हिमाचल प्रदेश में इस बार नवंबर का महीना पिछले 124 वर्षों में नौवें सबसे सूखे नवंबर के रूप में दर्ज किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) शिमला के आंकड़ों के अनुसार, पूरे नवंबर 2025 में राज्य में सामान्य से 95 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इस महीने में औसतन 19.7 मिलीमीटर (मिमी) बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तविक वर्षा मात्र 1.0 मिमी ही रिकॉर्ड की गई।
यह भारी कमी राज्य भर में महसूस की गई, जिससे सूखे जैसी स्थिति बन गई है। सिरमौर और मंडी जैसे कई जिलों में तो 100 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई, यानी वहाँ बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई। शिमला, चंबा, हमीरपुर और कांगड़ा जैसे अन्य जिलों में भी 99 प्रतिशत तक की भारी कमी रही।
सूखे का कृषि और मौसम पर असर:
रबी की बुवाई प्रभावित: नमी की कमी के कारण रबी की मुख्य फसल, गेहूं की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। कृषि विभाग के अनुसार, कई किसान खेतों में पर्याप्त नमी न होने के कारण बुवाई नहीं कर पाए हैं। कुछ किसान गेहूं को छोड़कर जौ और सरसों जैसी कम पानी वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
बागवानी पर संकट: सेब और अन्य फल उत्पादकों के लिए भी यह सूखा चिंता का विषय है, क्योंकि उन्हें नमी और मिट्टी की तैयारी के लिए सर्दियों की शुरुआत में होने वाली बारिश की जरूरत होती है।
तापमान में गिरावट: शुष्क मौसम के कारण दिन के तापमान में दो से तीन डिग्री की कमी आई है, जिससे कई इलाकों में रातें अत्यधिक ठंडी और बर्फीली ठंड जैसी महसूस हो रही हैं।
कारण: मौसम विभाग के अनुसार, नवंबर में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) का असर बहुत कमजोर रहा या ये सिस्टम राज्य से दूर रहे, जिसके कारण पहाड़ों पर न तो पर्याप्त बारिश हुई और न ही बर्फबारी हुई।
मौसम विभाग ने 4 और 5 दिसंबर को राज्य के मध्य और ऊँचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश या बर्फबारी होने का पूर्वानुमान जताया है, जिससे उम्मीद है कि यह लंबा सूखा खत्म हो सकता है।












