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Dehradun MNREGA News: मनरेगा घोटाले की गूंज हाईकोर्ट तक, अदालत ने दिए जांच के आदेश

On: April 8, 2026 5:27 PM
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Dehradun MNREGA News In Hindi: देहरादून/नैनीताल। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण विकास की रीढ़ मानी जाने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना एक बार फिर विवादों के घेरे में है।
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Dehradun MNREGA News In Hindi: देहरादून/नैनीताल। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण विकास की रीढ़ मानी जाने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना एक बार फिर विवादों के घेरे में है। ताजा मामला देहरादून जिले के विकासनगर क्षेत्र अंतर्गत कालसी ब्लॉक के खाती गांव का है, जहां मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप लगे हैं। यह मामला अब उत्तराखंड उच्च न्यायालय की दहलीज तक जा पहुंचा है, जिस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए विभाग को नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।


क्या है पूरा मामला?

खाती गांव के निवासी गोपाल सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) में आरोप लगाया गया कि गांव में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। याचिका के अनुसार, वर्ष 2024 के लिए गांव में मनरेगा के तहत कई निर्माण और सुधारीकरण कार्य प्रस्तावित थे। इन कार्यों का मुख्य उद्देश्य गांव के बेरोजगार युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को 100 दिन का सुनिश्चित रोजगार प्रदान करना था।

हालांकि, याचिकाकर्ता का दावा है कि धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत रही। गांव के पात्र और जरूरतमंद ग्रामीण काम के लिए भटकते रहे, जबकि कागजों पर विकास की गंगा बहती रही।

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रिश्तेदारों और सरकारी कर्मचारियों को ‘फर्जी’ भुगतान

याचिका में ग्राम प्रधान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

  • भाई-भतीजावाद: ग्राम प्रधान पर आरोप है कि उन्होंने नियम-कायदों को ताक पर रखकर केवल अपने सगे-संबंधियों को लाभ पहुंचाया।
  • फर्जी मस्टर रोल: शिकायत में कहा गया है कि ऐसे लोगों के नाम पर मस्टर रोल (उपस्थिति पंजी) भरे गए, जिन्होंने कभी कार्यस्थल पर पैर भी नहीं रखा।
  • सरकारी कर्मचारियों का नाम शामिल: सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि जो लोग पहले से सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं या गांव से बाहर रहते हैं, उनके नाम भी मनरेगा श्रमिकों की सूची में डालकर भुगतान निकाल लिया गया।
  • हक की हकमारी: वास्तविक जॉब कार्ड धारकों को रोजगार से वंचित रखा गया, जो सीधे तौर पर उनके ‘रोजगार के अधिकार’ का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट का रुख और दिशा-निर्देश

नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायूमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता के तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया।

न्यायालय के मुख्य बिंदु:

  1. याचिका का निस्तारण: कोर्ट ने जनहित याचिका को यह कहते हुए निस्तारित कर दिया कि इस प्रकार के मामलों में पहले विभागीय जांच की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है।
  2. पंचायत राज विभाग को निर्देश: खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता अपनी विस्तृत शिकायत और साक्ष्य पंचायत राज विभाग के सक्षम अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करें।
  3. विभागीय जांच की अनिवार्यता: कोर्ट ने अपेक्षा की है कि संबंधित विभाग इन आरोपों की निष्पक्षता से जांच करे और यदि ग्राम प्रधान या अन्य अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

मनरेगा की शुचिता पर उठते सवाल

यह मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। जानकारों का मानना है कि मनरेगा में ‘फर्जी हाजिरी’ और ‘अपात्रों को भुगतान’ एक पुरानी बीमारी है, जो तकनीकी निगरानी (जैसे NMMS ऐप) के बावजूद बनी हुई है। खाती गांव का यह मामला राज्य में पंचायती राज व्यवस्था के भीतर पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है।

ग्रामीणों की मांग: खाती गांव के निवासियों का कहना है कि यदि निष्पक्ष सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) कराया जाए, तो कई और परतों से पर्दा उठ सकता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की जाए और उन अपात्र लोगों से पैसा वापस लिया जाए जिन्होंने गरीबों के हक पर डाका डाला है।


उच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब गेंद पंचायत राज विभाग और जिला प्रशासन के पाले में है। अब यह देखना होगा कि विभाग इस मामले में कितनी तेजी से जांच पूरी करता है। यदि विभाग की जांच में गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो पंचायती राज अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत ग्राम प्रधान की शक्तियां छीनी जा सकती हैं और उन पर वित्तीय गबन का मुकदमा भी चल सकता है।

यह प्रकरण अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी एक चेतावनी है कि सरकारी धन का दुरुपयोग और अपनों को लाभ पहुंचाने की कोशिशें उन्हें कानूनी पचड़े में डाल सकती हैं।

(For more news apart from Dehradun MNREGA scam, High Court’s strict comment News in hindi, stay tuned to Mdano News In Hindi)

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