Kafal Festival 2026 : रुद्रप्रयाग, हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम हाल ही में रुद्रप्रयाग जिले के सारी गांव और प्रसिद्ध देवरियाताल में देखने को मिल। अवसर था तीन दिवसीय ‘काफल फेस्टिवल 2026’ का, जिसने न केवल स्थानीय ग्रामीणों में उत्साह भरा, बल्कि देश-विदेश से आए हजारों पर्यटकों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया। 20 मार्च से 22 मार्च तक चले इस महोत्सव ने सिद्ध कर दिया कि यदि परंपराओं को आधुनिकता के साथ सही ढंग से परोसा जाए, तो वे पर्यटन का सबसे बड़ा आधार बन सकती हैं।
संस्कृति और प्रकृति का अनूठा उत्सव
काफल फेस्टिवल का आयोजन मुख्य रूप से पांडवाज ग्रुप (Pandavaas) और ग्राम पंचायत सारी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के राजकीय फल ‘काफल’ के बहाने यहाँ की विलुप्त होती लोक कलाओं, पहाड़ी व्यंजनों और प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण करना था। (Kafal Festival 2026 revives folk culture, thousands of tourists arrive news)
महोत्सव के दौरान सारी गांव की गलियां और देवरियाताल के मखमली बुग्याल ‘जय बद्री-केदार’ के उद्घोष और मांगल गीतों से गुंजायमान रहे। इस वर्ष उत्सव में विशेष रूप से MTB (माउंटेन बाइकिंग) चैलेंज, काफल हाफ मैराथन, और फोटोग्राफी वर्कशॉप जैसे आयोजनों ने युवाओं को अपनी ओर आकर्षित किया।

देवरियाताल: जहां हिमालय ने भी डाली झांकी
समुद्र तल से लगभग 2,438 मीटर की ऊंचाई पर स्थित देवरियाताल झील इस उत्सव का केंद्र बिंदु रही। झील के शांत पानी में बर्फ से ढकी चौखंबा चोटियों का प्रतिबिंब पर्यटकों के लिए किसी जादुई अनुभव से कम नहीं था। फेस्टिवल के दौरान पर्यटकों ने न केवल प्रकृति का आनंद लिया, बल्कि यहाँ आयोजित एस्ट्रो-ऑब्जर्वेशन (खगोल दर्शन) सत्रों के जरिए हिमालय के साफ आसमान में तारों की दुनिया को करीब से देखा।
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प्रमुख आकर्षण और कार्यक्रम:
- सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: सुप्रसिद्ध म्यूजिक बैंड ‘पांडवाज’ ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा लोक गायक संकल्प खेतवाल और अन्य स्थानीय कलाकारों ने गढ़वाली और कुमाऊंनी गीतों की झड़ी लगा दी।
- पहाड़ी जायका: महिला मंगल दलों द्वारा लगाए गए स्टालों पर पर्यटकों ने पहाड़ी नमक (पीस्या लूण) के साथ ताजे काफल, झंगोरे की खीर, स्वाला और फाणू जैसे पारंपरिक व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
- साहित्यिक रंग: ‘कलश’ संस्था के कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से पहाड़ की पीड़ा, पलायन और बदलती संस्कृति पर मार्मिक व्यंग्य किए, जिन्हें खूब सराहा गया। (Kafal Festival 2026 revives folk culture, thousands of tourists arrive news)
आर्थिक और पर्यटन विकास की नई उम्मीद
केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल ने समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से केदारघाटी की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा:
“पांडवाज ग्रुप और सारी गांव के ग्रामीणों की यह पहल सराहनीय है। काफल फेस्टिवल जैसे आयोजन न केवल पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के द्वार भी खोलते हैं। आज देवरियाताल और सारी गांव पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट गंतव्य के रूप में उभर चुके हैं।”
विशेषज्ञों ने इस मंच का उपयोग पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए भी किया। प्रो. एसपी सती और अन्य पर्यावरणविदों ने ग्लोबल वार्मिंग और प्लास्टिक उन्मूलन पर ग्रामीणों व पर्यटकों के साथ चर्चा की, ताकि इस संवेदनशील इको-सिस्टम को बचाया जा सके। (Kafal Festival 2026 revives folk culture, thousands of tourists arrive news)
पर्यटकों का फीडबैक: “स्वर्ग जैसा अनुभव”
दिल्ली से आए एक पर्यटक समूह ने बताया, “हमने पहले कभी काफल का नाम नहीं सुना था, लेकिन यहाँ आकर पता चला कि यह फल कितना खास है। यहाँ की मेहमाननवाजी और पांडवाज का संगीत रूह को सुकून देने वाला है। देवरियाताल की शांति और सारी गांव की सादगी हमें दोबारा यहाँ आने के लिए प्रेरित करेगी।”
काफल फेस्टिवल 2026 ने यह साबित कर दिया है कि उत्तराखंड के दूरस्थ गांवों में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यदि लोक कला, स्थानीय उत्पाद और साहसिक खेलों को एक सूत्र में पिरोया जाए, तो ‘होमस्टे’ संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जबरदस्त मजबूती मिल सकती है। महोत्सव के भव्य समापन के साथ ही अब अगले वर्ष के लिए उम्मीदें और बढ़ गई हैं।
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