गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अगुवाई वाली सरकार के मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल और विस्तार किया गया है। यह फेरबदल आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी की एक महत्वपूर्ण सियासी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। गुरुवार को एक बड़े घटनाक्रम में मुख्यमंत्री को छोड़कर सभी मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद शुक्रवार को गांधीनगर के महात्मा मंदिर में नए मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ।
इस विस्तार में कुल 25 विधायकों को मंत्री बनाया गया, जिससे मुख्यमंत्री समेत मंत्रिपरिषद के सदस्यों की संख्या 26 हो गई है। सबसे बड़ी खबर यह रही कि पूर्व गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी को पदोन्नत कर राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। वह सबसे कम उम्र के उपमुख्यमंत्री बनने वाले नेताओं में से एक हैं।
बीजेपी ने इस बार क्षेत्रीय और जातीय दोनों समीकरणों को साधने की पूरी कोशिश की है। नए मंत्रिमंडल में 19 नए चेहरों को जगह दी गई है। जबकि ऋषिकेश पटेल, कनुभाई देसाई और कुंवरजी बावलिया जैसे छह पुराने मंत्रियों के इस्तीफे नामंजूर कर उन्हें बरकरार रखा गया। हर्ष संघवी और प्रफुल पानसेरिया को राज्य मंत्री से पदोन्नत कर क्रमशः उपमुख्यमंत्री और स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री बनाया गया है।
जातिगत प्रतिनिधित्व की बात करें तो, नए मंत्रिमंडल में पाटीदार, ओबीसी, एससी और एसटी सभी समुदायों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसमें 7 पाटीदार, 8 ओबीसी, 3 एससी और 4 एसटी समुदाय के मंत्री शामिल हैं।
महिलाओं के प्रतिनिधित्व को भी बढ़ाया गया है, अब तीन महिला विधायक मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं। इनमें क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी और जामनगर उत्तर से पहली बार की विधायक रिवाबा जडेजा ने राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली, जो एक सरप्राइज एंट्री मानी गई। उनके अलावा दर्शना वाघेला और मनीषा वकील (स्वतंत्र प्रभार) को भी मंत्री बनाया गया है।
क्षेत्रीय संतुलन बनाते हुए सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र से मंत्रियों की संख्या में इज़ाफ़ा किया गया है, जहाँ से 9 मंत्री शामिल किए गए हैं। इसके बाद मध्य गुजरात से 6, दक्षिण गुजरात से 5 और उत्तर गुजरात से 4 मंत्री हैं।
इस पुनर्गठन में कई बड़े और चर्चित चेहरों जैसे हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर को जगह नहीं मिल पाई है, लेकिन पूर्व कांग्रेस नेता अर्जुन मोढवाडिया और अनुभवी नेता जीतू वाघाणी जैसे प्रमुख चेहरे मंत्री बने हैं। यह फेरबदल स्पष्ट रूप से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा नियंत्रित है और इसका उद्देश्य एंटी-इन्कंबेंसी को कम करना और जमीनी स्तर पर पार्टी को और मजबूत करना है।








