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Holi Festival Dates 2026: कब है होली का त्योहार, रंगों का उत्सव, प्रेम का प्रतीक और जानें क्या है पौराणिक विरासत

On: February 22, 2026 2:50 PM
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Holi Festival Dates 2026 News In Hindi: भारत त्योहारों का देश है, और यहाँ हर पर्व का अपना एक विशिष्ट महत्व है। इन्हीं में से एक सबसे प्रमुख और जीवंत त्योहार है
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Holi Festival Dates 2026 News In Hindi: भारत त्योहारों का देश है, और यहाँ हर पर्व का अपना एक विशिष्ट महत्व है। इन्हीं में से एक सबसे प्रमुख और जीवंत त्योहार है— होली। इसे ‘रंगों का त्योहार’ भी कहा जाता है। यह पर्व न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर के कई देशों में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। होली का त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है और यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

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2026 में कब है होली?

वर्ष 2026 में होली का पर्व 4 मार्च (बुधवार) को मनाया जाएगा। इससे एक दिन पूर्व, यानी 3 मार्च की रात को होलिका दहन किया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को यह उत्सव संपन्न होता है।

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होली की शुरुआत कैसे हुई? (पौराणिक कथाएं)

होली के पीछे कई प्राचीन कथाएं और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। इनमें सबसे प्रमुख कथा भक्त प्रहलाद और हिरण्यकश्यप की है।

1. भक्त प्रहलाद और होलिका की कथा

प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक अत्यंत अहंकारी असुर राजा था। वह चाहता था कि पूरी सृष्टि उसे ही भगवान माने। लेकिन उसका अपना पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को विष्णु भक्ति से रोकने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन वह असफल रहा।

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अंत में, हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया, जिसे अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रहलाद को लेकर धधकती हुई चिता पर बैठ गई। लेकिन भगवान की कृपा से भक्त प्रहलाद बच गए और होलिका उस आग में जलकर भस्म हो गई। इसी घटना की याद में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक स्वरूप होलिका दहन किया जाता है। अगले दिन रंगों से उत्सव मनाया जाता है, जिसे ‘धुलेंडी’ कहते हैं।

2. राधा-कृष्ण का प्रेम

मथुरा और वृंदावन की होली पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण अपने सांवले रंग को लेकर चिंतित थे और राधा रानी अत्यंत गोरी थीं। माता यशोदा के सुझाव पर, कृष्ण ने राधा और अन्य गोपियों के मुख पर गुलाल लगाया, जिससे उनके बीच प्रेम का नया रंग घुल गया। यही कारण है कि आज भी ब्रज की होली में रंगों का एक अलग ही महत्व है।

मथुरा-वृंदावन की होली,होली उत्सव - Festivals Of India

होली मनाने का तरीका और परंपराएं

होली का त्योहार दो दिनों का होता है। पहले दिन ‘होलिका दहन’ और दूसरे दिन ‘धुलेंडी’ (रंगों वाली होली)।

  • होलिका दहन: शाम के समय लकड़ी, घास और गोबर के उपलों का ढेर लगाकर पूजा की जाती है। लोग आग के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और अपनी बुराइयों को इस अग्नि में त्यागने का संकल्प लेते हैं।
  • धुलेंडी (रंग वाली होली): सुबह होते ही लोग टोलियां बनाकर गलियों में निकल पड़ते हैं। अबीर, गुलाल और पानी के रंगों से एक-दूसरे को सराबोर किया जाता है। ‘बुरा न मानो होली है’ के नारों के साथ ऊंच-नीच और जात-पात का भेदभाव मिट जाता है।
  • पकवानों का आनंद: होली बिना गुझिया के अधूरी है। इसके अलावा ठंडाई, मालपुआ, दही बड़े और कांजी वड़ा जैसे पारंपरिक व्यंजन इस उत्सव की रौनक बढ़ाते हैं।


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सामाजिक और मनोवैज्ञानिक महत्व

होली केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि यह मानवीय एकता का संदेश देती है।

  1. आपसी सामंजस्य: यह वह दिन है जब लोग अपनी पुरानी कड़वाहट और दुश्मनी को भूलकर गले मिलते हैं।
  2. समानता: रंगों की परत के नीचे हर इंसान एक जैसा दिखता है। यह त्योहार सामाजिक समानता को बढ़ावा देता है।
  3. खुशी और उमंग: वसंत का समय होता है जब खेतों में फसलें लहलहाती हैं। किसान अपनी मेहनत का फल देखकर खुशी से झूम उठते हैं।

होली खेलते समय सावधानियां

आजकल बाजार में मिलने वाले रासायनिक रंगों से त्वचा और आंखों को नुकसान पहुँच सकता है। इसलिए:

  • प्राकृतिक और हर्बल गुलाल का प्रयोग करें।
  • होली खेलने से पहले त्वचा और बालों पर तेल या मॉइस्चराइजर लगाएं।
  • पानी की बर्बादी कम से कम करें।
  • पशु-पक्षियों पर रंग न डालें।

होली भारतीय संस्कृति की वह धरोहर है जो हमें सिखाती है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, जीत हमेशा सत्य और भक्ति की ही होती है। यह प्रेम, भाईचारे और उल्लास का त्योहार है। आइए, इस होली हम भी अपने मन के द्वेष को मिटाकर प्रेम के रंगों में रंग जाएं।

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