गोपेश्वर गोपीनाथ मंदिर होली उत्तराखंड की अनूठी परंपराओं में से एक है।
शिव की नगरी गोपेश्वर में होली सिर्फ रंगों का त्यौहार ही नहीं बल्कि आस्था व उमंग का अद्भुत संगम है । ब्रिज में जहां कृष्ण के साथ होली खेली जाती है , वहीं गोपेश्वर में शिव को साक्षी मानकर उनके साथ होली खेली जाती है। आज होली के पर्व पर देश दुनिया से होली मनाने के लिए यहां बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचे ।
उत्तराखंड के चमोली जिले में गोपेश्वर का गोपीनाथ मंदिर अनूठी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। यहां की होली की विशेषता यह भी है कि इस पर्व पर यहां जाति और धर्म की दीवारें टूट जाती हैं। यहां के 64 गांवों के लोग शिव के सानिध्य में होली खेलकर आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं। श्रद्धालु शिव के गण बनकर उत्सव मनाते हैं। इस पौराणिक होली की परंपरा का हिस्सा बनने के लिए देश-दुनिया से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचे है। गोपीनाथ मंदिर भगवान शिव का मंदिर है। चतुर्थ केदार रुद्रनाथ की शीतकालीन गद्दी स्थल भी है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब श्री कृष्णा बृज में गोपियों के संग रासलीला रचा रहे थे तो शिव यहां देखने के लिए गोपी का वेश धारण कर वहां पहुंच गए । लेकिन श्री कृष्ण ने उन्हें पहचान लिया। तब श्री कृष्णा ने उन्हें गोपीनाथ के नाम से संबोधित किया । तब से इस स्थान को गोपीनाथ के नाम से जाना जाता है।
आज होली पर्व पर सुबह मंदिर में भगवान शिव को होलिका दहन का भस्म अर्पित किया गया । उसके बाद उन्हें होली खेलने के लिए आमंत्रित किया गया। इस बार अत्यधिक बढ़ती भीड़ को देखते हुए होली मंदिर परिसर में न होकर मंदिर के पृष्ठ भाग रामलीला मैदान में मनाई जा रही है। जिसमें स्थानीय लोगों के साथ ही बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक होली मनाने के लिए आए हैं। हालांकि मंदिर परिसर में होली न मनाई जाने पर पर्यटकों में मायूसी भी देखी गई । इस अवसर पर पुलिस द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
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