Delhi-Dehradun Economic Corridor: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को यातायात के अत्यधिक दबाव और रोजाना लगने वाले जाम से मुक्ति दिलाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया जा रहा है। दिल्ली-देहरादून आर्थिक कॉरिडोर (Delhi-Dehradun Economic Corridor) से जुड़ी 12 किलोमीटर लंबी निर्माणाधीन ‘ग्रीनफील्ड चार लेन बाईपास परियोजना’ का जायजा लेने के लिए हाल ही में देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्वयं निर्माण स्थलों का धरातलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों के साथ परियोजना की वर्तमान स्थिति, निर्माण की गुणवत्ता, कार्यस्थल पर मौजूद मशीनरी और मानव संसाधनों का विस्तार से समीक्षात्मक अवलोकन किया।
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में अपेक्षित तेजी लाई जाए और इसे उच्चतम गुणवत्ता मानकों के साथ पूरा किया जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनहित से जुड़ी यह एक बेहद संवेदनशील और रणनीतिक आधारभूत संरचना है। इसके निर्माण में किसी भी तरह की लापरवाही, तकनीकी खामी या अनावश्यक विलंब को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निर्माण कार्य को समय से पूरा करने के लिए अधिकारियों को नियमित निगरानी (रैंडम इंस्पेक्शन) करने के आदेश भी दिए गए हैं।

716 करोड़ रुपये की लागत और परियोजना का मुख्य रूट मैप
लगभग 716 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार हो रही यह चार लेन बाईपास परियोजना देहरादून शहर के बाहरी हिस्से को मुख्य आर्थिक गलियारे से जोड़ेगी। इस परियोजना का भौगोलिक फैलाव झाझरा से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-7 के नए पांवटा साहिब और बल्लूपुर खंड को आपस में जोड़ते हुए आशारोड़ी चेक पोस्ट के पास सीधे दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर में मिलता है।
इस कॉरिडोर के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद, यह बाईपास शहर के भीतर प्रवेश किए बिना भारी वाहनों और बाहरी राज्यों से आने-जाने वाले पारगमन (ट्रांजिट) यातायात को बाहर ही बाहर डायवर्ट करने का काम करेगा। प्रशासनिक अनुमान के अनुसार, यह परियोजना अप्रैल 2027 तक पूरी तरह बनकर तैयार होने की संभावना है। इसके पूरा होते ही देहरादून शहर के प्रमुख चौराहों और मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव 40 से 50 प्रतिशत तक कम हो जाएगा।

निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी मानक और सख्त सुरक्षा व्यवस्था
स्थलीय निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निर्माण में इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के कड़ाई से पालन पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क की शेल्फ-लाइफ और मजबूती से किसी भी सूरत में समझौता नहीं होना चाहिए। एनएचएआई को निर्देश दिया गया कि वे कार्यस्थल पर पर्याप्त मात्रा में आधुनिक मशीनरी, संसाधन और कुशल श्रमिकों की संख्या तुरंत बढ़ाएं ताकि परियोजना रफ्तार पकड़ सके।
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इसके साथ ही, आम जनता और राहगीरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जहां भी निर्माण कार्य चल रहा है, वहां:
- प्रभावी और मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जाए।
- रात और दिन दोनों समय स्पष्ट दिखने वाले चेतावनी संकेतक (Caution Boards/Reflectors) लगाए जाएं।
- निर्माण स्थलों पर यातायात प्रबंधन के लिए पर्याप्त ट्रैफिक मार्शल तैनात किए जाएं।
अधिकारियों से कहा गया है कि निर्माण गतिविधियों के कारण स्थानीय निवासियों, यात्रियों और पर्यटकों को किसी भी प्रकार की दैनिक असुविधा का सामना न करना पड़े।
प्रशासनिक बाधाओं का त्वरित समाधान और विभागीय समन्वय
परियोजना को निर्बाध गति से आगे बढ़ाने के लिए जिलाधिकारी ने एनएचएआई, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि यदि भूमि अधिग्रहण, तकनीकी अड़चनों, वन भूमि हस्तांतरण या किसी अन्य प्रशासनिक स्तर पर कोई समस्या उत्पन्न होती है, तो उसे उच्च स्तर पर बिना देरी किए तत्काल निस्तारित किया जाए।

परियोजना की मासिक आधार पर समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि कोई भी काम समय-सीमा से पीछे न छूटे। निरीक्षण के दौरान नगर मजिस्ट्रेट राकेश तिवारी, तहसीलदार सदर सुरेंद्र देव सहित राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के कई प्रमुख अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे, जिन्होंने जिलाधिकारी को आगामी कार्ययोजना और शेष बचे कार्यों का खाका प्रस्तुत किया।
देहरादून के नागरिकों और पर्यटन उद्योग को मिलेंगे अभूतपूर्व लाभ
इस बाईपास के बनने से देहरादून शहर के परिवहन ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेगा। वर्तमान समय में दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और पंजाब की तरफ से आने वाला भारी ट्रैफिक शहर के भीतर से गुजरता है, जिससे बल्लूपुर, प्रेमनगर और घंटाघर जैसे व्यस्त क्षेत्रों में घंटों लंबा जाम लग जाता है।
इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद भारी व्यावसायिक वाहन और बाहरी पर्यटक गाड़ियां शहर के बाहर से ही आशारोड़ी और झाझरा के रास्ते गंतव्य की ओर निकल जाएंगी। इससे न केवल स्थानीय नागरिकों के समय और ईंधन की भारी बचत होगी, बल्कि प्रदूषण के स्तर में भी काफी गिरावट आएगी। सुगम यातायात व्यवस्था से राज्य के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और दून घाटी में रहने वाले लोगों के जीवन की समग्र गुणवत्ता (Quality of Life) में सकारात्मक और स्थायी सुधार होगा।
गौैर हो कि निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने निर्माणाधीन विभिन्न स्थलों का अवलोकन करते हुए कार्यों की वर्तमान स्थिति, निर्माण गुणवत्ता, मशीनरी एवं मानव संसाधनों की उपलब्धता तथा कार्य की प्रगति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जनहित से जुड़ी एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना है, जिसके पूर्ण होने से देहरादून शहर में यातायात का दबाव कम होगा तथा स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को सुरक्षित, सुगम एवं बेहतर आवागमन की सुविधा उपलब्ध होगी।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की अनावश्यक बाधा अथवा विलंब स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने एनएचएआई अधिकारियों को कार्यस्थलों पर पर्याप्त मशीनरी, संसाधन एवं श्रमिक उपलब्ध कराते हुए निर्माण कार्यों में अपेक्षित गति लाने तथा प्रत्येक चरण की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर विशेष बल देते हुए कहा कि सभी कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप किए जाएं। साथ ही निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यातायात प्रबंधन, चेतावनी संकेतकों, बैरिकेडिंग एवं अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए, ताकि आमजन को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि परियोजना की नियमित समीक्षा की जाए तथा भूमि, तकनीकी अथवा अन्य प्रशासनिक स्तर पर यदि कोई समस्या उत्पन्न होती है तो उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए, जिससे निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के संचालित हो सके।








