Dehradun Urban Cooperative Bank RBI Action News: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से बैंकिंग क्षेत्र की एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देहरादून स्थित अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की बिगड़ती वित्तीय स्थिति और कथित अनियमितताओं को देखते हुए उस पर 6 महीने के लिए कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। 10 फरवरी 2026 से प्रभावी हुए इन निर्देशों के बाद बैंक के हजारों खाताधारकों में अपनी जमा पूंजी को लेकर हड़कंप मच गया है।
RBI की कार्रवाई का मुख्य कारण
आरबीआई ने यह कदम बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 35ए के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए उठाया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, बैंक में 2013-14 से ही वित्तीय गड़बड़ी और ऋण वितरण में नियमों की अनदेखी की जा रही थी। हाल ही में हुए फॉरेंसिक ऑडिट और आंतरिक समीक्षा में करोड़ों रुपये के ‘घपले’ का खुलासा हुआ, जिसके बाद जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए बैंक पर शिकंजा कसना अनिवार्य हो गया।
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क्या हैं प्रतिबंध? (अगले 6 महीनों तक)
आरबीआई के आदेश के अनुसार, अब यह बैंक अगले छह महीनों तक निम्नलिखित कार्य नहीं कर सकेगा:
- निकासी पर रोक: बचत या चालू खाते से किसी भी प्रकार की निकासी पर फिलहाल पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
- ऋण वितरण: बैंक अब किसी भी नए ऋण को मंजूरी नहीं दे पाएगा और न ही पुराने ऋणों का नवीनीकरण (Renewal) कर सकेगा।
- नया निवेश: बैंक किसी भी प्रकार का नया निवेश करने या नई देनदारी स्वीकार करने के लिए अधिकृत नहीं है।
- संपत्ति की बिक्री: बैंक प्रबंधन अपनी किसी भी संपत्ति को न तो बेच सकता है और न ही हस्तांतरित कर सकता है।

खाताधारकों का संकट: 124 करोड़ रुपये अधर में
इस प्रतिबंध का सीधा असर बैंक के लगभग 9,000 खाताधारकों पर पड़ा है। दावों के अनुसार, इन ग्राहकों के करीब 124 करोड़ रुपये बैंक में जमा हैं। देहरादून के दर्शन लाल चौक स्थित बैंक की मुख्य शाखा पर भारी संख्या में ग्राहकों ने पहुँचकर हंगामा किया। विशेष रूप से नगर निगम के ठेकेदार और छोटे व्यापारी इस फैसले से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। कई ठेकेदारों के भुगतान इसी बैंक में होने के कारण उनका काम और मजदूरों की मजदूरी लटक गई है।

प्रबंधन का पक्ष और भविष्य की राह
बैंक के अध्यक्ष मयंक ममगाईं ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2013-14 के दौरान हुई कुछ प्रविष्टियों में गड़बड़ी पाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट उन्होंने स्वयं प्रोटोकॉल के तहत आरबीआई को दी थी। उन्होंने ग्राहकों को आश्वासन दिया है कि उनकी जमा पूंजी सुरक्षित है। वर्तमान में बैंक का फॉरेंसिक ऑडिट चल रहा है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आरबीआई आगे का निर्णय लेगा।
अधिकारियों का कहना है कि यदि बैंक की स्थिति में सुधार नहीं होता, तो इसे किसी अन्य बड़े बैंक में मर्ज (विलय) करने या लाइसेंस रद्द करने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। हालांकि, DICGC (जमा बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम) के तहत 5 लाख रुपये तक की जमा राशि वाले खाताधारकों को बीमा सुरक्षा का लाभ मिल सकता है, लेकिन इसके लिए एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
देहरादून अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक का मामला एक बार फिर को-ऑपरेटिव बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता और निगरानी की कमी को उजागर करता है। जब तक आरबीआई की जांच पूरी नहीं होती और प्रतिबंध नहीं हटाए जाते, तब तक मध्यम और निम्न आय वर्ग के इन खाताधारकों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाला है।
देहरादून अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक का मामला एक गंभीर वित्तीय संकट और कथित घोटाले से जुड़ा है, जिसके कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 10 फरवरी 2026 से बैंक पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।
इस मामले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. RBI की सख्त कार्रवाई
आरबीआई ने बैंक की बिगड़ती वित्तीय स्थिति और नियमों की अनदेखी को देखते हुए इसे 6 महीने के लिए सीज (प्रतिबंधित) कर दिया है। बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत अब बैंक न तो नया लोन दे सकता है, न नया निवेश कर सकता है और न ही खाताधारकों को पैसे निकालने की अनुमति दे सकता है।
2. घोटाले की जड़: 2013-14 की अनियमितताएं
जांच में सामने आया है कि बैंक में गड़बड़ी आज की नहीं, बल्कि साल 2013-14 से चली आ रही थी।
- अवैध लोन: आरोप है कि बैंक प्रबंधन ने अपने करीबियों और रिश्तेदारों को बिना उचित गारंटी के लोन बांटे।
- भर्ती घोटाला: बैंक में महत्वपूर्ण पदों पर अपनों की भर्तियां करने और ‘बंदरबाँट’ करने के भी आरोप हैं।
- NPA छिपाना: बैंक का लगभग 38 करोड़ रुपये का कर्ज NPA (फँसा हुआ कर्ज) हो चुका है, जिसे कथित तौर पर छुपाया गया था।
3. खाताधारकों पर असर
- इस कार्रवाई से बैंक के करीब 9,000 खाताधारक सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
- बैंक में लोगों के लगभग 124 करोड़ रुपये जमा हैं जो फिलहाल फँस गए हैं। इनमें कई स्थानीय ठेकेदार भी शामिल हैं जिनका भुगतान इसी बैंक के माध्यम से होता था।
4. वर्तमान स्थिति और फॉरेंसिक ऑडिट
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब बैंक का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जा रहा है।
- यह ऑडिट साल 2014 से 2025 तक के सभी लेन-देन की गहराई से जांच करेगा।
- खाताधारकों ने बैंक प्रबंधन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और कई जगह विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं।
क्या जमाकर्ताओं के पैसे सुरक्षित हैं?
नियमों के अनुसार, खाताधारकों की 5 लाख रुपये तक की जमा राशि DICGC (जमा बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम) के तहत सुरक्षित होती है। हालांकि, यह राशि मिलने में समय लग सकता है और यह बैंक के अंतिम ऑडिट और आरबीआई के अगले फैसले पर निर्भर करेगा।








