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Dehradun Single-use Plastic: सिंगल यूज प्लास्टिक पर देहरादून में प्रशासन की सख्ती जारी

On: September 4, 2026 6:02 AM
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Dehradun Single-use Plastic: सिंगल यूज प्लास्टिक पर देहरादून में प्रशासन की सख्ती जारी
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Dehradun Single-use Plastic News: उत्तराखंड की हसीन वादियों की गोद में बसी राजधानी देहरादून अपने शांत वातावरण, मनमोहक आबोहवा और नैसर्गिक सौंदर्य के लिए विश्व भर में पहचानी जाती रही है। बीते कुछ दशकों में शहरीकरण की तेज रफ्तार और बदलती जीवनशैली ने जिस एक समस्या को सबसे विकराल रूप में खड़ा किया है, वह है गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरा और विशेष रूप से सिंगल यूज प्लास्टिक। इस अदृश्य जहर ने न केवल शहर के नालों, गधेरों और नदियों का दम घोंटा है, बल्कि शिवालिक की पहाड़ियों के निचले हिस्से में बसे इस दून नगर के समूचे पारिस्थितिकी संतुलन को भी गहरे संकट में डाल दिया है। इसी खतरे की गंभीरता को भांपते हुए जिला प्रशासन ने अब महज कागजी आदेशों से आगे बढ़कर धरातल पर निर्णायक जंग छेड़ने का मन बना लिया है।

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photo- Mdano News Dehradun Single-use Plastic

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देशों के बाद देहरादून का समूचा प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। शहर के अलग-अलग वार्डों में तैनात किए गए सेक्टर अधिकारियों ने केवल जांच तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि हर उस बाजार, गली और चौराहे की घेराबंदी शुरू कर दी है जहां प्रतिबंधित थैलियों और प्लास्टिक उत्पादों का अवैध लेन-देन चल रहा था। इसी क्रम में वार्ड संख्या अठहत्तर के अंतर्गत आने वाले टर्नर रोड, मुन्नी चौक और अंतरराज्यीय बस अड्डे यानी आईएसबीटी के नजदीकी व्यावसायिक क्षेत्रों में चलाया गया औचक सघन अभियान शहर में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। इस औचक कार्रवाई ने नियमों को ताक पर रखकर काम करने वाले मुनाफाखोरों के बीच स्पष्ट संदेश पहुंचा दिया है कि अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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photo- Mdano News Dehradun Single-use Plastic

जिला सूचना अधिकारी प्रियंका जोशी और नगर निगम के अनुभवी सेनेटरी इंस्पेक्टर राजीव कुमार सैनी की अगुवाई में गठित संयुक्त जांच टीम जब गुरुवार की सुबह टर्नर रोड के बाजारों में उतरी, तो वहां सामान्य दिनों जैसी चहल-पहल अचानक सन्नाटे में बदल गई। मुन्नी चौक से लेकर आईएसबीटी के व्यस्ततम बाजार तक टीम ने एक के बाद एक कुल अड़तीस व्यापारिक प्रतिष्ठानों का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया। प्रशासनिक अफसरों ने दुकानों के काउंटर, गोदाम, तहखाने और सामान रखने वाले थैलों तक की पड़ताल की। इस दौरान छह दुकानों में नियमों की खुली अवहेलना पाई गई, जहां ग्राहकों को खुलेआम प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के थैलों में सामान दिया जा रहा था। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन छह प्रतिष्ठानों से लगभग उन्नीस किलोग्राम प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री जब्त की और दुकानदारों पर कुल नौ हजार पांच सौ रुपये का नकद अर्थदंड लगाया।

निरीक्षण की इस प्रक्रिया के दौरान केवल प्लास्टिक जब्ती ही नहीं हुई, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी पैनी नजर रखी गई। इसी जांच के बीच टीम की नजर एक ऐसे मांस विक्रेता पर पड़ी जो अपनी दुकान पर एक्सपायर हो चुके लाइसेंस के सहारे कारोबार चला रहा था। खाद्य सुरक्षा और नागरिक स्वास्थ्य के मानकों की यह अनदेखी देखकर अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया और संबंधित दुकानदार को तत्काल प्रभाव से नगर निगम से अपना लाइसेंस नवीनीकृत कराने की अंतिम चेतावनी दी। स्पष्ट किया गया कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर नियमों की पूर्ति नहीं की गई, तो दुकान को पूरी तरह सील करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस पूरी कार्रवाई में वार्ड अठहत्तर के सुपरवाइजर अशोक कुमार भी मौजूद रहे, जिन्होंने स्थानीय भौगोलिक स्थिति और दुकानों के नेटवर्क की पहचान में मुख्य भूमिका निभाई।

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photo- Mdano News Dehradun Single-use Plastic

प्रशासन की इस मुहिम की सबसे अनूठी और मानवीय बात यह रही कि अधिकारियों का लहजा केवल एक दंडात्मक चाबुक चलाने वाले अफसर का नहीं था, बल्कि वे एक मार्गदर्शक और सजग नागरिक की भूमिका में दिखे। जिला सूचना अधिकारी प्रियंका जोशी और सेनेटरी इंस्पेक्टर राजीव सैनी ने मौके पर जमा हुए दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी संचालकों और आम खरीदारों से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने बहुत ही सरल और आत्मीय भाषा में समझाया कि चंद रुपयों और थोड़ी सी सुविधा के लिए अपनाया जाने वाला यह प्लास्टिक किस तरह हमारी नालियों को चोक कर रहा है, जिसके कारण हल्की सी बारिश में भी शहर जलभराव का शिकार हो जाता है। यही प्लास्टिक उड़कर प्राकृतिक जल स्रोतों में जाता है, जहां यह सूक्ष्म कणों में टूटकर पानी, मिट्टी और हमारे भोजन चक्र में जहर घोलता है।

अधिकारियों ने व्यापारियों और नागरिकों से हाथ जोड़कर अपील की कि वे अपने पुरखों की उस पुरानी और समझदारी भरी आदत की ओर लौटें, जहां हर घर से बाजार जाने वाला व्यक्ति अपने हाथ में कपड़े, जूट या सन से बना थैला लेकर निकलता था। जब तक उपभोक्ता खुद प्लास्टिक की थैली लेने से इनकार नहीं करेगा, तब तक केवल छापेमारी के दम पर इस बुराई को पूरी तरह खत्म कर पाना बेहद मुश्किल होगा। स्थानीय व्यापारियों ने भी इस बात की गंभीरता को समझा और कई दुकानदारों ने मौके पर ही संकल्प लिया कि वे भविष्य में अपनी दुकानों पर किसी भी रूप में प्रतिबंधित प्लास्टिक का भंडारण अथवा वितरण नहीं करेंगे।

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photo- Mdano News Dehradun Single-use Plastic

देहरादून को स्वच्छ और कचरा-मुक्त बनाने का यह संकल्प किसी एक दिन की औपचारिक औचक जांच तक सीमित नहीं है। जिलाधिकारी द्वारा नगर निगम क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में निगरानी रखने के लिए पूरे पचास सेक्टर अधिकारी तैनात किए गए हैं। इन अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही तय की गई है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में नियमित गश्त करें, औचक निरीक्षण करें और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बिना किसी पक्षपात के सख्त कार्रवाई अमल में लाएं। यह व्यापक प्रशासनिक तंत्र इस बात का प्रमाण है कि शहर को इस नासूर से मुक्त कराने के लिए शासन स्तर पर कितनी गंभीर इच्छाशक्ति मौजूद है।

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वास्तव में दून घाटी की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि यहां का प्राकृतिक अपवाह तंत्र बहुत नाजुक है। जब प्लास्टिक का कचरा रिस्पना और बिंदाल जैसी नदियों के मुहानों पर जमा होता है, तो यह पूरे शहर के जल निकासी तंत्र को ध्वस्त कर देता है। यही कारण है कि आज देहरादून का हर सजग नागरिक इस बात को महसूस कर रहा है कि अगर अब भी कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को हम एक कंक्रीट और प्लास्टिक के ढेर में तब्दील हो चुका शहर सौंपेंगे। प्रशासन द्वारा टर्नर रोड पर की गई यह कार्रवाई एक मील का पत्थर है जो यह रेखांकित करती है कि व्यवस्था जब जागती है, तो बदलाव की शुरुआत धरातल से होती है।

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photo- Mdano News Dehradun Single-use Plastic

अब जिम्मेदारी पूरी तरह शहरवासियों के कंधों पर आ टिकी है। प्रशासन अपनी तरफ से निगरानी रख सकता है, छापे मार सकता है और आर्थिक दंड लगा सकता है, लेकिन पर्यावरण की यह लड़ाई वास्तव में तभी जीती जाएगी जब जनचेतना एक जनआंदोलन का रूप ले लेगी। जब हर खरीदार अपनी जेब या वाहन में कपड़े का थैला रखना अपनी आदत बना लेगा और हर दुकानदार प्लास्टिक देने से साफ मना करने का साहस दिखाएगा, तभी राजधानी देहरादून अपने पुराने, हरे-भरे, स्वच्छ और गौरवशाली स्वरूप को पूरी तरह पुनः प्राप्त कर सकेगी।

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