LPG Cylinder Price Update News In Hindi: आज यानी 1 अप्रैल 2026 से नए वित्त वर्ष की शुरुआत हो गई है, लेकिन इस नए साल की पहली सुबह देश के आम आदमी और व्यापारियों के लिए महंगाई का तगड़ा झटका लेकर आई है। तेल विपणन कंपनियों ने आज सुबह गैस सिलेंडर की नई कीमतों को लेकर ताजा अपडेट जारी किया है, जिसमें कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की दरों में भारी बढ़ोतरी की गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल का असर अब सीधे तौर पर भारतीय बाजारों में दिखने लगा है।
कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में इजाफा
19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में कंपनियों ने एक झटके में ₹195.50 से लेकर ₹218 तक का इजाफा किया है। यह लगातार दूसरा महीना है जब कीमतों में इस तरह की वृद्धि देखी गई है। इससे पहले मार्च महीने में भी कमर्शियल गैस के दाम बढ़ाए गए थे। हालांकि, इस बड़ी बढ़ोतरी के बीच घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि घर में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल
देश की राजधानी दिल्ली में आज से 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹1,884.50 से बढ़कर ₹2,078.50 हो गई है। कोलकाता में यह बढ़ोतरी और भी अधिक है, जहां उपभोक्ताओं को अब एक सिलेंडर के लिए ₹2,208 चुकाने होंगे। मुंबई में इसकी नई दर ₹2,031 तय की गई है, जबकि चेन्नई में यह ₹2,246.50 के भाव पर बिक रहा है। बिहार की राजधानी पटना में तो कीमतें आसमान छू रही हैं, वहां अब कमर्शियल गैस सिलेंडर के लिए ग्राहकों को ₹2,365 देने होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल गैस के दाम बढ़ने का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। भले ही घरों में इस्तेमाल होने वाली गैस महंगी नहीं हुई है, लेकिन होटल, रेस्टोरेंट, हलवाई और ढाबा संचालकों के लिए खाना बनाना अब काफी महंगा हो जाएगा। ऐसे में बाहर का खाना, नाश्ता और मिठाइयों की कीमतों में इजाफा होना लगभग तय माना जा रहा है। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव की वजह से कच्चा तेल (Crude Oil) अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी महंगा हो गया है, जिसकी वजह से तेल कंपनियों को यह कदम उठाना पड़ा है।
घरेलू गैस सिलेंडर के उपभोक्ताओं को मिली राहत
जहां एक तरफ कमर्शियल सिलेंडर ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) की कीमतों को स्थिर रखा गया है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर अभी भी ₹913 में मिल रहा है। गौरतलब है कि पिछले महीने 7 मार्च को इसमें ₹60 की बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन इस बार सरकार और तेल कंपनियों ने घरेलू बजट को बिगड़ने से बचाने का प्रयास किया है। लखनऊ में घरेलू सिलेंडर का भाव ₹950.50 और हैदराबाद में ₹965 के आसपास बना हुआ है।
| शहर | घरेलू सिलेंडर (14.2 Kg) | कमर्शियल सिलेंडर (19 Kg) |
| दिल्ली | ₹913.00 | ₹2,078.50 |
| कोलकाता | ₹939.00 | ₹2,208.00 |
| मुंबई | ₹912.50 | ₹2,031.00 |
| चेन्नई | ₹928.50 | ₹2,246.50 |
| पटना | ₹1,011.00 | ₹2,365.00 |
| देहरादून | ₹932.00 | ₹2,136 |
युद्ध और वैश्विक मंदी का प्रभाव
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक संकट का असर केवल गैस तक ही सीमित नहीं है। आज एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी हवाई ईंधन की कीमतों में भी भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे आने वाले समय में हवाई यात्रा भी महंगी हो सकती है। भारत अपनी जरूरत का 90% से अधिक एलपीजी और 40% से अधिक कच्चा तेल पश्चिम एशियाई देशों जैसे सऊदी अरब और कतर से आयात करता है। वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास जारी तनाव ने सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा गया है।
तेल विपणन कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) हर महीने की पहली तारीख को कीमतों की समीक्षा करती हैं। चूंकि पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50% की वृद्धि हुई है, इसलिए कंपनियों पर कीमतों को बढ़ाने का भारी दबाव था। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले साल मार्च से ही स्थिर बनी हुई हैं, जिससे फिलहाल सड़क परिवहन के किराए में बढ़ोतरी की संभावना कम है।
आगे की राह और चेतावनी
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले हफ्तों में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। सरकार फिलहाल सब्सिडी और अन्य माध्यमों से घरेलू उपभोक्ताओं को बचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कच्चे तेल के $100 प्रति बैरल के पार जाने की स्थिति में यह राहत लंबे समय तक टिकना मुश्किल हो सकता है।
व्यापारिक संगठनों ने भी सरकार से अपील की है कि कमर्शियल गैस पर लगने वाले करों में कुछ कटौती की जाए ताकि सूक्ष्म और लघु उद्योगों को इस महंगाई से बचाया जा सके। फिलहाल, जनता को इस नए वित्तीय वर्ष में अपनी रसोई और खर्चों के प्रबंधन को लेकर अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।












