काशीपुर किसान आत्महत्या सीबीआई जांच की मांग को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
उधमसिंहनगर के काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह की मौत मामले में आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय से जुलूस निकालते हुए पुलिस मुख्यालय का घेराव कर किसान की मौत की सीबीआई जांच कराये जाने की मांग की ।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत सैकडों की संख्या में कांग्रेसियों ने पुलिस मुख्यालय कूच किया और पुलिस मुख्यालय का घेराव करते हुए किसान आत्महत्या मामले की जांच सीबीआई से कराये जाने को लेकर पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपा।
कंग्रेस पार्टी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि बीती 10 जनवरी को उधमसिंहनगर के काशीपुर क्षेत्र में ग्राम पैगा निवासी सुखवंत सिंह नामक किसान की आत्महत्या की घटना न केवल अत्यंत गंभीर है, बल्कि क्षेत्र की आम जनता व किसानों में भय, असुरक्षा, असंतोष एवं आक्रोश का वातावरण भी पैदा कर रही है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि काशीपुर किसान आत्महत्या सीबीआई जांच के बिना पीड़ित परिवार को न्याय मिलना कठिन है।

काशीपुर किसान आत्महत्या मामले में लगाए गए आरोपों ने कानून-व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
किसान की आत्महत्या के पीछे के कारण इंसानियत को झकझोर देने वाले हैं। मृतक किसान के परिजनों और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार किसान द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर के खिलाफ धोखाधड़ी करने वाले भू-माफियाओं को पुलिस द्वारा संरक्षण दिया जा रहा था और तहरीर देने वाले किसान को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। इसी प्रकार राज्य पुलिस पर खनन माफियाओं को भी लगातार संरक्षण देने के गंभीर आरोप लगते आ रहे है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राज्य में बीते लम्बे समय से कानून व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है तथा काशीपुर में किसान की आत्महत्या का मामला इसका जीता जागता उदाहरण है। इस प्रकार के कृत्यों में पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता जनता को सोचने के लिए मजबूर करती है कि पुलिस कर्मी अपने परिवार के सुखचैन के लिए किसी के जीवन को खरीद रहे हैं तो यह राज्यवासियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
किसान द्वारा धोखाधडी की शिकायत पर संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की बजाय उल्टे आरोपियों से पैसे लेकर शिकायत कर्ता किसान को ही प्रताडित करना और धमकाना शुरू किया जिसके लिए उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा। किसान इस देश का अन्नदाता है और काशीपुर के पैगा ग्रामवासी किसान की आत्महत्या का मामला अत्यधिक संवेदनशील है। यदि इस मामले की गहन जांच नहीं होती, तो इससे आम जनता का कानून-व्यवस्था एवं प्रशासन पर विश्वास कमजोर होता है।

किसान आत्महत्या मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की भूमिका पर उठे सवाल- कांग्रेस
कांग्रेस ने यह भी कहा कि मृतक किसान द्वारा मृत्यु पूर्व घोषणा में जनपद उधमसिंहनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का नाम स्पष्ट रूप से इस आशय से लिया गया है कि इनकी भूमिका भू-माफियाओं के समर्थन में थी, जिस कारण मृतक ने अपनी जान दी। यह भी सोचनीय विषय है कि पुलिस विभाग द्वारा अभी तक उक्त आरोपी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पद से नहीं हटाया गया है तथा जिस वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पर किसान को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगा है, उसी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर पुलिस के दायित्वों की इतिश्री कर ली गई है। इससे आशंका है कि उत्तराखंड पुलिस इस गंभीर मामले में संवेदनशीलता, निष्पक्षता एवं तत्परता से कार्रवाई करेगी तथा पीड़ित किसान को न्याय मिलेगा ।
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