Delhi News in Hindi: दिल्ली कैबिनेट ने राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है। दिल्ली के मौजूदा 11 राजस्व जिलों को पुनर्गठित करके उनकी संख्या 13 करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है। यह कदम दिल्ली में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, नागरिक सेवाओं की ‘डिलीवरी’ में सुधार करने और जिले के अधिकारियों पर काम का बोझ कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
13 नए राजस्व जिले इस प्रकार हैं:
दिल्ली सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राजधानी में पहले 11 जिले थे। ये जिले थे: मध्य दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, नई दिल्ली, उत्तरी दिल्ली, उत्तर पूर्व, उत्तर पश्चिम, शाहदरा, दक्षिणी दिल्ली, दक्षिण पूर्व, दक्षिण पश्चिम और पश्चिम। इनमें से कुछ मौजूदा जिलों के क्षेत्रफल को विभाजित करके तीन नए जिले बनाए गए हैं, जबकि एक मूल जिले को भंग कर दिया गया है। दिल्ली सरकार का कहना है कि तीनों नए जिलों का क्षेत्रफल लगभग बराबर है।
क्यों पड़ी पुनर्गठन की जरूरत?
दिल्ली में आखिरी बार 2012 में जिलों का पुनर्गठन हुआ था, जब इनकी संख्या 9 से बढ़ाकर 11 की गई थी। हालांकि, पिछले एक दशक में दिल्ली की जनसंख्या में भारी वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए, 2011 की जनगणना के अनुसार, दिल्ली की जनसंख्या 1.67 करोड़ थी, जो अब अनुमानित रूप से 2 करोड़ से अधिक हो गई है।
बढ़ता काम का बोझ: दिल्ली में जनसंख्या में वृद्धि के कारण कई जिलों में प्रशासनिक कामकाज और राजस्व संबंधी मामलों का बोझ बेतहाशा बढ़ गया है।

सेवाओं की डिलीवरी: दिल्ली सरकार का मानना है कि छोटे जिले होने से जिला मजिस्ट्रेट (DM) और अन्य अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र पर बेहतर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे, जिससे सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी की गुणवत्ता में सुधार होगा।
न्यायिक तालमेल: इस पुनर्गठन का एक लक्ष्य राजस्व जिलों और पुलिस जिलों की सीमाओं के बीच सामंजस्य स्थापित करना भी है, जिससे कानूनी और प्रशासनिक मामलों में समन्वय आसान हो सके।
भूमि अधिग्रहण और मुआवजे का वितरण: भूमि अधिग्रहण, अतिक्रमण हटाने, और मुआवजे के वितरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी जिलों की संख्या बढ़ने से तेजी आएगी।

कौन से दो नए जिले बनेंगे?
प्रस्ताव के अनुसार, दिल्ली में दो नए जिले बनाए जाएंगे। हालांकि, कैबिनेट ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इन जिलों के नाम या सटीक सीमाओं की घोषणा नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, इन नए जिलों के लिए वर्तमान के सबसे बड़े और सबसे अधिक आबादी वाले जिलों की सीमाओं को छोटा किया जाएगा:
द्वारका: ऐसी संभावना है कि दक्षिण-पश्चिम दिल्ली जिले के कुछ हिस्सों को अलग करके ‘द्वारका’ नाम से एक नया जिला बनाया जा सकता है। यह क्षेत्र पहले से ही एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और आवासीय केंद्र है।
शाहादरा/पूर्वोत्तर दिल्ली का हिस्सा: दूसरा नया जिला पूर्वी दिल्ली या पूर्वोत्तर दिल्ली के कुछ हिस्सों को विभाजित करके बनाया जा सकता है, जो यमुना पार के क्षेत्रों में प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाएगा।
इन दोनों नए जिलों के बनने से अब दिल्ली में कुल 13 राजस्व जिले हो जाएंगे।
आगे की प्रक्रिया और चुनौतियां
कैबिनेट की मंजूरी के बाद, राजस्व विभाग अब इस पुनर्गठन को आधिकारिक रूप देने की दिशा में काम करेगा। इस प्रक्रिया में कई चरण शामिल होंगे:

सीमाओं का निर्धारण: नए जिलों की सटीक सीमाओं और अधिकार क्षेत्र का निर्धारण किया जाएगा।
अधिसूचना जारी करना: उपराज्यपाल (LG) की मंजूरी के बाद आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification) जारी की जाएगी।
बुनियादी ढांचे का विकास: नए जिलों के लिए डीएम कार्यालयों, तहसील कार्यालयों और अन्य प्रशासनिक भवनों सहित बुनियादी ढांचे की स्थापना की जाएगी।
कर्मचारियों का आवंटन: नए प्रशासनिक सेट-अप के लिए कर्मचारियों और अधिकारियों का उचित आवंटन सुनिश्चित किया जाएगा।
दिल्ली में दो नए जिलों का बनना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार है। यह न केवल प्रशासनिक दक्षता को बढ़ावा देगा बल्कि राजधानी के नागरिकों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच को भी सरल बनाएगा। सरकार का यह भी दावा है कि यह पुनर्गठन विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में मदद करेगा।
इस निर्णय का उद्देश्य दिल्ली की बढ़ती हुई और गतिशील जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करना है, जिससे हर नागरिक को बेहतर और समय पर प्रशासनिक सहायता मिल सके।












