Chaitra Navratri 2026 latest news: 2026 में नवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का महासंगम लेकर आ रहा है। इस वर्ष चैत्र और शारदीय दोनों ही नवरात्रों में विशेष ज्योतिषीय योग बन रहे हैं। हिंदू धर्म में नवरात्रि का स्थान सर्वोपरि है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि, संयम और नारी शक्ति की आराधना का उत्सव है। वर्ष 2026 में नवरात्रि का प्रारंभ विशेष संयोगों के साथ हो रहा है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि से ही हिंदू नववर्ष ‘विक्रम संवत 2083’ का आरंभ भी होगा।
चैत्र नवरात्रि 2026 (Chaitra Navratri Details)
चैत्र नवरात्रि वसंत ऋतु के आगमन और नई फसल की खुशी का प्रतीक है।
- तिथि: 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से 27 मार्च 2026 (शुक्रवार) तक।
- घटस्थापना मुहूर्त (19 मार्च): सुबह 06:52 AM से 10:10 AM तक।
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:47 AM से 12:36 PM तक।
- विशेष: इस बार मां दुर्गा का आगमन पालकी (डोली) पर हो रहा है, जिसे शास्त्रों में थोड़ा संवेदनशील माना जाता है, परंतु सच्ची भक्ति से सभी दोष दूर होते हैं।

शारदीय नवरात्रि 2026 (Sharad Navratri Details)
आश्विन मास की यह नवरात्रि सबसे अधिक धूमधाम से मनाई जाती है, जिसे महानवरात्रि भी कहते हैं।
- तिथि: 11 अक्टूबर 2026 (रविवार) से 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) तक।
- विजयादशमी (दशहरा): 20 अक्टूबर 2026।
- घटस्थापना मुहूर्त (11 अक्टूबर): सुबह 06:31 AM से 10:27 AM तक।
नवरात्रि के 9 दिन: मां के स्वरूप और प्रिय रंग (2026 Calendar)
| दिन | तिथि (चैत्र) | देवी का स्वरूप | शुभ रंग | पसंदीदा भोग |
| 1 | 19 मार्च | मां शैलपुत्री | पीला | गाय का घी |
| 2 | 20 मार्च | मां ब्रह्मचारिणी | हरा | शक्कर/पंचामृत |
| 3 | 21 मार्च | मां चंद्रघंटा | ग्रे (स्लेटी) | दूध की मिठाई |
| 4 | 22 मार्च | मां कूष्मांडा | नारंगी | मालपुआ |
| 5 | 23 मार्च | मां स्कंदमाता | सफेद | केला |
| 6 | 24 मार्च | मां कात्यायनी | लाल | शहद |
| 7 | 25 मार्च | मां कालरात्रि | रॉयल ब्लू | गुड़ |
| 8 | 26 मार्च | मां महागौरी (अष्टमी) | गुलाबी | नारियल |
| 9 | 27 मार्च | मां सिद्धिदात्री (नवमी) | बैंगनी | हलवा-पूरी |
पूजन विधि और नियम (Rituals & Rules)
कन्या पूजन: अष्टमी या नवमी के दिन नौ कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लें।
घटस्थापना: ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में कलश की स्थापना करें। कलश पर नारियल और आम के पत्ते रखें।
अखंड ज्योति: नौ दिनों तक मां के सम्मुख दीपक प्रज्वलित रखें।
सात्विक आहार: प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग करें।
वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आध्यात्मिक उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष नवरात्रि कई मायनों में खास है क्योंकि इसकी शुरुआत 72 साल बाद बन रहे अमावस्या और प्रतिपदा के अद्भुत संयोग के साथ हो रही है। साथ ही, इसी दिन से हिंदू नववर्ष ‘विक्रम संवत 2083’ का भी शुभारंभ हो रहा है।
यहाँ चैत्र नवरात्रि 2026 की तिथियों, घटस्थापना मुहूर्त और मां दुर्गा के आगमन से जुड़ी विस्तृत जानकारी दी गई है:
Chaitra Navratri 2026: मुख्य तिथियां और मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि का आरंभ 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से हो रहा है, जिसका समापन 27 मार्च 2026 (शुक्रवार) को राम नवमी के साथ होगा।

कलश/घटस्थापना का शुभ मुहूर्त (19 मार्च 2026)
शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन सही मुहूर्त में कलश स्थापित करना अत्यंत फलदायी होता है:
- प्रातः काल मुहूर्त: सुबह 06:52 AM से 07:43 AM तक (सबसे उत्तम समय)।
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 PM से 12:53 PM तक (यदि सुबह चूक जाएं तो यह समय श्रेष्ठ है)।
- चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 06:26 AM से 07:57 AM (शुभ) और दोपहर 12:29 PM से 02:00 PM (लाभ)।
मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान: क्या है संकेत?
देवी पुराण के अनुसार, नवरात्रि की शुरुआत और समापन के दिन (वार) के आधार पर मां दुर्गा की सवारी तय होती है।
- आगमन (पालकी/डोली पर): 2026 में नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आ रही हैं। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इसे बहुत शुभ नहीं माना जाता; यह महामारी, प्राकृतिक आपदाओं या राजनीतिक अस्थिरता का संकेत हो सकता है।
- प्रस्थान (हाथी पर): नवरात्रि का समापन शुक्रवार को हो रहा है, इसलिए मां का प्रस्थान हाथी पर होगा। हाथी पर प्रस्थान करना सुख, समृद्धि और अच्छी वर्षा का प्रतीक माना जाता है।
चैत्र नवरात्रि 2026 का 9 दिवसीय कैलेंडर
| दिन | तिथि | पूजा का स्वरूप | शुभ रंग |
| दिन 1 | 19 मार्च | मां शैलपुत्री (घटस्थापना) | पीला |
| दिन 2 | 20 मार्च | मां ब्रह्मचारिणी | हरा |
| दिन 3 | 21 मार्च | मां चंद्रघंटा | स्लेटी (Grey) |
| दिन 4 | 22 मार्च | मां कूष्मांडा | नारंगी |
| दिन 5 | 23 मार्च | मां स्कंदमाता | सफेद |
| दिन 6 | 24 मार्च | मां कात्यायनी | लाल |
| दिन 7 | 25 मार्च | मां कालरात्रि | रॉयल ब्लू |
| दिन 8 | 26 मार्च | मां महागौरी (दुर्गा अष्टमी) | गुलाबी |
| दिन 9 | 27 मार्च | मां सिद्धिदात्री (राम नवमी) | बैंगनी |
कलश स्थापना की सरल विधि (Ghat Sthapana Vidhi)
- स्थान का चयन: उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को साफ कर वहां लकड़ी की चौकी रखें।
- जौ बोना: एक मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी भरकर उसमें जौ के दाने बोएं।
- कलश तैयार करना: तांबे या मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बनाएं, उसमें जल, गंगाजल, सिक्का, सुपारी और दूर्वा डालें।
- पल्लव और नारियल: कलश के मुख पर आम या अशोक के 5-7 पत्ते रखें और ऊपर नारियल (लाल कपड़े में लिपटा हुआ) स्थापित करें।













