हिमाचल प्रदेश के ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है, जिसके चलते प्रसिद्ध शिंकुला दर्रे (Shinku La Pass) पर ताज़ा और हल्की बर्फबारी हुई है। यह हिमपात रोहतांग और बारालाचा दर्रे जैसी अन्य ऊँची चोटियों पर भी दर्ज किया गया है, जिसने पूरे लाहौल-स्पीति घाटी में अचानक ठंड बढ़ा दी है।
हिमाचल में सड़क की स्थिति पर असर
शिंकुला दर्रा, जो लाहौल घाटी को लद्दाख की ज़ंस्कार घाटी से जोड़ता है, में हुई इस ताज़ा बर्फबारी ने सड़क की स्थिति को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
हालांकि अभी भी यह मार्ग पूरी तरह से बंद नहीं हुआ है, लेकिन सड़क पर फिसलने वाले पैच (Slippery Patches) और बर्फ जमने (Black Ice) के कारण आवाजाही बेहद खतरनाक हो गई है।
अधिकारियों ने यात्रियों और पर्यटकों को इस मार्ग पर अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है, और फिलहाल केवल फोर-बाय-फोर (4×4) वाहनों को ही दारचा से ज़ंस्कार की ओर जाने की अनुमति दी जा रही है।
हिमाचल के मौसम और तापमान में आई गिरावट
हिमाचल के उपरी इलाकों में हुई ताज़ा बर्फबारी के कारण लाहौल-स्पीति घाटी में तापमान में तेज़ गिरावट दर्ज की गई है। ताबो और केलांग जैसे आसपास के स्थानों पर रात का न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे भी नीचे बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों ने संकेत दिया है कि इस क्षेत्र में अभी भी और अधिक बर्फबारी की संभावना बनी हुई है, जिससे आने वाले दिनों में सर्दी का प्रकोप बढ़ेगा और सड़कों को स्थायी रूप से बंद किया जा सकता है।
स्थानीय प्रशासन और सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमें मौसम पर करीब से नजर रख रही हैं ताकि सड़क को जितना संभव हो सके खुला रखा जा सके, लेकिन यात्रियों से आग्रह किया गया है कि वे किसी भी अनावश्यक यात्रा से बचें।
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BRO और प्रशासन लगातार मॉनिटरिंग में जुटे
हिमाचल से सामने आई जानकारी के मुताबिक लाहौल-स्पीति घाटी में बढ़ते हिमपात के मद्देनज़र स्थानीय प्रशासन और BRO की टीमें लगातार सड़क की स्थिति पर नज़र रख रही हैं। उनका प्रयास है कि मौसम की परिस्थितियाँ अनुकूल रहते हुए मार्ग को अधिक से अधिक समय तक खुला रखा जा सके। वहीं BRO ने सड़क किनारे कई स्थानों पर मशीनरी और टीमों को तैनात किया है जो आवश्यकता पड़ने पर बर्फ हटाने और मार्ग को सुरक्षित बनाने में मदद कर सकें।

हालाँकि, अधिकारियों ने यात्रियों और पर्यटकों से आग्रह किया है कि वे अनावश्यक यात्रा न करें, खासकर रात के समय जब ब्लैक आइस का खतरा सबसे अधिक होता है। प्रशासन ने यह भी सुझाव दिया है कि जो भी यात्री इस मार्ग का उपयोग करने की योजना बना रहे हैं, वे अपनी गाड़ी में स्नो चेन, आवश्यक गर्म कपड़े, मेडिकल किट और पर्याप्त ईंधन साथ रखें।
स्थानीय निवासियों की बढ़ी चिंताएँ
हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति के स्थानीय निवासी इस शुरुआती हिमपात को सर्दियों के कठोर सीज़न की शुरुआत मान रहे हैं। उनका कहना है कि अगर अगले कुछ दिनों में बर्फबारी तेज़ हुई, तो उनकी दैनिक आपूर्ति, यातायात और स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित हो सकती हैं। हालाँकि प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई में बाधा नहीं आने दी जाएगी। वहीं लोगों की हर संभव मदद के लिए प्रशासन मौके पर मौजूद हैं।

हिमाचल में मौसम विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में और बर्फबारी की संभावना बनी हुई है। अगर हिमपात का यह क्रम जारी रहा, तो शिंकुला दर्रे सहित कई अन्य पर्वतीय पासों को अस्थायी रूप से बंद भी किया जा सकता है। प्रदेश के उपरी इलाकों में इसको लेकर पहले ही प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी है और लोगों कोे सचेत रहे के लिए कहा जा रहा है।
शिंकुला दर्रे पर ताज़ा हिमपात
शिंकुला दर्रा, जो लाहौल-स्पीति को ज़ांस्कर घाटी से जोड़ता है, वहां सुबह के समय हल्की बर्फबारी देखने को मिली। बर्फबारी के कारण दर्रे के आसपास का इलाका सफेद चादर में ढक गया है। हालांकि फिलहाल यातायात पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, लेकिन प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
लाहौल-स्पीति घाटी में बढ़ी ठंड
बर्फबारी के बाद लाहौल-स्पीति घाटी में ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने गर्म कपड़ों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। वहीं, सेब और अन्य फसलों पर मौसम के असर को लेकर किसान भी सतर्क हो गए हैं।

पर्यटकों के लिए अलर्ट
इस मौसम बदलाव के चलते प्रशासन ने पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। ऊँचे इलाकों की यात्रा करने से पहले मौसम की जानकारी लेने और आवश्यक सुरक्षा उपकरण साथ रखने की सलाह दी गई है। अचानक बर्फबारी के कारण फिसलन और दृश्यता कम होने का खतरा बना रहता है।











