Uttarakhand Election News In Hindi: उत्तराखंड में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी अप्रैल 2026 में राज्य भर में ‘SIR’ (Special Interim Revision – विशेष अंतरिम पुनरीक्षण) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। निर्वाचन कार्यालय ने मतदाता सूचियों को त्रुटिरहित बनाने और शत-प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि निर्वाचन कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

क्या है ‘SIR’ और क्यों है महत्वपूर्ण?
‘SIR‘ यानी विशेष अंतरिम पुनरीक्षण का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट करना है। इसके तहत:
- 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए युवाओं के नाम जोड़ना।
- मृतकों या स्थान परिवर्तन कर चुके मतदाताओं के नाम सूची से हटाना।
- वोटर आईडी कार्ड में त्रुटियों (नाम, पता, फोटो) का सुधार करना। अप्रैल माह में चलने वाले इस अभियान के दौरान ब्लॉक और बूथ स्तर पर विशेष कैंप लगाए जाएंगे ताकि कोई भी पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे।

3 जिलों में मैपिंग पर विशेष फोकस
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने समीक्षा बैठक के दौरान तीन विशिष्ट जिलों (संभवतः देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर) में ‘वोटर मैपिंग’ की गति तेज करने के निर्देश दिए हैं। इन जिलों में जनसंख्या घनत्व अधिक होने और भौगोलिक चुनौतियों के कारण मतदाता पुनरीक्षण में जटिलताएं आती हैं।
- मैपिंग का उद्देश्य: मतदान केंद्रों की दूरी, संवेदनशीलता और मतदाताओं की सुलभता का बारीकी से आकलन करना।
- अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे डिजिटल मैपिंग के जरिए उन क्षेत्रों की पहचान करें जहाँ पिछले चुनावों में मतदान प्रतिशत कम रहा था।

77 प्रतिशत बूथों पर BLA तैनात
लोकतंत्र की शुचिता बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 77 प्रतिशत बूथों पर बूथ लेवल एजेंट (BLA) की तैनाती का कार्य पूरा कर लिया गया है।
- BLA की भूमिका: बीएलए राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त किए जाते हैं जो सरकारी ‘बीएलओ’ (बूथ लेवल ऑफिसर) के साथ मिलकर मतदाता सूची की निष्पक्षता सुनिश्चित करते हैं।
- बाकी बचे 23 प्रतिशत बूथों पर भी जल्द ही तैनाती के लिए राजनीतिक दलों से संवाद किया जा रहा है ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी की चेतावनी: “ढिलाई बर्दाश्त नहीं”
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और रिटर्निंग अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि:
- समय सीमा का पालन: सभी चरणों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।
- लापरवाही पर कार्रवाई: यदि किसी बीएलओ या अधिकारी की ओर से जानबूझकर देरी या लापरवाही पाई गई, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- वोटर हेल्पलाइन: मतदाताओं की शिकायतों का निस्तारण त्वरित गति से किया जाए और डिजिटल प्लेटफॉर्म (Voter Helpline App) का व्यापक प्रचार हो।
सुदृढ़ लोकतंत्र की ओर कदम
उत्तराखंड में अप्रैल से होने वाला ‘SIR’ अभियान केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला है। 77% बूथों पर बीएलए की सक्रियता और तीन प्रमुख जिलों में सघन मैपिंग यह दर्शाती है कि इस बार चुनाव आयोग ‘हर वोट कीमती’ के मंत्र पर काम कर रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी की सख्ती यह सुनिश्चित करेगी कि आगामी चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हों।
उत्तराखंड में आगामी चुनावों के संबंध में वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
- विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR): निर्वाचन आयोग की तैयारियों के अनुसार, अप्रैल 2026 में पूरे प्रदेश में ‘विशेष अंतरिम पुनरीक्षण’ (Special Interim Revision) की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूचियों को अपडेट करना और नए मतदाताओं के नाम जोड़ना है।
- चुनावी वर्ष: उत्तराखंड विधानसभा के पिछले चुनाव फरवरी 2022 में हुए थे। इस लिहाज से अगले विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में होने की संभावना है।
- तैयारियां: हाल ही में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 3 जिलों में मैपिंग तेज करने और 77 प्रतिशत बूथों पर बीएलए (BLA) तैनात करने के निर्देश दिए हैं, जो बड़े चुनावों से पहले की जाने वाली प्रशासनिक तैयारी का हिस्सा है।







