Monsoon Tips रिमझिम फुहारें और मिट्टी की सौंधी खुशबू के साथ आने वाला बारिश का मौसम जितनी राहत और ताजगी लेकर आता है, उतनी ही चुनौतियां भी हमारे घर-परिवार के स्वास्थ्य के सामने खड़ी कर देता है। इस मौसम में चारों ओर फैली नमी और उमस के कारण मक्खियों और मच्छरों की तादाद बहुत तेजी से बढ़ने लगती है। ये छोटे-छोटे कीट केवल हमारी दैनिक शांति ही भंग नहीं करते, बल्कि डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड और हैजा जैसी गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण भी बनते हैं। बाजार में मिलने वाले रासायनिक स्प्रे और कॉइल्स फौरी राहत जरूर देते हैं, लेकिन उनमें मौजूद जहरीले रसायन बच्चों, बुजुर्गों और सांस की तकलीफ वाले लोगों के लिए बेहद नुकसानदेह साबित होते हैं। ऐसे में हमारी पारंपरिक रसोई और प्रकृति में मौजूद सुरक्षित घरेलू उपाय सबसे टिकाऊ और सेहतमंद विकल्प बनकर उभरते हैं।
घर की नमी और ठहरा हुआ पानी: समस्या की असली जड़ मानसून के दिनों में मच्छरों के पनपने का मुख्य केंद्र रुका हुआ पानी होता है। घर की छतों पर रखे पुराने गमले, टूटे बर्तन, कूलर की टंकियां और घर के आसपास की नालियां मच्छरों के अंडे देने के लिए सबसे मुफीद जगह बन जाती हैं। केवल साफ-सफाई कर देना ही काफी नहीं होता, बल्कि हर उस कोने की जांच जरूरी है जहां थोड़ा सा भी पानी रुका रह सकता है। सप्ताह में एक बार कूलरों को पूरी तरह सुखाना और गमलों की निचली प्लेटों से पानी खाली करना मच्छरों के प्रजनन चक्र को तोड़ने का सबसे पहला और अनिवार्य कदम है।
नीम और कपूर का अचूक सुरक्षा कवच आयुर्वेद में नीम को जीवाणुरोधी और कीटनाशक गुणों का भंडार माना गया है। बारिश के दिनों में नीम के तेल में थोड़ा सा कपूर पीसकर मिला लें और इसका दीपक शाम के समय घर के मुख्य द्वार या कमरों में जलाएं। इसकी गंध से मच्छर कमरे के आसपास भी नहीं फटकते हैं। इसके अलावा शाम के वक्त सूखे नीम के पत्तों और कपूर का हल्का धुआं पूरे घर में घुमाने से मक्खी और मच्छर तुरंत भाग जाते हैं। यह धुआं बाजार के केमिकल वाले धुएं की तरह फेफड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि हवा को भी शुद्ध करता है।

नींबू और लौंग की प्राकृतिक महक से मक्खियों का सफाया मक्खियों को खट्टी और तीखी गंध बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होती। इस साधारण से नियम का इस्तेमाल करके रसोई और खाने की मेज को मक्खियों से पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके लिए एक या दो नींबू को बीच से काटकर उसमें पांच-सात साबुत लौंग चुभो दें और इसे डाइनिंग टेबल, फल की टोकरी या रसोई के स्लैब पर रख दें। लौंग और नींबू के रस से निकलने वाला प्राकृतिक वाष्प मक्खियों को आसपास मंडराने से रोकता है और घर में एक भीनी ताजगी भी बनी रहती है।
पोंछे के पानी में सिरका और नमक का उपयोग गीले फर्श पर मक्खियां और बारीक कीड़े तेजी से आकर्षित होते हैं। बारिश के दिनों में सादे पानी से पोंछा लगाने के बजाय पानी में दो बड़े चम्मच सफेद सिरका, थोड़ा सा समुद्री नमक और कुछ बूंदें यूकेलिप्टस या सिट्रोनेला तेल की मिला लें। सिरका फर्श से खाने-पीने की गंध और चिपचिपाहट को मिटा देता है, जबकि नमक और एसेंशियल ऑयल की तेज गंध के कारण फर्श पर मक्खी और रेंगने वाले कीड़े बैठने की हिम्मत नहीं करते।
तुलसी और पुदीने की प्राकृतिक ढाल हमारे आंगन में लगी तुलसी केवल धार्मिक और औषधीय दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक कीट निवारक भी है। खिड़कियों और दरवाजों के पास तुलसी, पुदीना, गेंदा और लेमनग्रास के पौधे रखने से मच्छरों का घर के अंदर प्रवेश काफी हद तक रुक जाता है। यदि मच्छर बहुत परेशान कर रहे हों, तो पुदीने की पत्तियों को उबालकर उसके पानी को छान लें और एक स्प्रे बोतल में भरकर शाम के समय पर्दों और कोनों में छिड़क दें। इससे वातावरण में ताजगी भी आती है और कीट भी दूर रहते हैं। रसोई की स्वच्छता और कचरा प्रबंधन रसोई मक्खियों का सबसे पसंदीदा ठिकाना होती है।
मानसून में गीला कचरा बहुत तेजी से सड़ता है और उसमें मक्खियां अंडे देने लगती हैं। इसलिए जरूरी है कि गीले और सूखे कचरे को अलग रखा जाए और डस्टबिन को हमेशा ढक्कन लगाकर बंद रखा जाए। खाने-पीने की हर वस्तु, खासकर कटे हुए फल, दूध और मीठी चीजों को हमेशा पूरी तरह ढककर रखें। खाना पकाने के तुरंत बाद रसोई के स्लैब को सिरके वाले पानी से साफ कर देने से मक्खियां कभी आकर्षित नहीं होतीं।

व्यक्तिगत सुरक्षा और सावधानी के आसान तरीके घर के वातावरण को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ व्यक्तिगत सावधानी बरतना भी उतना ही जरूरी है। शाम के समय जब मच्छरों की गतिविधि सबसे अधिक होती है, तब पूरे बाजू के हल्के रंग के सूती कपड़े पहनना चाहिए, क्योंकि गहरे रंग मच्छरों को अधिक आकर्षित करते हैं। नारियल के तेल में कुछ बूंदें नीलगिरी या नीम के तेल की मिलाकर शरीर के खुले हिस्सों पर लगाने से यह किसी भी महंगे केमिकल युक्त बॉडी लोशन से बेहतर और सुरक्षित मच्छर रोधी का काम करता है। प्रकृति ने हमें समस्याओं के साथ-साथ उनके समाधान भी दिए हैं। थोड़े से अनुशासन, नियमित स्वच्छता और इन पारंपरिक घरेलू उपायों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर हम अपने परिवार को बारिश के मौसम में भी मक्खी-मच्छरों के प्रकोप और गंभीर बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं।
क्या करें (Do’s) पानी के स्रोतों की नियमित जांच: कूलर, गमलों की ट्रे, पक्षियों के बर्तन और छतों पर रखे बर्तनों का पानी हफ्ते में कम से कम दो बार खाली करके सुखाएं। प्राकृतिक रिपेलेंट का उपयोग: शाम के समय घर में नीम का तेल और कपूर का दीया जलाएं या सूखे नीम के पत्तों की हल्की धूणी दें। नमक और सिरके का पोंछा: फर्श की सफाई के पानी में सफेद सिरका, सेंधा नमक या कुछ बूंदें सिट्रोनेला/यूकेलिप्टस ऑयल मिलाएं। दरवाजे-खिड़कियों पर जाली: शाम ढलने से पहले (5 से 7 बजे के बीच) खिड़की-दरवाजे बंद रखें या महीन मेश जाली का उपयोग करें। पौधों से बचाव: बालकनी और खिड़कियों के पास तुलसी, लेमनग्रास, गेंदा और पुदीने के पौधे लगाएं, इनकी गंध कीटों को दूर रखती है। कचरा प्रबंधन: गीले कचरे के डिब्बे को हमेशा ढककर रखें और रोजाना साफ करें।
क्या न करें (Don’ts) पानी जमा न होने दें: घर के अंदर या आसपास किसी भी पुराने टायर, नारियल के खोल या खुले कंटेनर में 2-3 दिन से ज्यादा पानी जमा न रहने दें। गीलापन और सीलन नजरअंदाज न करें: रसोई के सिंक, बाथरूम के कोनों और वॉशबेसिन के नीचे नमी न रहने दें; सीलन वाली जगहें मच्छरों के छिपने का मुख्य ठिकाना बनती हैं। खाने की चीजें खुली न छोड़ें: पके भोजन, कटे फल और मीठी चीजों को कभी भी खुला न रखें; इससे मक्खियां तेजी से आकर्षित होती हैं। रासायनिक कॉइल्स का अत्यधिक धुआं न करें: बंद कमरों में केमिकल कॉइल जलाने से बचें, यह बच्चों और सांस के मरीजों के लिए हानिकारक होता है। अंधेरे और नम कोनों की अनदेखी न करें: पर्दे के पीछे, अलमारी के नीचे और सोफे के पिछले हिस्सों की सफाई टाले नहीं, दिन में कम से कम एक बार इन जगहों पर हवा और रोशनी आने दें।

त्वरित असरदार घरेलू नुस्खे नींबू और लौंग: आधे कटे नींबू में 6-8 लौंग दबाकर डाइनिंग टेबल या किचन स्लैब पर रखें; मक्खियां तुरंत दूर भागती हैं। पुदीने का स्प्रे: पानी में पुदीने की पत्तियां उबालकर ठंडा कर लें और इसे स्प्रे बोतल में भरकर पर्दों व कोनों पर छिड़कें। स्किन सुरक्षा: नारियल तेल में 4-5 बूंदें नीलगिरी या नीम का तेल मिलाकर हाथ-पैरों पर लगाएं; यह सुरक्षित और असरदार मॉस्किटो रिपेलेंट का काम करता है।
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