गंगा जलीय जीव संरक्षण केंद्र का लोकार्पण आज देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल द्वारा किया गया।
गंगा भवन में अनुसंधान प्रयोगशालाओं का निरीक्षण, कई संरक्षण परियोजनाओं का शुभारंभ
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने आज देहरादून स्थित, भारतीय वन्यजीव संस्थान में, गंगा जलीय जीव संरक्षण अनुश्रवण केंद्र व राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र का लोकार्पण किया। लोकार्पण के बाद उन्होंने गंगा भवन परिसर में स्थापित विभिन्न प्रयोगशालाओं का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने जलीय पारिस्थितिकी, इको-टॉक्सिकोलॉजी और स्पेशियल इकोलॉजी लैब की कार्यप्रणाली की जानकारी ली। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने गंगा डॉल्फिन संरक्षण से जुड़ी एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही, भारतीय स्किमर संरक्षण परियोजना का भी शुभारंभ किया। केंद्रीय मंत्री ने टर्टल कंजर्वेशन प्रोजेक्ट के सफल समापन की भी घोषणा की। कार्यक्रम में जलीय जीवों व मोटे अनाज पर आधारित कई पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने, देश के विभिन्न राज्यों से आए जल प्रहरियों, शोधार्थियों और एमएससी के छात्रों से संवाद किया। उत्तराखंड, बिहार, हिमाचल प्रदेश सहित, अन्य राज्यों से आए जल प्रहरियों ने गंगा की सफाई, कछुओं, डॉल्फिन और अन्य जलीय जीवों के संरक्षण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।

गंगा केवल नदी नहीं, देश की सांस्कृतिक जीवनरेखा है: केंद्रीय मंत्री
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में कहा कि गंगा जलीय जीव संरक्षण अनुश्रवण केंद्र व राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र भविष्य में गंगा बेसिन में जैव विविधता संरक्षण के लिए अहम केंद्र के रूप में, कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड से निकलने वाली गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और जैव विविधता की जीवनरेखा है। इसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ-साथ, सामुदायिक सहभागिता भी, बेहद जरूरी है।

नदियों की स्वच्छता और जीव संरक्षण पर केंद्र सरकार का फोकस
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कछुओं के संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों से आम जनता में जागरूकता बढ़ी है। डॉल्फिन की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जलीय जीवों के संरक्षण के लिए मंत्रालय शोध, निगरानी और नीति—तीनों स्तरों पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि “जल ही जीवन है” को लेकर जनमानस में तेजी से जागरूकता बढ़ रही है। आने वाले समय में नदियां और अधिक स्वच्छ होंगी और जलीय जीवों का संरक्षण सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि जल के बिना देश का विकास संभव नहीं है। पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भी निरंतर कार्य किया जा रहा है। जल प्रहरी सराहनीय कार्य कर रहे हैं और उनके उत्थान के लिए मंत्रालय योजनाओं पर विचार कर रहा है। नदियों को जोड़ने की योजना पर भी मंत्रालय सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

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