Uttarakhand Free Coaching: हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड की पावन देवभूमि न केवल अपने प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए पहचानी जाती है, बल्कि यह धरती अपने परिश्रमी, ईमानदार और अदम्य साहसी युवाओं की शक्ति के लिए भी जानी जाती है। राज्य के दुर्गम पर्वतीय गांवों से लेकर तराई और भाबर के शहरों तक, हर पहाड़ी ढलान और घाटी में ऐसे अनगिनत नौजवान बसते हैं जिनकी आंखों में बड़े-बड़े सपने पलते हैं। ये वे युवा हैं जो सीमित संसाधनों, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विषम मौसम के बीच भी अपने जीवन में कुछ बड़ा कर गुजरने का जज्बा रखते हैं। कोई भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाकर देश की नीति निर्माण में भागीदार बनना चाहता है, तो कोई प्रांतीय सिविल सेवा, न्यायिक सेवा, बैंकिंग, रक्षा बलों या उच्च तकनीकी पदों पर आसीन होकर अपनी माटी और माता-पिता का नाम रोशन करने की तमन्ना रखता है। परंतु पर्वतीय राज्य की अपनी कुछ ऐसी जमीनी और व्यावहारिक चुनौतियां रही हैं, जो अक्सर इन प्रतिभाशाली युवाओं के मार्ग में अनचाही बाधाएं बनकर खड़ी हो जाती हैं।
पहाड़ के सुदूर जनपदों जैसे पिथौरागढ़, चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग या बागेश्वर के महाविद्यालयों में अध्ययनरत एक सामान्य किसान या छोटे कारोबारी के बेटे-बेटी के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की आधुनिक तैयारी करना कभी आसान नहीं रहा। शहरों में कोचिंग संस्थानों की आसमान छूती फीस, महानगरों में रहने-खाने का भारी खर्च और सही दिशा में मार्गदर्शन देने वाले अनुभवी शिक्षकों का अभाव अक्सर प्रतिभाओं को कुंद कर देता था। कई होनहार छात्र केवल इसलिए अपनी पसंदीदा प्रतियोगी परीक्षा में सफल नहीं हो पाते थे क्योंकि उनके पास सही रणनीति और नियमित अभ्यास के आधुनिक संसाधन उपलब्ध नहीं होते थे। इसी पीड़ा, असमानता और अभाव को दूर करने के दृढ़ संकल्प के साथ राज्य की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने एक युगांतरकारी कदम उठाते हुए ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का भव्य शुभारंभ किया है। यह योजना केवल एक सरकारी घोषणा भर नहीं है, बल्कि यह पहाड़ की उस युवा मेधा को पंख देने का भगीरथ प्रयास है जो अब तक केवल संसाधनों के अभाव में ऊंची उड़ान भरने से वंचित रह जाती थी।
इस महत्वाकांक्षी योजना के औपचारिक लोकार्पण के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के युवाओं को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार ने यह स्पष्ट और अटल नीति बना ली है कि अब उत्तराखंड के किसी भी बेटे या बेटी का सपना इसलिए नहीं टूटेगा कि उसके परिवार के पास बड़े शहरों में कोचिंग कराने के पैसे नहीं हैं। संसाधनों की कमी या आर्थिक तंगी अब किसी भी मेधावी छात्र के भविष्य के आड़े नहीं आने दी जाएगी। इस योजना के प्रथम चरण में राज्य के विभिन्न राजकीय एवं शासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों तथा समस्त राज्य विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत ग्यारह हजार पात्र छात्र-छात्राओं का चयन कर उन्हें प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों के माध्यम से पूरी तरह निःशुल्क ऑनलाइन कोचिंग से जोड़ा जा रहा है। इस डिजिटल पहल के जरिए राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों में बैठा हुआ विद्यार्थी भी अपने फोन या कंप्यूटर स्क्रीन पर देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों से सीधे संवाद कर सकेगा, उच्च स्तरीय अध्ययन सामग्री प्राप्त कर सकेगा और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के अनुरूप अपनी तैयारी को धार दे सकेगा।
मुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए इस बात पर विशेष बल दिया कि किसी भी राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल किताबों के पन्ने पलटना और कड़ी मेहनत करना ही पर्याप्त नहीं होता। मेहनत के साथ-साथ सही दिशा का निर्धारण, एक सटीक और व्यावहारिक रणनीति, विषय विशेषज्ञों का निरंतर मार्गदर्शन और नियमित मॉक टेस्ट के जरिए निरंतर अभ्यास ही वह कुंजी है जो सफलता के द्वार खोलती है। आज की प्रतियोगी व्यवस्था अत्यंत परिष्कृत और तकनीकी हो चुकी है, जहां हर एक अंक पर हजारों छात्र आगे-पीछे हो जाते हैं। ऐसे में अगर छात्र को यह न पता हो कि क्या पढ़ना है और उससे भी अधिक क्या छोड़ना है, तो उसकी वर्षों की साधना व्यर्थ हो सकती है। पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं के पास समर्पण और एकाग्रता की कोई कमी नहीं रही है, कमी थी तो केवल एक ऐसे सेतु की जो उन्हें आधुनिक परीक्षा प्रणाली की बारीकियों से जोड़ सके। ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ उसी सेतु का निर्माण करने जा रही है।
उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी वास्तविक संपदा हमारी युवा शक्ति है। राज्य का युवा स्वभाव से साहसी, ईमानदार, कठिन से कठिन परिश्रम को सहने वाला और जीवन की विकटतम चुनौतियों का मुस्कुराते हुए सामना करने में पूरी तरह सक्षम है। जरूरत केवल इस बात की थी कि शासन स्तर पर एक ऐसा पारदर्शी वातावरण तैयार किया जाए जहां युवाओं को यह गहरा भरोसा हो कि उनकी मेहनत के साथ कोई छल नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि युवाओं के इसी विश्वास को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार ने देश का सबसे कठोर और सख्त नकल विरोधी कानून देवभूमि की धरती पर लागू किया है। एक समय था जब भर्ती परीक्षाओं में होने वाली धांधलियों और पेपर लीक की खबरों से ईमानदार युवाओं का मनोबल टूट जाता था, लेकिन सरकार ने संगठित नकल माफिया की रीढ़ तोड़ते हुए न केवल दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा, बल्कि यह सुनिश्चित किया कि आगे से हर परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से आयोजित हो।
पारदर्शिता की इसी दृढ़ नीति का सुपरिणाम है कि बीते पांच वर्षों के भीतर राज्य में चौंतीस हजार से अधिक युवाओं को पूरी तरह उनकी योग्यता और प्रतिभा के आधार पर सरकारी नौकरियों में चयनित किया गया है। बिना किसी सिफारिश और बिना किसी अनुचित प्रभाव के साधारण परिवारों के बच्चों का चयन इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि राज्य में अब केवल प्रतिभा और परिश्रम का सम्मान होता है। परंतु इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि राज्य सरकार का अंतिम लक्ष्य केवल युवाओं को सरकारी कुर्सियों तक पहुंचाना ही नहीं है। सरकारी तंत्र की अपनी एक सीमित क्षमता होती है, इसलिए सरकार का व्यापक दृष्टिकोण यह है कि उत्तराखंड का नौजवान केवल नौकरी मांगने वाली कतार में खड़ा न रहे, बल्कि वह अपनी उद्यमशीलता, अपनी नवाचार क्षमता और अपने आत्मविश्वास के बल पर दूसरों को रोजगार देने वाला सक्षम उद्यमी बने।

राज्य में तेजी से बदलती आर्थिक और सामाजिक चेतना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने रिवर्स पलायन की सुखद बयार की चर्चा की। कभी रोजगार की तलाश में वीरान हो रहे पहाड़ के गांवों में अब एक नई सुबह देखने को मिल रही है। राज्य सरकार द्वारा स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, एरोमैटिक खेती, बागवानी, जैविक कृषि, साहसिक पर्यटन और विशेष रूप से होमस्टे नीति को दिए गए ऐतिहासिक प्रोत्साहनों का परिणाम है कि आज हजारों प्रवासी युवा शहरों की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी को छोड़कर अपने पैतृक गांवों की ओर लौट रहे हैं। ये नौजवान अपने पुराने घरों को आकर्षक होमस्टे में बदलकर देश-विदेश के पर्यटकों को पहाड़ी संस्कृति और आतिथ्य का स्वाद चखा रहे हैं, स्थानीय मंडुवा, झंगोरा, दालों और औषधीय जड़ी-बूटियों की आधुनिक ब्रांडिंग और पैकेजिंग कर राष्ट्रीय बाजारों में बेच रहे हैं, और सबसे बड़ी बात यह है कि वे न केवल आत्मनिर्भर बन रहे हैं बल्कि अपने ही गांव के अन्य लोगों को भी सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। स्वरोजगार और स्टार्टअप का यह बढ़ता आंदोलन ही वास्तव में उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ बनेगा।
इस योजना का Live कार्यक्रम यहां पर क्लिक कर के देख सकते है।
युवाओं को राज्य की विकास प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में सरकार की नई सोच को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने एक और अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार प्रदेश के ढाई लाख से अधिक युवा विद्यार्थियों के साथ सीधे तौर पर वैचारिक मंथन कर रही है ताकि आने वाले पच्चीस वर्षों के उत्तराखंड का खाका उन्हीं की आकांक्षाओं के अनुरूप तैयार किया जा सके। सरकार यह बिल्कुल नहीं चाहती कि नीतियां केवल सचिवालय के वातानुकूलित कमरों में बैठकर अफसरों द्वारा बनाई जाएं और युवा केवल उनके निष्क्रिय लाभार्थी बनकर रह जाएं। युवा क्या सोचता है, उसकी जरूरतें क्या हैं, रोजगार के नए क्षेत्रों को लेकर उसके क्या सुझाव हैं, इन सभी को सीधे नीति निर्माण में समाहित करने के लिए प्रदेश में बहुत जल्द एक पूर्णतः समर्पित और सशक्त ‘युवा आयोग’ का गठन किया जाएगा। यह आयोग युवाओं की आशाओं, रोजगार के अवसरों, खेल प्रतिभाओं के संरक्षण और नवाचारों को नीतिगत समर्थन देने के लिए एक स्थायी थिंक-टैंक के रूप में कार्य करेगा।
कार्यक्रम के दौरान जब मुख्यमंत्री सीधे मंच से उतरकर विद्यार्थियों के बीच पहुंचे, तो पूरे सभागार में एक अलग ही ऊर्जा और आत्मीयता का संचार हुआ। मुख्यमंत्री ने एक अभिभावक और बड़े भाई की भांति छात्र-छात्राओं के पास बैठकर उनसे उनकी पढ़ाई, उनके दैनिक संघर्षों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों और उनके जीवन के अंतिम लक्ष्यों के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे कभी भी अपने सपनों को छोटा न करें। बड़े से बड़ा लक्ष्य भी तब तक ही असंभव लगता है जब तक कि उसके प्रति पहला कदम दृढ़ता से न उठा लिया जाए। जब युवा अपने संकल्प को विकल्प रहित बना लेता है, तो रास्ते की तमाम रुकावटें खुद-ब-खुद हट जाती हैं। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को यह भरोसा दिलाया कि सरकार हर मोड़ पर, हर चुनौती में उनके साथ एक मजबूत ढाल की तरह खड़ी है।
इस अवसर पर राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने योजना के विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ उच्च शिक्षा के परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगी। उच्च शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि महाविद्यालयों के अंतिम छोर पर बैठे छात्र तक भी इस योजना की जानकारी पहुंचे और कोई भी पात्र छात्र केवल जागरूकता की कमी के कारण इस स्वर्णिम अवसर से वंचित न रहे। इसके लिए हर कॉलेज में नोडल प्राध्यापक नियुक्त किए जा रहे हैं जो विद्यार्थियों को पंजीकरण से लेकर ऑनलाइन कक्षाओं में उपस्थित रहने तक हर कदम पर सहयोग करेंगे।
उच्च शिक्षा मंत्री ने इस बात पर भी विशेष बल दिया कि राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में केवल पारंपरिक पढ़ाई ही नहीं कराई जा रही, बल्कि उन्हें पूरी तरह आधुनिक तकनीक से सुसज्जित किया जा रहा है। डिजिटल शिक्षा के विस्तार की दिशा में ई-ग्रंथालय परियोजना एक वरदान साबित हो रही है, जिसके माध्यम से राज्य के किसी भी कोने में बैठा छात्र देश-विदेश की लगभग बीस लाख महत्वपूर्ण पुस्तकों, शोध पत्रों और जर्नल्स तक अपनी सीधी डिजिटल पहुंच बना पा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी नीतिगत फैसले की घोषणा करते हुए बताया कि इसी शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के सभी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के छात्रसंघ चुनावों में छात्राओं के लिए पचास प्रतिशत पद अनिवार्य रूप से आरक्षित किए जा रहे हैं। जब हमारी छात्राएं छात्र राजनीति के स्तर से ही नेतृत्व करना सीखेंगी, तो आगे चलकर वे राज्य और राष्ट्र की मुख्यधारा की राजनीति और नीति निर्धारण में भी अपनी सशक्त और निर्णायक भूमिका दर्ज कराएंगी।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने योजना से अनुबंधित कोचिंग संस्थानों और शिक्षकों को एक अत्यंत संवेदनशील और विचारणीय संदेश दिया। मुख्य सचिव ने कहा कि इस योजना से जुड़े संस्थानों को इसे महज एक सामान्य व्यावसायिक अनुबंध या सरकारी दायित्व मानकर काम नहीं करना चाहिए। यह देवभूमि के उन बच्चों के भविष्य को गढ़ने का एक पवित्र सामाजिक अनुष्ठान है जो बहुत सीमित संसाधनों से निकलकर आते हैं। प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की गति, उसकी पृष्ठभूमि और उसकी मानसिक क्षमता अलग होती है। ऐसे में शिक्षकों को चाहिए कि वे व्यक्तिगत स्तर पर विद्यार्थियों से संवाद स्थापित करें, उनकी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करें और उनके भीतर यह विश्वास जगाएं कि वे किसी भी बड़े शहर के महंगे स्कूलों में पढ़े छात्र से कमतर नहीं हैं। मुख्य सचिव ने विद्यार्थियों को भी अनुशासन और निरंतरता का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि सरकारी सुविधाएं और कोचिंग केवल रास्ता दिखा सकती हैं, लेकिन उस रास्ते पर दौड़ने का काम स्वयं छात्र को ही करना होगा। कठिन साधना और अटल संकल्प के बिना कोई भी मंजिल हासिल नहीं की जा सकती।
‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का धरातल पर उतरना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उत्तराखंड अब पारंपरिक प्रशासनिक सीमाओं से बाहर निकलकर ज्ञान आधारित आधुनिक समाज की ओर कदम बढ़ा रहा है। जब राज्य के दूरस्थ चोटी पर बैठे किसी चरवाहे या सीमांत किसान का बच्चा अपने ही गांव के कॉलेज से ऑनलाइन जुड़कर देश की सबसे कठिन परीक्षा को पास करके निकलेगा, तब वास्तव में इस योजना की सार्थकता सिद्ध होगी। युवाओं को सम्मान, पारदर्शी व्यवस्था, आधुनिक संसाधन और नेतृत्व के समान अवसर देकर ही उत्तराखंड को देश का अग्रणी और सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का जो स्वप्न देखा गया है, उसे साकार किया जा सकता है। देवभूमि की यह युवा पीढ़ी अपनी बौद्धिक क्षमता और चारित्रिक दृढ़ता के बल पर आने वाले समय में न केवल राज्य का मान बढ़ाएगी, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के नव-निर्माण में अपना अप्रतिम योगदान देकर इतिहास रचेगी। (Mukhyamantri Yuva Bhavishya Nirman Yojana)
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