Uttarakhand Rahul Gandhi Fir: उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद आयोजित किए गए तथाकथित शुद्धिकरण और हवन को लेकर देश का सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है। कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम को सीधे तौर पर देश के सबसे प्रमुख दलित नेताओं में शुमार मल्लिकार्जुन खरगे के स्वाभिमान और देश के करोड़ों शोषितों की अस्मिता पर हमला करार दिया है। नई दिल्ली में आयोजित एक बेहद आक्रामक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मसले पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी की शीर्ष लीडरशिप को निशाने पर लिया। राहुल गांधी ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक प्रमुख राष्ट्रीय दल के अध्यक्ष, जो दलित समाज से आते हैं, उनके सार्वजनिक मंच पर बोलने के बाद मैदान को गंगाजल और हवन से शुद्ध करने की यह हरकत महज कोई स्थानीय घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे संविधान द्वारा प्रतिबंधित की जा चुकी छुआछूत की घृणित मानसिकता का खुला प्रदर्शन है।
उन्होंने केंद्र और उत्तराखंड की राज्य सरकार से मांग की कि इस कृत्य को अंजाम देने वाले और उसका सार्वजनिक रूप से बचाव करने वाले तमाम लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत तुरंत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इस पूरे राजनीतिक विवाद की जड़ें अगस्त महीने के शुरुआती दिनों में जुड़ी हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आठ अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया था। इस रैली के ठीक दो दिन बाद, यानी दस अगस्त को, कुछ स्थानीय संगठनों और व्यक्तियों द्वारा उसी मैदान और मंच पर कथित रूप से गंगाजल छिड़ककर और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन कर शुद्धिकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जैसे ही इस आयोजन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर फैले, कांग्रेस पार्टी के भीतर गहरा आक्रोश पनप गया।
कांग्रेस नेताओं ने इसे सीधे तौर पर खरगे की जातिगत पृष्ठभूमि से जोड़ते हुए भाजपा और संघ परिवार से प्रेरित कृत्य करार दिया। हालांकि, विवाद को तब और ज्यादा हवा मिल गई जब उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट का एक बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने इस शुद्धिकरण का बचाव करते हुए कहा कि यह खरगे की जाति के कारण नहीं बल्कि वहां लगे नारों और माहौल के चलते किया गया था। राहुल गांधी ने अपनी प्रेस वार्ता की शुरुआत में ही देश के संविधान और प्राचीन व्यवस्था की तुलनात्मक तस्वीरें दिखाकर इस मुद्दे को एक बड़े वैचारिक फलक पर रख दिया। उन्होंने कहा कि आज देश में दो प्रमुख विचारधाराओं के बीच सीधा संघर्ष चल रहा है।
एक तरफ बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा स्थापित भारतीय संविधान की सोच है, जो हर नागरिक को जाति, धर्म और वर्ग से परे बराबरी, सम्मान और गरिमा का अधिकार देती है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वह कथित सोच है जो सामाजिक पदानुक्रम और जातिगत भेदभाव को किसी न किसी रूप में जिंदा रखना चाहती है। राहुल गांधी ने तीखे लहजे में कहा कि जब भी कोई दलित व्यक्ति अपनी योग्यता और संघर्ष के बल पर समाज में ऊंचा मुकाम हासिल करता है, तो सामंती मानसिकता के लोग उसे बर्दाश्त नहीं कर पाते और उसके सम्मान को ठेस पहुंचाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाते हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि घटना को बीते करीब बीस दिन का समय हो चुका है, लेकिन न तो उत्तराखंड की पुलिस ने इस पर कोई स्वतः संज्ञान लिया और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंचों से खुद को हर जाति और पूरे देश का प्रधानमंत्री बताते हैं, लेकिन जब उनकी ही पार्टी का एक प्रदेश अध्यक्ष इस तरह की घिनौनी और असंवैधानिक छुआछूत वाली हरकत का खुलेआम समर्थन करता है, तो प्रधानमंत्री की रहस्यमयी चुप्पी उनके दोहरे चरित्र को उजागर करती है। राहुल गांधी ने कहा कि उनका इस बात में कोई सरोकार नहीं है कि कौन नेता चुप है या कौन क्या बोल रहा है, उनकी एकमात्र चिंता यह है कि खुलेआम कानून तोड़ा गया है, संविधान के मूल्यों की धज्जियां उड़ाई गई हैं और इसलिए कानून के मुताबिक तुरंत एफआईआर दर्ज होनी ही चाहिए। अपनी बात को विस्तार देते हुए राहुल गांधी ने देश भर में दलित समुदाय द्वारा आज भी झेली जा रही सामाजिक प्रताड़नाओं के कई जमीनी उदाहरण रखे। उन्होंने कहा कि आज भी देश के तमाम हिस्सों में दलित बच्चों से सरकारी स्कूलों में शौचालय साफ करवाए जाने की खबरें आती हैं। गांवों में दलितों को सार्वजनिक कुओं से पानी भरने से रोका जाता है और ढाबों व चाय की दुकानों पर उनके लिए अलग बर्तन रखे जाते हैं। उन्होंने इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया कि उत्तर भारत के कई राज्यों में जब किसी दलित युवक की बारात निकलती है, तो उसे घोड़ी पर चढ़ने के लिए पुलिस सुरक्षा मांगनी पड़ती है या पत्थरों से बचने के लिए हेलमेट पहनना पड़ता है। राहुल गांधी ने कहा कि अगर देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक कद वाले व्यक्ति के साथ सरेआम इस तरह का सुलूक किया जा सकता है, तो आसानी से समझा जा सकता है कि देश के किसी दूरदराज गांव में रहने वाले एक सामान्य चार साल के दलित बच्चे या गरीब परिवार के साथ रोजमर्रा की जिंदगी में क्या कुछ गुजरता होगा। प्रेस वार्ता के दौरान राहुल गांधी ने अतीत की कुछ अन्य घटनाओं का भी हवाला दिया।
उन्होंने याद दिलाया कि कुछ समय पहले राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली के एक मंदिर दौरे के बाद भी इसी तरह के कथित शुद्धिकरण का मामला सामने आया था। इतना ही नहीं, एनडीए के घटक दल के प्रमुख नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के एक मंदिर में दर्शन करने के बाद भी ऐसे ही शुद्धिकरण की खबरें आई थीं। राहुल गांधी ने कहा कि इन सभी घटनाओं की कड़ियां एक ही मानसिकता से जुड़ती हैं, जहां सत्ता और धर्म के नाम पर दलितों को अपवित्र मानने की कुत्सित सोच आज के आधुनिक भारत में भी खुलेआम काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने अध्यक्ष के सम्मान की लड़ाई को महज एक राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहने देगी, बल्कि इसे इंसाफ मिलने तक देश भर में जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा। दूसरी तरफ, राहुल गांधी के इन तीखे हमलों पर भारतीय जनता पार्टी और उत्तराखंड की राज्य सरकार ने भी बेहद सख्त अंदाज में पलटवार किया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से मुद्दाविहीन हो चुकी है और अब वह उत्तराखंड की देवतुल्य जनता की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर धूमिल करने की घटिया राजनीति कर रही है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हल्द्वानी का रामलीला मैदान एक पवित्र सांस्कृतिक स्थल है जहां वर्षों से धार्मिक अनुष्ठान, लीलाएं और यज्ञ होते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की रैली के दौरान मैदान में बड़े पैमाने पर गंदगी फैलाई गई थी और कुछ विशेष लोगों द्वारा ऐसे नारे लगाए गए थे जिससे स्थानीय धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची थी। धामी के मुताबिक, यह आयोजन किसी राजनीतिक दल या सरकार ने नहीं किया था, बल्कि स्थानीय धार्मिक न्यास और समाज के लोगों ने मैदान की सामान्य साफ-सफाई और स्वच्छता के तहत यह कदम उठाया था, जिसका किसी की जाति से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री और अल्मोड़ा से भाजपा सांसद अजय टम्टा, जो स्वयं दलित समाज से आते हैं, उन्होंने भी राहुल गांधी के बयानों पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई। अजय टम्टा ने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति में छुआछूत या जातिगत भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है। यहां की रामलीलाओं में हर जाति और समुदाय के लोग मिलजुलकर हिस्सा लेते हैं। उन्होंने राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें उत्तराखंड की शांत और समरस भूमि को बदनाम करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
टम्टा ने जोर देकर कहा कि राजनीतिक रैलियों के बाद मैदानों में फैलने वाले कचरे और जूठन की सफाई करना एक सामान्य सामाजिक प्रक्रिया है और कांग्रेस इसे जानबूझकर जातिगत रंग देकर सियासी रोटियां सेंकने का प्रयास कर रही है। वहीं आयोजन से जुड़े राम तीर्थ न्यास के पदाधिकारियों का भी कहना है कि मंच और मैदान पर फैली गंदगी को साफ करने के बाद एक सामान्य शांति हवन किया गया था और इस सफाई कार्य में स्वयं दलित समाज के लोग भी शामिल थे। संसद के भीतर भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दे चुकी है। जब मल्लिकार्जुन खरगे ने स्वयं राज्यसभा में इस घटना का उल्लेख करते हुए अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त की थी, तो उस वक्त सदन के नेता और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया था कि भारतीय जनता पार्टी किसी भी प्रकार की छुआछूत या भेदभावपूर्ण गतिविधियों का न तो समर्थन करती है और न ही उसमें विश्वास रखती है।
नड्डा ने भरोसा दिलाया था कि इस तरह की घटनाओं के तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। हालांकि, कांग्रेस कार्यसमिति की हालिया बैठक में खरगे द्वारा अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं की शुरुआती चुप्पी पर नाराजगी जताए जाने की खबरों पर भी राहुल गांधी ने स्थिति स्पष्ट की। राहुल ने कहा कि खरगे जी ने यह कभी नहीं कहा कि पूरी कांग्रेस पार्टी उनके साथ नहीं है; उन्होंने केवल कुछ व्यक्तिगत असहजताओं का जिक्र किया था, जबकि पूरी पार्टी और वे खुद अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं। हल्द्वानी का यह विवाद अब केवल एक मैदान की सफाई या हवन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने आने वाले समय के लिए एक व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी इसे संविधान बचाओ और दलित स्वाभिमान के देशव्यापी विमर्श से जोड़कर सत्तापक्ष को घेरने में जुट गई है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा इसे हिंदू आस्था के प्रतीकों और ऐतिहासिक सांस्कृतिक स्थलों के सम्मान के रूप में पेश कर रही है। जिस तरह से राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री से एफआईआर की मांग की है, उससे साफ है कि यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक आने वाले दिनों में और अधिक गर्माने वाला है।
हल्द्वानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद ने अब नया कानूनी मोड़ ले लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस में औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। मिली जानकारी के अनुसार, यह मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) और धारा 299 (धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से किया गया कृत्य) के तहत दर्ज हुआ है। इसके साथ ही मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1) की सुसंगत धाराओं को भी शामिल किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि हाल ही में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयानों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले राहुल गांधी ने हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए कथित शुद्धिकरण को छुआछूत का कृत्य बताते हुए आयोजकों पर एससी/एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की थी। अब खुद नेता प्रतिपक्ष पर मुकदमा दर्ज होने से उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है।
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