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Uttarakhand monsoon 2026: मानसून से पहले अलर्ट मोड में देहरादून, प्रमुख सचिव ने की आपदा तैयारियों एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा

On: June 18, 2026 5:24 PM
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Uttarakhand monsoon 2026: मानसून से पहले अलर्ट मोड में देहरादून, प्रमुख सचिव ने की आपदा तैयारियों एवं पुनर्वास कार्यों की समीक्षा
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Uttarakhand monsoon 2026 News: देहरादून (उत्तराखंड)। मानसून के आगमन से पहले उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आपदा प्रबंधन और राहत व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए शासन और प्रशासन ने पूरी तरह से कमर कस ली है। आगामी वर्षाकाल के दौरान जनहानि और संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम करने के उद्देश्य से प्रमुख सचिव एवं जनपद प्रभारी डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक जिला कार्यालय सभागार में आयोजित की गई।

इस महत्वपूर्ण बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने मानसून पूर्व (Pre-Monsoon) तैयारियों, जलभराव की समस्या से निपटने के उपायों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जारी शमन कार्यों और संवेदनशील आबादी के पुनर्वास से जुड़ी विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की।

देहरादून में मानसून पूर्व तैयारियां

प्रशासन द्वारा इस वर्ष डेटा-आधारित विश्लेषण और पिछले वर्षों के अनुभवों के आधार पर सूक्ष्म योजना (Micro-planning) तैयार की गई है। मुख्य आंकड़ों और व्यवस्थाओं को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:

मुख्य घटक (Key Components)कुल संख्या / स्थितिवर्तमान प्रगति व रणनीति
कुल प्रमुख नाले169153 नालों की सफाई पूर्ण, शेष पर कार्य गतिमान
डी-वॉटरिंग पंप (De-watering Pumps)39जलभराव वाले संवेदनशील स्थलों (जैसे ISBT) पर तैनाती तय
चिन्हित भूस्खलन क्षेत्र (Landslide Zones)12किमाड़ी सहित क्रॉनिक स्लिप जोनों पर विशेष निगरानी
संवेदनशील विद्यालय (Vulnerable Schools)89नदी-नालों के समीप स्थित, सुरक्षा के विशेष निर्देश
संपर्क विहीन संभावित गांव (Isolated Villages)73भारी बारिश में कनेक्टिविटी टूटने वाले क्षेत्रों की पहचान
लीकेज मैपिंग (Water Leakage Points)18 स्थानरिसाव चिन्हित, सुधारीकरण का कार्य प्रगति पर

जलभराव और बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं की गहन समीक्षा

प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बैठक में सौंग नदी परियोजना, नंदा की चौकी क्षेत्र में चल रहे सुरक्षा कार्यों, नदी सफाई और चैनलाइजेशन (River Channelization) कार्यों की प्रगति की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून के विधिवत आरंभ होने से पहले सभी लंबित और निर्माणाधीन बाढ़ सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।

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ISBT क्षेत्र के लिए संयुक्त टीम का गठन

देहरादून का अंतरराज्यीय बस अड्डा (ISBT) क्षेत्र हर वर्ष मानसून में भारी जलभराव का गवाह बनता है। इस बार इस समस्या के स्थायी और त्वरित समाधान के लिए एक संयुक्त टीम का गठन किया गया है।

  • इस संयुक्त टीम में एमडीडीए (MDDA), लोक निर्माण विभाग (PWD), नगर निगम, सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी शामिल रहेंगे।
  • यह टीम समन्वित तरीके से ड्रेनेज सिस्टम में सुधार और पानी की तत्काल निकासी सुनिश्चित करेगी।
  • इसके साथ ही शहर के 12 अन्य प्रमुख नालों के सुधारीकरण और सफाई कार्यों को तत्काल शुरू करने को कहा गया है।

शॉर्ट ड्यूरेशन हाई इंटेंसिटी रेनफॉल (कम समय में अत्यधिक वर्षा): बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होने की घटनाएं बढ़ी हैं। इसके लिए मौसम विभाग के सहयोग से डेटा-आधारित विश्लेषण किया जा रहा है ताकि संभावित जलभराव वाले हॉटस्पॉट की अग्रिम पहचान कर वहां पहले से ही सुरक्षात्मक कदम उठाए जा सकें।

भूस्खलन (Landslide) और क्लाउड बर्स्ट को लेकर अलर्ट

उत्तराखंड के पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन एक बड़ी चुनौती है। देहरादून जनपद में इस समय 12 लैंडस्लाइड और क्रॉनिक स्लिप जोन चिन्हित किए गए हैं।

  • किमाड़ी क्षेत्र पर विशेष ध्यान: प्रमुख सचिव ने किमाड़ी जैसे अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में केवल तात्कालिक सुरक्षा उपाय करने के बजाय एक स्थायी और दीर्घकालिक (Long-term) कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं ताकि ढलान स्थिरता (Slope Stabilization) सुनिश्चित की जा सके।
  • पूर्व चेतावनी तंत्र (Early Warning System): जिन क्षेत्रों में अतिवृष्टि या बादल फटने (Cloud Burst) की संभावना अधिक होती है, वहां सैटेलाइट और रडार आधारित चेतावनी प्रणालियों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर संचार तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के वार रूम और नियंत्रण कक्ष (Control Room) को 24×7 सक्रिय रखने के आदेश दिए गए हैं।
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photo Uttarakhand monsoon

संवेदनशील आबादी और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए ‘प्रॉम्ट एक्शन प्लान’

इस समीक्षा बैठक का सबसे मानवीय और महत्वपूर्ण पहलू गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर बनाई गई रणनीति रही।

गर्भवती महिलाओं के लिए एडवांस रिलीफ प्लान

जनपद के 73 गांव ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जो भारी बारिश के दिनों में मुख्य मार्गों से कट जाते हैं और जहां नदी-नाले उफान पर आने से कनेक्टिविटी पूरी तरह बाधित हो जाती है।

  1. प्रशासन ने इन गांवों की सभी गर्भवती महिलाओं का डेटाबेस तैयार कर लिया है।
  2. प्रसव की संभावित तिथि (EDD) के आधार पर मानसून अवधि के दौरान इन महिलाओं को समय से पहले ही नजदीकी चिकित्सालयों या सुरक्षित स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती करा दिया जाएगा।
  3. अस्पताल में रहने के दौरान गर्भवती महिला और उनके साथ आने वाले तीमारदार (Attendant) के रहने और भोजन आदि का पूरा खर्च स्वास्थ्य विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।

जोखिमयुक्त विद्यालयों की निगरानी

बरसात के मौसम में उफान पर आने वाले नदी-नालों के मार्ग में पड़ने वाले 89 स्कूलों की पहचान की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि अत्यधिक बारिश की चेतावनी (Red/Orange Alert) के दौरान इन स्कूलों में एहतियातन छुट्टी घोषित की जाए या वैकल्पिक सुरक्षित स्थानों से कक्षाओं का संचालन किया जाए।

वेक्टर जनित बीमारियों (Dengue & Malaria) पर वार

स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की समीक्षा करते हुए प्रमुख सचिव ने जलभराव वाले स्थानों पर विशेष नजर रखने को कहा। मानसून के साथ ही डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके लिए:

  • पूरे जनपद में नियमित फॉगिंग और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव सुनिश्चित किया जाएगा।
  • आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
  • पेयजल आपूर्ति लाइनों में रिसाव रोकने के लिए जो 18 लीकेज पॉइंट चिन्हित किए गए हैं, उन्हें तुरंत ठीक किया जा रहा है ताकि दूषित पानी से होने वाली बीमारियों (Water-borne diseases) पर लगाम लगाई जा सके।

कृषि क्षेत्र और ग्राउंड जीरो का निरीक्षण

आपदा प्रबंधन के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान से बचाने के लिए कृषि विभाग को भी अलर्ट किया गया है। विभाग को निर्देशित किया गया है कि मानसून के दौरान किसानों को खाद, उन्नत बीज और अन्य आवश्यक कृषि इनपुट्स की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की देरी न हो। इसके अलावा, तेज हवाओं और बारिश के कारण संभावित वृक्ष गिरने (Tree Falling) की घटनाओं को रोकने के लिए चिन्हित जर्जर और खतरनाक पेड़ों की समयबद्ध छंटनी या निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं। रैन बसेरों और राहत शिविरों (Relief Camps) को सभी आवश्यक राशन और चिकित्सा किट के साथ तैयार रखने को कहा गया है।

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photo- Uttarakhand monsoon

कार्लीगाड़ और माझाड़ा का स्थलीय निरीक्षण

बैठक के समापन के तुरंत बाद प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों की टीम के साथ ग्राउंड जीरो का रुख किया। उन्होंने कार्लीगाड़ एवं माझाड़ा क्षेत्र सहित पिछले वर्ष की आपदाओं से प्रभावित रहे विभिन्न स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास (Rehabilitation) कार्यों की गति, नदी चैनलाइजेशन (River Channelization) परियोजनाओं और विस्थापितों के लिए की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी किए।

प्रशासन की इस मुस्तैदी और अग्रिम तैयारियों से स्पष्ट है कि इस बार देहरादून में मानसून की चुनौतियों से निपटने के लिए “प्रतिक्रियात्मक” (Reactive) होने के बजाय “निवारक” (Proactive) दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है, ताकि हर एक नागरिक की जान-माल की मुकम्मल सुरक्षा की जा सके। Mdano News

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photo- Uttarakhand monsoon

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