अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में अस्थिरता के बीच, सोने की कीमतें हाल ही में अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से कुछ गिरावट के बावजूद ₹1.21 लाख प्रति 10 ग्राम के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास कारोबार कर रही हैं। बीते कुछ हफ्तों में सोने के भाव में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है, खासकर तब जब यह अपने सर्वकालिक उच्च स्तर ₹1.30 लाख (लगभग) प्रति 10 ग्राम से नीचे फिसला है।
बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में यह स्थिरता और गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली (Profit Booking) और डॉलर की मजबूती के कारण आई है। निवेशकों ने रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद मुनाफा कमाना शुरू कर दिया है, जिससे कीमतों पर दबाव पड़ा है। इसके अलावा, अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव में कमी आने के संकेतों ने भी डॉलर को मजबूत किया है, जिसके कारण सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने का आकर्षण थोड़ा कम हुआ है।
हालांकि, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की धीमी गति की आशंका के कारण सोना अभी भी ₹1.21 लाख के मजबूत समर्थन स्तर पर बना हुआ है। बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट एक तकनीकी सुधार (Technical Correction) हो सकती है।
आने वाले दिनों में, भारतीय बाजार में शादी के मौसम के कारण सोने की भौतिक मांग (Physical Demand) में वृद्धि होने की उम्मीद है। यदि मांग बढ़ती है और वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बनी रहती है, तो सोने की कीमतें एक बार फिर ₹1.25 लाख के प्रतिरोध स्तर की ओर बढ़ सकती हैं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे वैश्विक संकेतों पर नज़र रखें और लंबी अवधि के लिए निवेश पर विचार करें।










