Nepal Everest Scandal 2026: दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एवरेस्ट, जो अपनी दुर्गमता और साहस के लिए जानी जाती है, आज एक ऐसे कलंक का सामना कर रही है जिसने वैश्विक पर्वतारोहण जगत को हिलाकर रख दिया है। नेपाल के “एवरेस्ट रीजन” में एक विशाल बीमा धोखाधड़ी (Insurance Fraud) और फर्जी रेस्क्यू (Fake Rescue) स्कैंडल का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया है कि पर्यटकों की जान बचाने के नाम पर लगभग ₹185 करोड़ ($22 Million) का चूना लगाया गया है।
इस स्कैंडल की सबसे खौफनाक बात यह है कि अधिक मुनाफे के लिए गाइडों ने कथित तौर पर पर्वतारोहियों के खाने में ऐसी चीजें मिलाईं जिससे वे बीमार पड़ जाएं।
क्या है पूरा एवरेस्ट स्कैंडल? (What is Everest scandal?)
यह घोटाला मुख्य रूप से हेलीकॉप्टर रेस्क्यू और मेडिकल इंश्योरेंस के इर्द-गिर्द घूमता है। एवरेस्ट की चढ़ाई या बेस कैंप ट्रेकिंग के लिए आने वाले हर विदेशी पर्यटक को एक महंगा इंश्योरेंस कवर लेना पड़ता है। यदि ऊंचाई पर किसी की तबीयत खराब होती है, तो हेलीकॉप्टर रेस्क्यू का खर्च (जो $5,000 से $15,000 तक हो सकता है) बीमा कंपनी वहन करती है।
स्कैमर्स ने इसी व्यवस्था का फायदा उठाया। ट्रेकिंग गाइड, हेलीकॉप्टर कंपनियां, अस्पताल और कुछ भ्रष्ट अधिकारी मिलकर एक सिंडिकेट की तरह काम कर रहे थे। वे बिना जरूरत के हेलीकॉप्टर बुलाते और फर्जी मेडिकल बिल बनाकर बीमा कंपनियों से लाखों रुपये वसूलते थे।
खुलासा कैसे हुआ? (The Investigation)
इस महाघोटाले की जड़ें वैसे तो 2018 से दिख रही थीं, लेकिन इसका औपचारिक भंडाफोड़ सितंबर 2025 में एक नागरिक समूह ‘देशभक्त जेन जेड’ की शिकायत और नेपाल की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CIB) की गहन जांच के बाद हुआ।

जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
- डिजिटल सिग्नेचर की चोरी: अस्पतालों ने वरिष्ठ डॉक्टरों के फर्जी डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग करके डिस्चार्ज समरी और फर्जी बिल बनाए।
- हॉस्पिटल में पार्टी: CIB की जांच में पाया गया कि जिन “मरीजों” को गंभीर बताकर रेस्क्यू किया गया था, वे अस्पताल के कैफे में बीयर पीते और मजे करते पाए गए।
- फर्जी फ्लाइट्स: एक ही हेलीकॉप्टर में कई यात्रियों को लाया गया, लेकिन बीमा कंपनियों को हर यात्री का अलग-अलग और पूरा बिल भेजा गया।
खौफनाक मोड़: पर्यटकों को ‘जहर’ देने का आरोप
काठमांडू पोस्ट और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ गाइडों ने जानबूझकर पर्यटकों के खाने में ‘डायामोक्स’ (Diamox) की अत्यधिक मात्रा या बेकिंग सोडा जैसी चीजें मिलाईं।
इन पदार्थों के सेवन से यात्रियों को अत्यधिक दस्त, चक्कर आना और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण होने लगे, जो बिल्कुल ‘एल्टीट्यूड सिकनेस’ (ऊंचाई की बीमारी) जैसे दिखते हैं। इसके बाद डरे हुए पर्यटकों के लिए तुरंत ‘इमरजेंसी रेस्क्यू’ कॉल किया जाता था।
किन पर गिरी गाज?
नेपाल सरकार ने इस मामले में अब तक 32 व्यक्तियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए हैं। इनमें शामिल हैं:
- 3 प्रमुख हेलीकॉप्टर कंपनियों के मालिक और कर्मचारी।
- नामी अस्पतालों के प्रशासक और डॉक्टर।
- ट्रेकिंग एजेंसियों के संचालक। फिलहाल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य फरार बताए जा रहे हैं।
नेपाल के पर्यटन पर प्रभाव
इस स्कैंडल ने नेपाल की पर्यटन छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरा धक्का पहुंचाया है। वैश्विक बीमा कंपनियों ने अब नेपाल के लिए प्रीमियम बढ़ाने या रेस्क्यू कवर देने से मना करने की चेतावनी दी है। यदि ऐसा होता है, तो भविष्य में एवरेस्ट की यात्रा आम पर्वतारोहियों के लिए और भी महंगी और असुरक्षित हो जाएगी।
पर्वतारोहण के इतिहास का सबसे काला अध्याय
एवरेस्ट स्कैंडल 2026 केवल पैसों की धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि यह मानवीय क्रूरता का भी उदाहरण है। चंद रुपयों के लिए लोगों की जान जोखिम में डालना और दुनिया के सबसे पवित्र माने जाने वाले शिखरों पर ऐसा जाल बुनना, पर्वतारोहण के इतिहास का सबसे काला अध्याय है। नेपाल सरकार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती इस ‘सिंडिकेट’ को पूरी तरह खत्म कर दुनिया का भरोसा फिर से जीतना है।
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