बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के तहत गुरुवार को हुए मतदान में मतदाताओं ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए इतिहास रच दिया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए अंतिम आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण की 18 जिलों की 121 विधानसभा सीटों पर कुल 64.66 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह बिहार के चुनावी इतिहास में अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है, जिसने न केवल 1952 से 2020 तक हुए सभी विधानसभा चुनावों के रिकॉर्ड को तोड़ा है, बल्कि 1951-52 से 2024 तक हुए लोकसभा के सभी चुनावों में दर्ज किए गए सर्वाधिक मतदान को भी पीछे छोड़ दिया है।
इससे पहले बिहार विधानसभा चुनाव में वर्ष 2000 में सबसे अधिक 62.57 प्रतिशत वोट पड़े थे, जबकि 2020 के पिछले चुनाव में यह आंकड़ा 57.29 प्रतिशत पर रुका था। यह बंपर वोटिंग पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 8 प्रतिशत अधिक है। चुनाव आयोग ने बताया कि 3 करोड़ 75 लाख से अधिक मतदाता वाली इन 121 सीटों पर मतदान पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा और कहीं से भी किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।
पहले चरण में, महिला मतदाताओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से अधिक रही, जिससे कुल मतदान प्रतिशत में खासी बढ़ोतरी हुई। बेगूसराय जिले में सबसे ज्यादा 67.32 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि पटना और शेखपुरा जैसे जिलों में वोटिंग प्रतिशत थोड़ा कम रहा।
इस रिकॉर्ड-तोड़ मतदान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है कि मतदाताओं का यह उत्साह सत्तारूढ़ एनडीए के पक्ष में है या विपक्षी महागठबंधन के लिए समर्थन का संकेत है। इस चरण में तेजस्वी यादव (राघोपुर) और उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जैसे प्रमुख नेताओं सहित कुल 1,314 प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद हो गया है। अब बिहार में अगले चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा, जबकि सभी चरणों की मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी।








