Dehradun News In HIndi: उत्तराखंड के पर्वतीय एवं मैदानी इलाकों में मानसून का रौद्र रूप लगातार देखने को मिल रहा है। राजधानी देहरादून और इसके आसपास के जनपदों में बीती रात से हो रही अनवरत और भारी बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। नदियों और नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ जाने तथा पहाड़ी क्षेत्रों में जगह-जगह भूस्खलन होने से कई प्रमुख सड़कें और संपर्क मार्ग पूरी तरह बाधित हो गए हैं। इस आपदाजनक स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से त्वरित प्रतिक्रिया दिखाई गई और पूरी टीम को चौबीसों घंटे हाई अलर्ट पर रखा गया है।
तड़के से ही बारिश का दौर जारी रहने के बीच जिलाधिकारी आशीष चौहान खुद ज़मीनी हकीकत का जायजा लेने के लिए निकल पड़े। उन्होंने दफ्तर में बैठकर निर्देश देने के बजाय सीधे ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर उन सभी संवेदनशील और बारिश से प्रभावित इलाकों का सघन निरीक्षण किया जहां से नुकसान या मार्ग अवरुद्ध होने की खबरें आ रही थीं। जिलाधिकारी का पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित रहा कि आपदा की इस घड़ी में राहत और पुनर्बहाली का काम बिना किसी देरी के शुरू किया जाए ताकि आम नागरिकों को न्यूनतम समस्याओं का सामना करना पड़े।
नंदा चौकी पुल की मरम्मत और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त तेवर
सुबह-सुबह ही प्रशासन को सूचना मिली कि नंदा चौकी के पास स्थित एक महत्वपूर्ण पुल की अप्रोच लेन बारिश के तेज बहाव के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। यह रास्ता स्थानीय यातायात और आवाजाही के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है। जैसे ही यह खबर जिलाधिकारी तक पहुंची, वे बिना किसी विलंब के खुद स्थिति का जायजा लेने नंदा चौकी पहुंचे। वहां जाकर उन्होंने पाया कि सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंस गया था, जिससे हादसों का गंभीर खतरा बना हुआ था।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए जिलाधिकारी ने मौके पर ही मौजूद लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारियों को कड़े शब्दों में हिदायत दी। उन्होंने साफ़ तौर पर आदेश जारी किए कि अगले तीन घंटे के भीतर हर हाल में इस क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का काम पूरा किया जाए और गाड़ियों की आवाजाही को सुरक्षित रूप से बहाल किया जाए। इसके साथ ही, इस पूरी घटना में हुई शुरुआती देरी या रखरखाव में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने संबंधित उत्तरदायी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और प्रशासनिक कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए।
प्रशासनिक हंटर चलते ही लोक निर्माण विभाग की टीम हरकत में आई और भारी मशीनरियों के साथ तुरंत मौके पर काम शुरू कर दिया गया। निर्धारित समयसीमा के भीतर मार्ग को सुचारु करने की दिशा में कार्य तेज़ी से गतिमान कर दिया गया, जिससे सुबह के वक्त दफ्तर और ज़रूरी कामों के लिए निकलने वाले लोगों को ज्यादा समय तक परेशानी नहीं झेलनी पड़ी।
सौड़ा-सरौली और थानों मार्ग पर मलबा हटाकर बहाल की गई आवाजाही
नंदा चौकी का निरीक्षण करने के तुरंत बाद जिलाधिकारी का काफिला सौड़ा-सरौली मार्ग की ओर बढ़ा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी यह सड़क बारिश के भारी पानी और मिट्टी के कटाव की वजह से जगह-जगह से टूट चुकी थी और उस पर चलना जानलेवा साबित हो सकता था। जिलाधिकारी ने योजना से जुड़े अभियंताओं को मौके पर ही खड़ा रखकर सड़क की कटिंग और मरम्मत का काम शुरू करवाया। उनका स्पष्ट निर्देश था कि ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाले इन मुख्य रास्तों को प्राथमिकता के आधार पर खोला जाए ताकि एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं प्रभावित न हों।
इसी क्रम में थानों मार्ग पर भी भारी भूस्खलन के कारण सड़कों पर मलबे और पत्थरों का बड़ा ढेर लग गया था, जिससे दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। जिला प्रशासन की ओर से भेजी गई जेसीबी और पोकलैंड मशीनों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कुछ ही घंटों के भीतर सड़कों से भारी मलबे को साफ कर दिया। इस त्वरित कार्रवाई के चलते थानों मार्ग को भी समय रहते फिर से यातायात के लिए पूरी तरह खोल दिया गया, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिली।
मालदेवता में जलभराव की समस्या का पक्का समाधान और नए पुल की योजना
देहरादून का मालदेवता क्षेत्र हर साल मानसून के दौरान भारी तबाही और जलभराव का सामना करता है। यहां के रपटे पर जैसे ही नदियों का जलस्तर बढ़ता है, वैसे ही दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य शहर से पूरी तरह कट जाता है। इस स्थायी परेशानी को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी आशीष चौहान ने मालदेवता के बाढ़ और कटाव प्रभावित क्षेत्रों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत की और बारिश के दौरान उनके सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को समझा।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने माना कि हर साल रपटे पर पानी आने से यातायात ठप होना एक गंभीर समस्या है और अब इसका कोई अस्थायी उपाय खोजने के बजाय एक स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए। जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिया कि वे बिना समय गंवाए इस स्थान पर एक मजबूत और ऊंचे पक्के पुल के निर्माण का विस्तृत प्रस्ताव तैयार करें।
उन्होंने अधिकारियों को पाबंद किया कि इस प्रस्ताव को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द शासन को भेजा जाए, ताकि बजट स्वीकृत कराकर पुल का निर्माण शुरू कराया जा सके। यदि इस स्थान पर पक्का पुल बन जाता है, तो आने वाले सालों में मानसून के दौरान मालदेवता और आसपास की एक बड़ी आबादी को आवागमन में होने वाली भारी दुश्वारियों से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।
मसूरी रोड और पानी वाला बैंड पर चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों की समयसीमा
देहरादून से मसूरी को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग न केवल स्थानीय निवासियों के लिए बल्कि हर दिन आने वाले हजारों पर्यटकों के लिए भी जीवनरेखा की तरह है। भारी बारिश के चलते मसूरी रोड पर स्थित पानी वाला बैंड के पास पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा दरक गया, जिससे मुख्य सड़क का एक बड़ा चौड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर खाई में समा गया। इस वजह से मसूरी मार्ग पर गाड़ियों का संचालन बेहद जोखिम भरा हो गया था।
जिलाधिकारी ने पानी वाला बैंड पहुंचकर भूस्खलन प्रभावित हिस्से का गहराई से जायजा लिया। उन्होंने वहां मौजूद प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी कि 15 दिनों की समयसीमा के भीतर इस पूरी सड़क को कम से कम दो लेन के यातायात के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और सुचारु बनाया जाए। सड़क चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के काम में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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विभाग के अधिकारियों ने जिलाधिकारी को आश्वस्त किया कि वे रात-दिन काम करके अगले 10 से 15 दिनों के अंदर दो लेन सड़क का निर्माण कार्य पूरा कर लेंगे। इसके अलावा, भविष्य में दोबारा उस स्थान पर भूस्खलन न हो और पहाड़ी को धंसने से रोका जा सके, इसके लिए एक बड़ा सुरक्षा पुश्ता (सुरक्षा दीवार) भी बनाया जाएगा। विभागीय जानकारी के अनुसार, इस सुरक्षा पुश्ते के निर्माण में लगभग दो महीने का समय लगेगा, लेकिन तब तक यातायात को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
पूरे जनपद में 24 घंटे सतर्कता और आईआरएस प्रणाली को सक्रिय रहने के निर्देश
ज़िले की भौगोलिक स्थिति और लगातार हो रही बारिश के रुझान को देखते हुए जिलाधिकारी ने केवल मुख्य रास्तों तक ही अपना ध्यान सीमित नहीं रखा, बल्कि पूरे जनपद के अंदरूनी और ग्रामीण संपर्क मार्गों की स्थिति पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अधिकारियों को सख्त चेतावनी जारी की कि जहां कहीं भी बारिश या भूस्खलन के कारण रास्ते बंद हुए हैं या क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तुरंत ठीक किया जाए।
इस दौरान उन्होंने आपदा प्रबंधन की इंसीडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आईआरएस) से जुड़े तमाम विभागों, पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग और सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 24 घंटे पूरी तरह सतर्क और एक्टिव मोड में रहें। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में बने रहने और मोबाइल फोन हमेशा ऑन रखने के आदेश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन सूचना पर प्रतिक्रिया का समय न्यूनतम रहे।

जिलाधिकारी आशीष चौहान ने साफ किया कि इस पूरे मानसून सीजन में आम जनता की सुरक्षा और उनकी सुविधा ही जिला प्रशासन की सबसे पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने सभी विभागों से आपस में बेहतर तालमेल और समन्वय के साथ काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आपदा या मार्ग बंद होने की खबर मिलते ही राहत और बचाव दल को बिना एक पल गंवाए मौके पर पहुंचना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा या भय का सामना न करना पड़े। प्रशासन की इस सक्रियता और मुस्तैदी से स्थानीय लोगों ने भी राहत की सांस ली है।







