Iran Khamenei Death News In Hindi: तेहरान में भीषण हमला और बड़ी क्षति 28 फरवरी 2026 की तारीख ईरान के इतिहास में एक बड़े मोड़ के रूप में दर्ज हो गई है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की एक भीषण सैन्य हमले में मृत्यु हो गई है। इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से किए गए ‘डिकैपिटेशन स्ट्राइक’ (शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने वाला हमला) के बाद ईरान के सरकारी मीडिया ने रविवार, 1 मार्च 2026 की सुबह इस खबर की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। इस हमले ने न केवल ईरान बल्कि पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक राजनीति में हड़कंप मचा दिया है।

कैसे हुआ हमला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (28 फरवरी) तड़के इजरायली वायुसेना और अमेरिकी मिसाइलों ने तेहरान स्थित खामेनेई के सुरक्षित परिसर (Compound) को निशाना बनाया।
- सटीक निशाना: सैटेलाइट इमेजरी और खुफिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि खामेनेई के आवास और कार्यालय पर कई मिसाइलें गिरीं, जिससे पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई।
- अन्य हताहत: सरकारी मीडिया ‘IRNA’ के अनुसार, इस हमले में केवल खामेनेई ही नहीं, बल्कि उनकी बेटी, पोते, बहू और दामाद की भी जान चली गई है। साथ ही रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कुछ शीर्ष कमांडर भी इस हमले की चपेट में आए हैं।

पुष्टि और विरोधाभास: दावों का दौर
शुरुआत में ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन खबरों को खारिज करते हुए खामेनेई को “सही-सलामत” बताया था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि “इतिहास के सबसे क्रूर लोगों में से एक, खामेनेई मारा गया है।” इसके कुछ घंटों बाद, ईरान के सरकारी टेलीविजन (IRIB) ने काली पट्टी के साथ प्रसारण करते हुए उनकी ‘शहादत’ की घोषणा की। ईरान सरकार ने देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और सात दिनों के सार्वजनिक अवकाश का ऐलान किया है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई और राष्ट्रपति का बयान
खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इसे एक “महा-अपराध” करार दिया और कसम खाई कि इसके जिम्मेदार देशों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
- मिसाइल हमला: IRGC ने इस हत्या के जवाब में इजरायल और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दर्जनों ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागनी शुरू कर दी हैं।
- बदले की आग: ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि वे अब तक का सबसे बड़ा जवाबी हमला शुरू करने जा रहे हैं।
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37 साल के शासन का अंत और उत्तराधिकार का संकट
86 वर्षीय अली खामेनेई ने 1989 में आयतुल्लाह खुमैनी के बाद सत्ता संभाली थी। लगभग 37 वर्षों तक वे ईरान की धार्मिक, राजनीतिक और सैन्य शक्ति के केंद्र रहे। उनकी मृत्यु के बाद अब ईरान के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं:
- नेतृत्व परिषद: फिलहाल एक अस्थायी नेतृत्व परिषद देश का कामकाज संभालेगी।
- नया नेता: 88 सदस्यीय ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ को जल्द से जल्द नए सुप्रीम लीडर का चुनाव करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार IRGC (रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) का हस्तक्षेप और अधिक बढ़ सकता है।
खतरनाक मोड़ ले रहा ये संघर्ष
अली खामेनेई की मृत्यु मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ले आई है। जहाँ एक ओर इजरायल और अमेरिका इसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और ‘आतंकवाद के नेटवर्क’ पर बड़ी चोट मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) का खतरा और अधिक गहरा गया है। पूरी दुनिया की नजरें अब ईरान के अगले कदम और वहां होने वाले सत्ता परिवर्तन पर टिकी हैं।











