Silver Price Today News In Hindi: 19 जनवरी, 2026 भारतीय कमोडिटी बाजार के इतिहास में 19 जनवरी 2026 की तारीख स्वर्ण अक्षरों (या कहें रजत अक्षरों) में दर्ज हो गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों ने सोमवार को एक अविश्वसनीय छलांग लगाते हुए ₹3,01,315 प्रति किलोग्राम का नया सर्वकालिक उच्च स्तर (All-Time High) छू लिया। पिछले केवल 30 दिनों के भीतर चांदी में लगभग ₹1,00,000 की तेजी आई है, जो बाजार विशेषज्ञों के लिए भी शोध का विषय बन गई है।

बाजार की वर्तमान स्थिति
सोमवार को बाजार खुलते ही चांदी में जबरदस्त लिवाली देखी गई। चांदी का मार्च वायदा एक ही दिन में ₹13,000 से अधिक की बढ़त के साथ ₹3.01 लाख के पार निकल गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की चमक कम नहीं है; कॉमेक्स (COMEX) पर चांदी $94 प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर पर कारोबार कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी ने इस दौड़ में सोने को भी पीछे छोड़ दिया है, हालांकि सोने ने भी ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम का नया रिकॉर्ड बनाया है।
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कीमतों में रॉकेट जैसी तेजी के मुख्य कारण
1. वैश्विक टैरिफ युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड प्रस्ताव का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर 10% से 25% तक टैरिफ लगाने की घोषणा ने दुनिया भर के बाजारों में डर पैदा कर दिया है। जब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता आती है, निवेशक ‘सेफ हेवन’ (Safe Haven) के रूप में चांदी और सोने की ओर रुख करते हैं।
2. चीन का ‘सिल्वर संकट’: चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पैनल निर्माता है, वहां चांदी की मांग आपूर्ति के मुकाबले कहीं अधिक है। चीन में चांदी फिलहाल अंतरराष्ट्रीय कीमतों से ऊपर (प्रीमियम पर) बिक रही है। इसके अतिरिक्त, चीन द्वारा चांदी के निर्यात पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है।
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3. औद्योगिक और क्लीन एनर्जी डिमांड: चांदी का उपयोग अब केवल सिक्कों या गहनों तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), 5G तकनीक और सौर ऊर्जा (Solar Energy) के बढ़ते उपयोग ने चांदी की औद्योगिक मांग को चरम पर पहुंचा दिया है। एक अनुमान के अनुसार, वैश्विक स्तर पर चांदी का स्टॉक पिछले तीन दशकों के सबसे निचले स्तर पर है।
4. डॉलर की कमजोरी और फेड नीति: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना और डॉलर इंडेक्स में गिरावट ने भी कीमती धातुओं को मजबूती दी है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो अन्य मुद्राओं (जैसे रुपया) में चांदी खरीदना महंगा हो जाता है।

क्या कहते हैं बाजार एक्सपर्ट्स?
मशहूर ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चांदी की यह तेजी अभी रुकने वाली नहीं है। उन्होंने 2026 के अंत तक चांदी के ₹3,20,000 से ₹3,50,000 तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेज रैली के बाद थोड़े समय के लिए ‘प्रॉफिट बुकिंग’ (मुनाफावसूली) आ सकती है, जिससे कीमतों में ₹10,000-15,000 की मामूली गिरावट संभव है।

चांदी ‘सुपर कमोडिटी’ बन चुकी है
चांदी अब ‘गरीबों का सोना’ नहीं रही, बल्कि एक ‘सुपर कमोडिटी’ बन चुकी है। यदि आप निवेश की सोच रहे हैं, तो लंबी अवधि का नजरिया रखना फायदेमंद हो सकता है। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए विशेषज्ञों की सलाह है कि एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय किश्तों में निवेश (SIP) करना बेहतर रणनीति होगी।

गौर हो कि जनवरी 2026 में चांदी की कीमतों ने भारतीय कमोडिटी बाजार में एक नया इतिहास रच दिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी पहली बार ₹3,00,000 प्रति किलो के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई है। पिछले केवल 30 दिनों में चांदी की कीमतों में लगभग 1 लाख रुपये की अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है, जिसने निवेशकों और आम जनता को हैरान कर दिया है।










