Fuel Price Hike News In Hindi: देश में एक तरफ चुनावी सरगर्मी तेज है, तो दूसरी तरफ आम आदमी की जेब पर बड़े प्रहार की आहट सुनाई दे रही है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म और बाजार विशेषज्ञों की ताजा रिपोर्ट ने खलबली मचा दी है। दावों के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे भारी घाटे की भरपाई के लिए चुनाव के तुरंत बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की जा सकती है।
क्या कहती है मैक्वरी (Macquarie) की रिपोर्ट?
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वरी ग्रुप की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आए उछाल के बावजूद भारत में लंबे समय से पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्तमान में तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को:
- पेट्रोल पर: ₹18 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।
- डीजल पर: ₹35 प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
यह घाटा तब और बढ़ गया है जब वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल $135 से $165 प्रति बैरल के बीच झूल रहा है।

चुनाव और तेल की कीमतों का ‘कनेक्शन’
भारत में यह अक्सर देखा गया है कि महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों या लोकसभा चुनावों के दौरान तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं। वर्तमान में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनावी प्रक्रिया जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही इन राज्यों में मतदान संपन्न होगा और चुनावी आचार संहिता का प्रभाव कम होगा, तेल कंपनियां कीमतों में संशोधन (Revision) शुरू कर देंगी।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार ने उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में भारी कटौती नहीं की, तो तेल कंपनियों के पास कीमतों को ₹18 से ₹35 तक बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
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तेल कंपनियों का बढ़ता घाटा
इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी कंपनियां अप्रैल 2022 से खुदरा कीमतों में बड़ा बदलाव करने से बच रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इन कंपनियों को प्रतिदिन लगभग ₹1,600 करोड़ का मार्केटिंग लॉस हो रहा है। हालांकि सरकार ने मार्च में उत्पाद शुल्क में ₹10 की कटौती की थी, लेकिन वह घाटे को पाटने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुई है।
महंगाई का ‘डबल डोज’
अगर पेट्रोल और डीजल के दामों में इतनी बड़ी वृद्धि होती है, तो इसका सीधा असर माल ढुलाई (Logistics) पर पड़ेगा। डीजल महंगा होने से सब्जियों, फलों और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह “कॉस्ट-पुश इन्फ्लेशन” भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
आम जनता के लिए क्या हैं विकल्प?
सरकार वर्तमान में कच्चे तेल के आयात के लिए रूस और अन्य वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भरता बढ़ा रही है। साथ ही, एथेनॉल ब्लेंडिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि भविष्य में तेल के झटकों से बचा जा सके। लेकिन तत्काल राहत के लिए जनता की नजरें सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी या टैक्स कटौती पर टिकी हैं। फिलहाल ’18 और 35 रुपए’ की यह रिपोर्ट एक अनुमान है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। अब देखना यह है कि चुनाव के बाद सरकार आम जनता को इस महंगाई से बचाने के लिए क्या कदम उठाती है।
ताजा पेट्रोल और डीजल दरें (15 अप्रैल 2026)
| शहर (City) | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
| दिल्ली (Delhi) | 94.77 | 87.67 |
| मुम्बई (Mumbai) | 103.54 | 90.03 |
| कोलकाता (Kolkata) | 105.41 | 92.02 |
| चेन्नई (Chennai) | 101.23 | 92.81 |
| बेंगलुरु (Bengaluru) | 102.92 | 90.99 |
| हैदराबाद (Hyderabad) | 107.46 | 95.70 |
| पटना (Patna) | 106.11 | 94.04 |
| चंडीगढ़ (Chandigarh) | 94.30 | 82.45 |
| लखनऊ (Lucknow) | 94.73 | 88.90 |
| गुरुग्राम (Gurugram) | 95.36 | 87.83 |
| नोएडा (Noida) | 94.74 | 87.81 |
| लुधियाना (Ludhiana) | 98.28 | 88.90 |
| जयपुर (Jaipur) | 104.72 | 91.50 |
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