवा पीढ़ी ही आती है। इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा विभाग को इस अभियान में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। जिले के सभी विश्वविद्यालयों, राजकीय एवं निजी महाविद्यालयों, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों और छात्रावासों में सामूहिक शपथ ग्रहण के विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में केवल प्रतिज्ञा दिलवाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि छात्रों को नशीली दवाओं के सेवन से होने वाले शारीरिक, मानसिक, करियर संबंधी और सामाजिक विनाश के बारे में विस्तार से समझाया जाएगा। युवा मन को यह अहसास कराना आवश्यक है कि नशा किसी तनाव का समाधान नहीं, बल्कि जीवन की तमाम संभावनाओं का अंत है। छात्रावासों में रहने वाले छात्र अपने घरों से दूर होते हैं, इसलिए वहां निगरानी और मार्गदर्शन की दोहरी जिम्मेदारी बनती है, जिसे यह अभियान प्राथमिकता के साथ पूरा करेगा।

प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर भी इस अभियान की गहरी छाप देखने को मिलेगी। मुख्य शिक्षा अधिकारी के कुशल मार्गदर्शन में जिले के सभी राजकीय, अशासकीय, निजी और आवासीय विद्यालयों को इस अभियान की मुख्य धारा से जोड़ा गया है। पहली कक्षा से लेकर बारहवीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और स्कूल स्टाफ को इस अभियान से आच्छादित किया जाएगा। छोटी उम्र से ही बच्चों के कोमल मन में नशे के प्रति घृणा और एक स्वस्थ जीवनशैली के प्रति सकारात्मक दृष्टि विकसित करना इस पहल का मूल तत्व है। खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने विकासखंडों के प्रत्येक स्कूल की दैनिक प्रगति रिपोर्ट तैयार करने और शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जब एक बच्चा विद्यालय में यह प्रतिज्ञा लेता है कि वह नशा मुक्त रहेगा, तो वह केवल स्वयं को ही नहीं बचाता, बल्कि अपने परिवार और आसपास के वातावरण में भी जागरूकता का एक नन्हा दूत बनकर उभरता है।

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photo- Mdano News Dehradun DM launch drug de-addiction campaign

शिक्षा जगत के समानांतर ही कार्यस्थलों और सरकारी दफ्तरों को भी इस संकल्प का केंद्र बनाया जा रहा है। जनपद के समस्त शासकीय, अर्द्धशासकीय, स्वायत्तशासी और निगम कार्यालयों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा सामूहिक रूप से नशामुक्त जीवन और समाज निर्माण की शपथ ली जाएगी। किसी भी अभियान को जन-जन तक पहुंचाने वाले सरकारी सेवक यदि स्वयं इस विचार को आत्मसात करेंगे, तो उनका व्यवहार और कार्यशैली समाज के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करेगी। कार्यालयों में यह शपथ केवल एक औपचारिकता न रहे, इसके लिए सभी विभागाध्यक्षों को स्वयं आगे रहकर अपने अधीनस्थों को प्रेरित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

देहरादून जिले के औद्योगिक क्षेत्रों, जैसे सेलाकुई, पटेल नगर और अन्य औद्योगिक क्लस्टरों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा और कल्याण भी इस अभियान का एक संवेदनशील पहलू है। उद्योग विभाग को यह विशेष जिम्मेदारी दी गई है कि वह जिले में संचालित सभी फैक्ट्रियों, निर्माण इकाइयों, औद्योगिक परिसरों और कॉर्पोरेट दफ्तरों के प्रबंधन से समन्वय स्थापित करे। निर्माण कार्यों में लगे दैनिक वेतनभोगी और औद्योगिक श्रमिक अक्सर थकावट, अज्ञानता या संगति के कारण नशे की गिरफ्त में फंस जाते हैं, जिससे उनका परिवार आर्थिक संकट में घिर जाता है और उनकी कार्यक्षमता समाप्त हो जाती है। ऐसे सभी कार्यस्थलों पर सामूहिक शपथ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और वहां के श्रमिकों को यह समझाया जाएगा कि उनकी गाढ़ी कमाई नशे की भेंट चढ़ने के बजाय उनके बच्चों के सुरक्षित भविष्य और परिवार की खुशहाली में लगनी चाहिए। इन सभी कार्यक्रमों की प्रामाणिक सूचना और उपस्थिति निर्धारित प्रारूप में उद्योग विभाग द्वारा जिला प्रशासन को भेजी जाएगी।

गांव और कस्बों के स्तर पर पंचायती राज संस्थाओं, नगर निगम, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों की सक्रियता इस अभियान को वास्तविक धरातल प्रदान करेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों को विशेष रूप से इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है। पहाड़ और तराई की महिलाएं हमेशा से नशा विरोधी आंदोलनों की अग्रदूत रही हैं। जब माताएं और बहनें अपने परिवार व गांव को नशे से बचाने का बीड़ा उठाती हैं, तो परिवर्तन की गति कई गुना बढ़ जाती है। ग्राम पंचायतों में खुली बैठकों के जरिए ग्रामीणों को नशा छोड़ने और गांव में किसी भी प्रकार की अवैध नशे की बिक्री पर रोक लगाने की शपथ दिलाई जाएगी। स्थानीय निकाय शहरी बस्तियों, मोहल्लों और मलिन बस्तियों में विशेष अभियान चलाएंगे, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक इस संदेश की गूंज पहुंच सके।

उत्तराखंड एक प्रमुख पर्यटन प्रदेश है और देहरादून उसका प्रवेश द्वार है। यहां रोजाना हजारों पर्यटक आते हैं और जिले में अनगिनत होटल, रिसॉर्ट, गेस्ट हाउस और होम स्टे संचालित हैं। जिला पर्यटन अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वे आतिथ्य क्षेत्र के तमाम संचालकों और कर्मचारियों को इस अभियान में शामिल करें। होटलों और होम स्टे में काम करने वाले कर्मचारियों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाना इसलिए आवश्यक है क्योंकि वे सीधे जनता और पर्यटकों के संपर्क में आते हैं। इसके साथ ही, देहरादून में संचालित निजी छात्रावासों में रहने वाले बाहरी युवाओं तक भी पर्यटन और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें पहुंचेंगी, जिससे पर्यटकों और युवाओं के बीच एक स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण का निर्माण हो सके।

शारीरिक सौष्ठव, मानसिक अनुशासन और खेलों का नशा मुक्ति से सीधा संबंध है। जो युवा खेल के मैदान से जुड़ता है, वह स्वाभाविक रूप से व्यसनों से दूर रहता है। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए जिला क्रीड़ा अधिकारी के माध्यम से रायपुर स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज सहित जनपद के विभिन्न खेल प्रशिक्षण केंद्रों, स्टेडियमों और व्यायामशालाओं में विशेष आयोजन किए जाएंगे। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवा खिलाड़ियों को सामूहिक शपथ दिलाई जाएगी ताकि वे समाज में एक स्वस्थ और ऊर्जावान जीवनशैली के रोल मॉडल बन सकें। एक खिलाड़ी जब नशे के खिलाफ आवाज उठाता है, तो उसकी बात का असर युवाओं पर बहुत गहरा और प्रेरणादायक होता है।

इस बार के पंद्रह दिवसीय विशेष अभियान की एक विशिष्ट और आधुनिक विशेषता इसका डिजिटल स्वरूप है। प्रशासन ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही माध्यमों से शपथ लेने की व्यवस्था की है। अभियान के तहत प्रतिभागियों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से शपथ लेकर अपना ई-प्रमाण पत्र डाउनलोड करना अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था अभियान में पारदर्शिता और सहभागिता का वास्तविक आकलन करने में सहायक सिद्ध होगी। प्रमाण पत्र प्राप्त करने से प्रतिभागियों, विशेष रूप से छात्रों और युवाओं में, एक उपलब्धि और जिम्मेदारी का भाव जागृत होता है। प्रत्येक विभाग और संस्था को यह निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां आयोजित शपथ कार्यक्रमों के छायाचित्र और संकलित डेटा निर्धारित प्रारूप में जिला प्रशासन के नोडल अधिकारी को नियमित रूप से उपलब्ध कराएं, जिससे अभियान की वास्तविक समय में निगरानी की जा सके।

नशा मुक्ति केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं है, बल्कि यह एक गहरा सामाजिक और मानवीय सरोकार है। नशा किसी एक व्यक्ति के शरीर को ही नष्ट नहीं करता, बल्कि वह पूरे परिवार की खुशियों, बच्चों की शिक्षा, बुजुर्गों के सम्मान और समाज के ताने-बाने को तहस-नहस कर देता है। जब घर का मुखिया या कोई युवा सदस्य किसी व्यसन का शिकार होता है, तो उसका दुष्प्रभाव घरेलू हिंसा, आर्थिक तंगी और मानसिक अवसाद के रूप में सामने आता है। अपराध जगत में कदम रखने वाले अधिकांश युवा किसी न किसी रूप में नशे के शिकार पाए जाते हैं। इसलिए देहरादून प्रशासन की यह पहल वास्तव में अपराध नियंत्रण, सामाजिक सुरक्षा और भावी पीढ़ी के संरक्षण की दिशा में उठाया गया एक सुरक्षात्मक कदम है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जन जागरूकता के साथ-साथ जिले में मादक पदार्थों की अवैध तस्करी, बिक्री और वितरण पर भी सख्त कार्रवाई समानांतर रूप से जारी रहेगी। एक तरफ जहां युवाओं को शपथ दिलाकर सही रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और आबकारी विभाग को नशा माफियाओं की कमर तोड़ने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। स्कूल-कॉलेजों के आसपास प्रतिबंधित तंबाकू, नशीली दवाओं और शराब की दुकानों की सघन चेकिंग की जाएगी ताकि असामाजिक तत्वों के हौसले पस्त किए जा सकें।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जनपद के समस्त नागरिकों, प्रबुद्ध वर्ग, मीडिया, स्वयंसेवी संस्थाओं और धार्मिक-सामाजिक संगठनों से भावुक अपील की है कि वे इस अभियान को अपना निजी अभियान समझकर आगे आएं। यदि किसी परिवार या मोहल्ले में कोई व्यक्ति नशे की गिरफ्त में है, तो उसे केवल तिरस्कार की दृष्टि से देखने के बजाय सहानुभूति और उचित नशामुक्ति परामर्श केंद्र तक पहुंचाने में मदद की जाए। प्रशासन द्वारा संचालित काउंसलिंग केंद्रों और स्वास्थ्य केंद्रों की जानकारी भी इस अभियान के दौरान लोगों के बीच साझा की जाएगी, ताकि जो लोग इस दलदल से बाहर निकलना चाहते हैं, उन्हें उचित चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक सहायता मिल सके।

14 सितंबर से 30 सितंबर तक चलने वाला यह विशेष पखवाड़ा देहरादून को एक नई पहचान दिलाने की क्षमता रखता है। ऋषिपर्णा के पावन तट पर स्थित सभागार से उठने वाली नशा मुक्ति की यह शपथ जब हिमालय की तलहटियों, दून की वादियों, औद्योगिक गलियारों और शिक्षण संस्थानों के कमरों में गूंजेगी, तो निश्चित ही एक नई चेतना का संचार होगा। देवभूमि को सही मायनों में देवभूमि बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि हमारी आने वाली पीढ़ी शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से सशक्त हो। देहरादून जिला प्रशासन का यह सामूहिक संकल्प समाज के हर वर्ग के सहयोग से एक स्वस्थ, समृद्ध और नशामुक्त भविष्य की मजबूत नींव रखने जा रहा है।


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