हिमालयी सचल कुंभ के नाम से विख्यात नंदा देवी राजजात से जुड़ी ऐतिहासिक परंपरा
हिमालयी सचल कुंभ के नाम से देश-विदेश में विख्यात श्री नंदा देवी राजजात यात्रा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। आगामी 23 जनवरी, बसंत पंचमी के दिन राजकुवंरों के गांव कंसुवा में मनोती कार्यक्रम के साथ ही श्री नंदा देवी राजजात यात्रा का आधिकारिक कैलेंडर जारी किया जाएगा।
छिमटा गांव और छंतोली की परंपरा
इसी क्रम में चमोली जनपद के छिमटा गांव में राजरूड़ियों द्वारा परंपरागत छंतोली का निर्माण किया जा रहा है। इस छंतोली को 18 जनवरी को आदिबद्री में राजवंशी कुंवरों को भेंट किया जाएगा। छिमटा गांव के राजरूड़ियों का कहना है कि वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी मां नंदा की राजजात यात्रा से पूर्व छंतोली निर्माण का कार्य करते आ रहे हैं। यह छंतोली मां नंदा को भेंट स्वरूप अर्पित की जाती है, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं।

इस छंतोली निर्माण का छिमटा गांव से गहरा ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व जुड़ा हुआ है।
गांव के बुजुर्ग ग्रामीण बताते हैं कि मान्यता है कि प्राचीन काल में जब मां नंदा कैलास की ओर प्रस्थान कर रही थीं, उस समय गांव के रूड़िया छंतोली बेचने बाहर गए हुए थे। बारिश में मां नंदा को भीगते देखकर उन्होंने उन्हें छंतोली भेंट की थी। तभी से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है।
वहीं नंदा देवी राजजात यात्रा से जुड़ी इस पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के लिए नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता जताई जा रही है। छिमटा के ग्राम प्रधान नारायण सिंह का कहना है कि राज्य सरकार को यहां राजरूड़ियों के लिए प्रशिक्षण केंद्र खोलना चाहिए, जिससे यह परंपरा जीवित रहने के साथ-साथ रोजगार का साधन भी बन सके।
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