कुल्लू: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में देव परंपरा का पालन करते हुए स्थित विश्व प्रसिद्ध बिजली महादेव मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए तीन महीने की अवधि हेतु बंद कर दिए गए हैं। यह निर्णय सदियों पुरानी देव परंपरा के अनुसार लिया गया है, जिसके तहत पौष मास की संक्रांति के अवसर पर यहां के स्थानीय देवी-देवता ‘स्वर्ग प्रवास’ के लिए चले जाते हैं, जिसे शीतकालीन विश्राम भी माना जाता है।
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सोमवार, 15 दिसंबर 2025 को मंदिर के कपाट विधिवत देव विधि के साथ बंद किए गए। यह प्रक्रिया कुल्लू की खराहल घाटी में स्थित इस पवित्र स्थल के कारदार (मंदिर प्रबंधन से जुड़े मुख्य सेवक) और पुजारियों द्वारा पूरी की गई। कपाट बंद होने के साथ ही, अब मंदिर परिसर में आगामी तीन माह तक पूर्ण सन्नाटा पसरा रहेगा और श्रद्धालुओं को महादेव के दर्शनों के लिए इंतजार करना होगा।

पौष संक्रांति पर ‘स्वर्ग प्रवास’ की परंपरा
कुल्लू घाटी में यह एक गहरी आस्था और देव संस्कृति का प्रतीक है कि पौष मास की संक्रांति (लगभग 15 दिसंबर) से लेकर चैत्र मास की संक्रांति (लगभग 15 मार्च) तक स्थानीय देवी-देवता स्वर्ग या उच्च लोक में एक विशेष सभा के लिए प्रवास करते हैं। इस दौरान, देवता अपने गूर (देवता का संदेशवाहक) के माध्यम से समाज को दिए जाने वाले अपने दर्शन और दैवीय क्रियाकलापों को रोक देते हैं। बिजली महादेव मंदिर के कपाट बंद होने को इसी ‘स्वर्ग प्रवास’ का एक हिस्सा माना जाता है।
मंदिर कमेटी के कारदार और पदाधिकारियों ने इस संबंध में पुष्टि करते हुए बताया कि यह सदियों पुरानी देव परंपरा है जिसका सख्ती से पालन किया जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भी अपील की है कि वे कपाट बंद रहने की इस अवधि यानी 15 दिसंबर से 15 मार्च तक मंदिर का रुख न करें, ताकि देव नियमों में किसी प्रकार की बाधा न आए।

तीन माह तक वर्जित रहेगा प्रवेश
कपाट बंद रहने के तीन महीने की अवधि में मंदिर परिसर में प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। इस दौरान किसी भी तरह का पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान या लंगर आदि का आयोजन नहीं किया जाएगा। मंदिर के कोषाध्यक्ष फतेह सिंह राणा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि देव परंपरा के अनुसार, इस दौरान मंदिर परिसर में पूर्ण सन्नाटा रहता है। मंदिर कमेटी ने सभी श्रद्धालुओं से देव नियमों और परंपराओं का सम्मान करते हुए सहयोग की अपेक्षा की है।

इस अवधि में केवल महाशिवरात्रि के विशेष पर्व पर ही एक संक्षिप्त अवधि के लिए कपाट खुलने की संभावना है, ताकि श्रद्धालु महादेव के दर्शन कर सकें। इसके अलावा, पूरे तीन महीने मंदिर बंद रहेगा।

15 मार्च को फिर खुलेंगे कपाट
बताया गया है कि बिजली महादेव देवता चैत्र मास की संक्रांति पर वापस लौटेंगे। इसके पश्चात, 15 मार्च 2026 को मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए एक बार फिर विधिवत रूप से खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलने के बाद देवता की गुर के द्वारा साल भर की भविष्यवाणी की जाएगी, जिसका स्थानीय लोगों और दूर-दराज के श्रद्धालुओं को बेसब्री से इंतजार रहता है।

बिजली महादेव मंदिर, जो समुद्र तल से लगभग 2460 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, अपनी अनूठी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है कि यहां हर बारह साल में शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है, जिससे शिवलिंग खंडित हो जाता है। पुजारी बाद में मक्खन और सत्तू के मिश्रण से इसे जोड़ते हैं। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि कुल्लू घाटी की प्राचीन और समृद्ध देव संस्कृति का भी एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।
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