लोकसभा ने गुरुवार (18 दिसंबर, 2025) को विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) विधेयक पारित कर दिया, जो 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का स्थान लेगा। विपक्षी सांसदों ने सदन के वेल में घुसकर विधेयक की प्रतियां फाड़ दीं और नारे लगाए, जिसके चलते विधेयक पारित नहीं हो सका।
संसद के शीतकालीन सत्र का 14वां दिन

राज्यसभा में शाम 6.50 बजे के कुछ देर बाद विधेयक पर बहस शुरू हुई। विपक्ष ने सरकार के “जल्दबाजी वाले रवैये” की आलोचना करते हुए कहा कि उच्च सदन के सदस्यों को अपने संशोधन दाखिल करने के लिए केवल 45 मिनट का समय मिला।
विधेयक के लिए आठ घंटे का समय आवंटित रहे
विधेयक के लिए आठ घंटे का समय आवंटित किया गया है और शुक्रवार (19 दिसंबर, 2025) की सुबह तक बहस जारी रहने की उम्मीद है। लोकसभा में गुरुवार को बहस रात 1:30 बजे तक चली थी।
निचले सदन में चल रही बहस पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एमजीएनआरईजीए में कई खामियां हैं और भ्रष्टाचार चरम पर है। उन्होंने राज्य सरकारों पर धन के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “उम्मीद के मुताबिक धनराशि आवंटित नहीं की गई। अधिनियम के अनुसार, 60% धनराशि श्रम पर और 40% सामग्री पर खर्च की जानी थी। लेकिन केवल 26% सामग्री पर खर्च की गई और धनराशि का गबन कर लिया गया।”

चौहान का कहना है कि गांधी के आदर्शों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया।
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श्री चौहान ने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए महात्मा गांधी के आदर्शों को “नष्ट” करने का आरोप लगाया। उन्होंने पिछली संयुक्त प्रगति गठबंधन सरकार द्वारा अधिनियम के कार्यान्वयन की तुलना मोदी सरकार के रिकॉर्ड से करते हुए दावा किया, “अब अधिक धन खर्च किया गया है और बेहतर बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है।”

उन्होंने कहा कि विचार-विमर्श के बाद नया विधेयक इसलिए पेश किया गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि 10-11 लाख करोड़ रुपये केवल वेतन पर ही नहीं बल्कि स्थायी संपत्तियों के निर्माण पर खर्च किए जाएं।
उन्होंने कहा, “हमने रोजगार बढ़ाने के लिए प्रावधान किए हैं। वहीं दूसरी ओर, इस विशाल राशि का उपयोग पूर्ण विकसित गांवों के निर्माण में किया जाएगा, जो मोदी सरकार का लक्ष्य रहा है।”
VB-G RAM G पहल जल सुरक्षा, झीलों, सूक्ष्म सिंचाई नहरों, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संपत्तियों और चरम मौसम की घटनाओं के प्रभाव को कम करने पर केंद्रित होगी। इन सभी संपत्तियों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक के अंतर्गत समेकित किया जाएगा।
शुरुआत में ही कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने अध्यक्ष ओम बिरला से विधेयक को संसदीय समिति के पास भेजने का आग्रह किया। श्री बिरला ने यह कहते हुए इस अनुरोध को खारिज कर दिया कि लंबी बहस के दौरान 98 सदस्यों ने अपनी बात रखी थी।
जब विपक्षी सदस्यों ने विधेयक की प्रतियां फाड़नी शुरू कीं, तो श्री चौहान ने पलटवार करते हुए कहा, “विपक्ष बापू के आदर्शों की हत्या कर रहा है। सिर्फ अपनी बात कहना और दूसरों के विचारों को न सुनना भी हिंसा है।”
उन्होंने आगे कहा, “कांग्रेस ने बापू के आदर्शों का नाश किया, एनडीए ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने पक्के मकानों के जरिए बापू के जीवन को संजोया।” उन्होंने मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और आयुष्मान भारत को भी गिनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनावी लाभ के लिए 2009 में अधिनियम में “महात्मा गांधी” का नाम जोड़ा था।
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उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र प्रायोजित 25 योजनाओं का नाम राजीव गांधी के नाम पर और 27 का नाम इंदिरा गांधी के नाम पर रखा गया है। उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को भी निशाना बनाया।
हंगामे के बीच ध्वनि मत से विधेयक पारित हो गया और निचले सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।












