बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के बीच, कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बेगूसराय के भर्रा गांव में स्थानीय मछुआरा समुदाय के साथ जुड़कर एक अनोखा उदाहरण पेश किया। अपनी चुनावी रैली समाप्त करने के बाद, वह अचानक विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी और कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार के साथ पास के एक गांव के तालाब पर पहुंचे।
तालाब पर, राहुल गांधी ने बिना किसी हिचकिचाहट के स्थानीय मछुआरों के साथ पानी में छलांग लगा दी और उनके पारंपरिक तरीके से जाल डालकर मछली पकड़ने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने छोटी नाव पर बैठकर मछुआरा समुदाय से उनके काम से जुड़ी चुनौतियों, संघर्षों और समस्याओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने मछुआरों को भरोसा दिलाया कि महागठबंधन उनकी आजीविका के अधिकार और सम्मान के लिए हर कदम पर उनके साथ खड़ा है।
कांग्रेस पार्टी ने इस अवसर पर मछुआरा समुदाय के लिए पांच हजार रुपये की वित्तीय सहायता (लीन सीजन के दौरान), मछली पालन बीमा योजना और बाजार की उपलब्धता सुनिश्चित करने जैसे कई वादे दोहराए।
तालाब में मछली पकड़ने के बाद, राहुल गांधी पास के एक ग्रामीण महादेव साह के घर गए, जहाँ उन्होंने खुले में लगे हैंडपंप से पानी लेकर स्नान किया और कपड़े बदले। महादेव साह के परिवार के सदस्यों ने इस अनुभव को अविस्मरणीय बताते हुए कहा कि राहुल गांधी ने उनसे बात की और उनका हालचाल पूछा।
हालांकि, इस घटना ने सियासी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। एनडीए के नेताओं, जिनमें बीजेपी और हम (सेक्युलर) के नेता शामिल हैं, ने इसे राहुल गांधी का ‘चुनावी स्टंट’ और ‘ड्रामा पॉलिटिक्स’ करार दिया है। वहीं, राजद के नेता तेज प्रताप यादव ने भी तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को राजनीति छोड़कर ‘रसोइया’ बनना चाहिए क्योंकि वह जलेबी छानने और मछली पकड़ने में माहिर हैं। दूसरी ओर, मुकेश सहनी ने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा कि वह ‘मल्लाह’ समुदाय का दर्द समझने गए थे, और उनकी यह कोशिश निषाद समुदाय के लिए गौरव की बात है।







