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Khamenei Death खामेनेई की मौत पर देहरादून में फूटा आक्रोश, अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सड़कों पर उतरा शिया समुदाय

On: March 2, 2026 4:22 AM
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Khamenei Death Dehradun Protest news In Hindi: ईरान के सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) अयातुल्ला अली खामेनेई की एक सैन्य हमले में हुई मौत की खबर फैलते ही उत्तराखंड की राजधानी देहरादून समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी आक्रोश और मातम छा गया है।
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Khamenei Death Dehradun Protest news In Hindi: ईरान के सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) अयातुल्ला अली खामेनेई की एक सैन्य हमले में हुई मौत की खबर फैलते ही उत्तराखंड की राजधानी देहरादून समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी आक्रोश और मातम छा गया है। रविवार दोपहर से ही देहरादून के शिया बहुल इलाकों में लोग सड़कों पर उतर आए और अमेरिका तथा इजरायल के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया।

अंबाड़ी में भारी विरोध प्रदर्शन

राजधानी के विकासनगर क्षेत्र के अंबाड़ी में प्रदर्शन का मुख्य केंद्र रहा। यहाँ बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग इमामबाड़े में एकत्र हुए, जहाँ उन्होंने पहले खामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की और उसके बाद एक विशाल विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों के हाथों में अयातुल्ला खामेनेई की तस्वीरें, ईरानी झंडे और भारतीय तिरंगा भी देखा गया।

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प्रदर्शन के दौरान “अमेरिका मुर्दाबाद” और “इजरायल मुर्दाबाद” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने इस घटना को “कायराना हमला” और “अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद” करार दिया है।

हमले को बताया ‘विश्वासघात’

स्थानीय शिया धर्मगुरुओं और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में खामेनेई की हत्या करना न केवल ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन है, बल्कि यह पूरी मानवता और शांति के खिलाफ अपराध है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि धोखे से किए गए इस हमले ने खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर दी है।

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मौके पर मौजूद एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “खामेनेई केवल ईरान के नेता नहीं थे, बल्कि वे मजलूमों की आवाज थे। उनकी शहादत बेकार नहीं जाएगी और उनके विचार हमेशा जिंदा रहेंगे।”

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए देहरादून प्रशासन और पुलिस विभाग हाई अलर्ट पर है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। शहर के साथ-साथ हरिद्वार और रुड़की जैसे क्षेत्रों में भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, जहाँ शिया समुदाय की अच्छी उपस्थिति है। हरिद्वार के मदरसों में भी खामेनेई की याद में शांति प्रार्थनाएं और शोक सभाएं आयोजित की गईं।


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देशभर में प्रदर्शन का असर

देहरादून के अलावा उत्तर प्रदेश के लखनऊ, बिजनौर, सहारनपुर और जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। लखनऊ में शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन दिनों के शोक की घोषणा की है। देहरादून के प्रदर्शनकारियों ने भी मांग की है कि भारत सरकार इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करे।

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वर्तमान स्थिति

ईरान में खामेनेई की मौत के बाद 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है। देहरादून में भी समुदाय के लोगों ने अगले कुछ दिनों तक काले कपड़े पहनकर और अपने घरों पर काले झंडे लगाकर विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए खुफिया विभाग को सतर्क कर दिया गया है।

कौन है अयातुल्ला अली खामेनेई

अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति और वहां के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) हैं। वह 1989 से इस पद पर आसीन हैं, जो उन्हें आधुनिक इतिहास में मध्य पूर्व में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले शासकों में से एक बनाता है।

प्रारंभिक जीवन और क्रांतिकारी भूमिका

खामेनेई का जन्म 1939 में मशहद, ईरान में हुआ था। उन्होंने कम उम्र से ही इस्लामी शिक्षा प्राप्त की और 1960-70 के दशक में ईरान के शाह (राजशाही) के खिलाफ इस्लामी क्रांति में सक्रिय भूमिका निभाई। वह ईरान की क्रांति के जनक, अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के बेहद करीबी विश्वासपात्र थे।

प्रमुख पद और उत्थान

  1. राष्ट्रपति (1981–1989): ईरान-इराक युद्ध के कठिन दौर में उन्होंने ईरान के तीसरे राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया।
  2. सर्वोच्च नेता (1989–वर्तमान): 1989 में खुमैनी की मृत्यु के बाद, उन्हें ‘सुप्रीम लीडर’ चुना गया।

शक्तियाँ और प्रभाव

ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सर्वोच्च नेता का पद राष्ट्रपति से कहीं ऊपर होता है। उनके पास निम्नलिखित क्षेत्रों में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार है:

  • सेना और विदेश नीति: वह सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ हैं।
  • न्यायपालिका और मीडिया: प्रमुख नियुक्तियाँ उन्हीं के द्वारा की जाती हैं।
  • परमाणु कार्यक्रम: ईरान के परमाणु नीति के दिशा-निर्देश वही तय करते हैं।

वैश्विक दृष्टिकोण

खामेनेई अपने अमेरिका-विरोधी और इजरायल-विरोधी रुख के लिए जाने जाते हैं। वह पश्चिमी सांस्कृतिक प्रभाव के कट्टर आलोचक रहे हैं और मध्य पूर्व में ‘प्रतिरोध के धुरी’ (Axis of Resistance) जैसे समूहों (जैसे हिजबुल्लाह और हमास) का वैचारिक और रणनीतिक समर्थन करते हैं।

खामेनेई न केवल एक राजनीतिक नेता हैं, बल्कि शिया मुसलमानों के लिए एक बड़े धार्मिक मार्गदर्शक (मरजा) भी माने जाते हैं। उनका शासन रूढ़िवादी इस्लामी मूल्यों और पश्चिमी प्रतिबंधों के खिलाफ ईरानी संप्रभुता को बनाए रखने पर केंद्रित रहा है।

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