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असम विमान हादसे में उत्तराखंड के जांबाज स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह शहीद

On: June 14, 2026 8:38 AM
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देश सेवा की राह पर चलते हुए उत्तराखंड के एक और वीर सपूत ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दे दिया है। असम में हुए एक बेहद दर्दनाक और दुखद विमान हादसे में भारतीय वायुसेना (IAF) के होनहार अधिकारी स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह (32 वर्ष) शहीद हो गए। शनिवार को जैसे ही उनके बलिदान होने की आधिकारिक खबर उनके गृह जनपद देहरादून के सेलाकुई पहुंची, पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया। राजा रोड स्थित श्रीराम पुरम कॉलोनी और आसपास के विकासनगर इलाके में हर आंख नम है और हर कोई इस जांबाज की शहादत पर गर्व के साथ-साथ गहरे शोक में डूबा हुआ है।

विरासत में मिला था देश सेवा का जज्बा

स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह का पूरा परिवार सैन्य और सुरक्षा बलों की गौरवशाली पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है। उनके खून में देश भक्ति और मातृभूमि की रक्षा का जज्बा विरासत में मिला था। प्रशांत के पिता उमेश सिंह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में डिप्टी कमांडेंट के पद से सेवानिवृत्त हैं। पिता की वर्दी और देश के प्रति उनके समर्पण को देखकर ही प्रशांत ने बचपन से ही सेना में जाने का सपना संजोया था। उमेश सिंह और उनकी पत्नी वर्तमान में देहरादून जनपद के सेलाकुई में ही रहते हैं और अपने बेटे की सफलताओं पर हमेशा गर्व महसूस करते थे।

प्रशांत ने अपनी लगन और कठिन परिश्रम के बल पर करीब छह साल पहले भारतीय वायुसेना में बतौर फ्लाइंग ऑफिसर प्रवेश किया था। वायुसेना में शामिल होने के बाद उन्होंने अपनी अद्भुत कार्यकुशलता, अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के दम पर बहुत ही कम समय में स्क्वाड्रन लीडर के पद तक की दूरी तय की थी। वायुसेना के अधिकारी उन्हें एक बेहद अनुशासित, ऊर्जावान और होनहार पायलट के रूप में याद करते हैं।

डेढ़ साल पहले ही बंधा था शादी का बंधन

इस दुखद खबर ने न केवल एक माता-पिता से उनका होनहार बेटा छीना है, बल्कि एक नवविवाहिता का संसार भी उजाड़ दिया है। जांबाज प्रशांत सिंह की शादी करीब डेढ़ साल पहले ही देहरादून के सेलाकुई में बड़े ही धूमधाम से हुई थी। उनकी पत्नी पेशे से अधिवक्ता (वकील) हैं। शादी के बाद वे असम में ही प्रशांत के साथ वायुसेना स्टेशन के सरकारी आवास में रह रही थीं। कुछ ही समय पहले खुशियों से शुरू हुआ यह सफर इतनी जल्दी और इस दर्दनाक मोड़ पर समाप्त हो जाएगा, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। पति की शहादत की खबर के बाद से उनकी पत्नी और पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

खबर मिलते ही असम रवाना हुए माता-पिता

शनिवार के दिन जब सेलाकुई स्थित आवास पर वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों का फोन आया, तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जैसे ही इस दुखद हादसे की आधिकारिक और पुख्ता सूचना परिजनों को मिली, प्रशांत के वृद्ध माता-पिता सुध-बुध खो बैठे। वे तुरंत अपने जांबाज बेटे की पार्थिव देह को लेने और अंतिम औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए असम के लिए रवाना हो गए हैं। वायुसेना के अधिकारी लगातार परिवार के संपर्क में बने हुए हैं और सैन्य सम्मान के साथ शहीद के पार्थिव शरीर को देहरादून लाने की तैयारियां की जा रही हैं।

शोक जताने उमड़ा जनसैलाब, पूरे उत्तराखंड को वीर सपूत पर गर्व

जांबाज प्रशांत सिंह के बलिदान की खबर पूरे विकासनगर और पछवादून इलाके में आग की तरह फैल गई। खबर मिलते ही स्थानीय सभासद अनिल नौटियाल, पूर्व सैनिक निरंजन सिंह, सुरेंद्र गुसाईं और भाजपा नेता यशपाल नेगी समेत भारी संख्या में क्षेत्रवासी, पूर्व सैनिक और जनप्रतिनिधि श्रीराम पुरम कॉलोनी स्थित उनके आवास पर एकत्र होने लगे। घर पर मौजूद रिश्तेदारों और ढांढस बंधाने पहुंचे लोगों की आंखें नम थीं, लेकिन साथ ही सभी के दिलों में प्रशांत के सर्वोच्च बलिदान के प्रति गहरा सम्मान भी था।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पूर्व सैनिकों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड वीरभद्रा की भूमि है और यहां के युवाओं ने हमेशा देश की संप्रभुता के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए हैं। स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह ने महज 32 वर्ष की अल्पायु में देश सेवा की वेदी पर जो सर्वोच्च बलिदान दिया है, उस पर न केवल देहरादून बल्कि पूरे उत्तराखंड और देश को हमेशा गर्व रहेगा।

शहीद प्रशांत सिंह का अंतिम संस्कार उत्तराखंड में उनके पैतृक घाट पर पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा, जहां उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए सेना के वरिष्ठ अधिकारी और हजारों की संख्या में आम लोग शामिल होंगे।

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