उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में लंबे समय से चल रहा सूखे का दौर अब समाप्त होने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के पहाड़ी इलाकों में 21 जनवरी 2026 तक बर्फबारी और बारिश की प्रबल संभावना जताई है। दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के पहले दो हफ्तों में सामान्य से बहुत कम बर्फबारी के कारण जो पहाड़ सूखे और भूरे नजर आ रहे थे, वे अब सफेद चादर से ढकने के लिए तैयार हैं।

सक्रिय हो रहे हैं दो शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस मौसमी बदलाव का मुख्य कारण दो लगातार आने वाले पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) हैं:
- पहला विक्षोभ: 16 जनवरी 2026 को एक पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय हुआ है, जिसका असर ऊंचाई वाले इलाकों में दिखने लगा है।
- दूसरा विक्षोभ: 19 जनवरी को एक और अधिक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के आने का अनुमान है। इन दोनों सिस्टम्स के संयुक्त प्रभाव से 21 जनवरी तक और उसके बाद भी बर्फबारी की तीव्रता और क्षेत्रफल में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

किन इलाकों में होगी बर्फबारी?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 12,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मध्यम से भारी बर्फबारी हो सकती है। मुख्य रूप से निम्नलिखित जिलों में बर्फबारी और बारिश के आसार हैं:
- उत्तरकाशी और चमोली: इन जिलों के उच्च हिमालयी क्षेत्रों, विशेषकर केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के आसपास बर्फबारी की संभावना है।
- रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर: यहाँ के चोटियों पर भी मौसम बदलने और हिमपात होने के संकेत हैं।
- मैदानी इलाकों का हाल: हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में बर्फबारी तो नहीं, लेकिन घने कोहरे (Dense Fog) और ‘शीत दिवस’ (Cold Day) की स्थिति बनी रहेगी, जिसके लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

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पर्यटन और कृषि पर प्रभाव
बर्फबारी की इस खबर से उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र में खुशी की लहर है। औली, मसूरी, धनोल्टी और चोपता जैसे पर्यटक स्थलों पर बर्फ का इंतजार कर रहे सैलानियों के लिए यह एक अच्छी खबर है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि बर्फबारी के साथ ही होटलों की बुकिंग में और इजाफा होगा।

कृषि और पर्यावरण के नजरिए से भी यह बर्फबारी बेहद अहम है। पिछले कुछ दिनों से बारिश न होने के कारण उत्तराखंड के जंगलों में, विशेषकर चमोली के नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क में वनाग्नि (Forest Fire) की घटनाएं बढ़ गई थीं। 21 जनवरी तक होने वाली यह बारिश और बर्फबारी वनाग्नि को बुझाने और मिट्टी की नमी बनाए रखने में मददगार साबित होगी।
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पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए सावधानी
मौसम विभाग ने पहाड़ी क्षेत्रों में पाला (Ground Frost) पड़ने की चेतावनी भी दी है, जिससे सड़कों पर फिसलन बढ़ सकती है। ऊँचाई वाले क्षेत्रों की यात्रा करने वाले पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की ताज़ा जानकारी लेकर ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं और भारी बर्फबारी की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर रुकें।

हल्द्वानी और आसपास के तराई क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का सितम जारी है। हालिया मौसम रिपोर्ट के अनुसार, हल्द्वानी के तापमान में 3.9 डिग्री सेल्सियस की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे ठिठुरन काफी बढ़ गई है। तापमान में आई इस अचानक कमी के कारण दिन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से काफी नीचे चला गया है, जिससे लोग दिन भर अलाव का सहारा लेने को मजबूर हैं।
कोहरे और पाले का असर
तापमान गिरने के साथ ही हल्द्वानी और लालकुआं जैसे क्षेत्रों में ‘शीत दिवस’ (Cold Day) जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने हल्द्वानी सहित नैनीताल जिले के मैदानी इलाकों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। सुबह और शाम के समय घना कोहरा छाने से दृश्यता (visibility) काफी कम हो गई है, जिससे बरेली रोड और नैनीताल रोड पर यातायात की रफ्तार धीमी पड़ गई है।

आगे का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले 21 जनवरी तक उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश की संभावना है। यदि हल्द्वानी में हल्की बारिश होती है, तो तापमान में और अधिक गिरावट आ सकती है और गलन बढ़ सकती है।








