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Kharmas 2026: जानिए खरमास क्यों लगता है, इसका महत्व और क्या करें, क्या न करें

On: March 18, 2026 3:03 PM
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Kharmas 2026 News In Hindi:हिंदू पंचांग में समय की गणना ग्रहों की चाल के आधार पर की जाती है। इसी गणना में एक ऐसा समय आता है
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Kharmas 2026 News In Hindi:हिंदू पंचांग में समय की गणना ग्रहों की चाल के आधार पर की जाती है। इसी गणना में एक ऐसा समय आता है जब सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है, जिसे हम ‘खरमास’ के नाम से जानते हैं। वर्ष 2026 में 15 मार्च से मीन खरमास की शुरुआत हो रही है।यहाँ खरमास से जुड़ी पौराणिक कथाओं, ज्योतिषीय महत्व और क्या करें-क्या न करें की विस्तृत जानकारी दी गई है।


खरमास क्या है और यह क्यों लगता है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव बृहस्पति (गुरु) की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो उस काल को खरमास या मलमास कहा जाता है। चूंकि गुरु सात्विकता और शुभता के कारक हैं, जब सूर्य उनके घर (राशि) में जाते हैं, तो गुरु का प्रभाव कम हो जाता है और सूर्य की ऊर्जा ‘मलिन’ या ‘मंद’ हो जाती है।

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google Image- खरमास 2026

पौराणिक कथा: घोड़ों की जगह गधे

‘खर’ का अर्थ संस्कृत में गधा होता है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर निरंतर ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। एक बार उनके घोड़े प्यास और थकान से व्याकुल हो गए। घोड़ों की दशा देख सूर्य देव को दया आ गई और वे उन्हें एक तालाब के किनारे ले गए।

चूंकि ब्रह्मांड के नियम के अनुसार सूर्य रुक नहीं सकते थे, इसलिए उन्होंने घोड़ों को विश्राम देने के लिए रथ में पास खड़े दो खर (गधों) को जोत दिया। गधों की गति धीमी होने के कारण सूर्य का तेज कम हो गया और उनकी चाल सुस्त पड़ गई। पूरे एक महीने बाद जब घोड़े विश्राम कर लौटे, तब सूर्य पुनः अपनी तीव्र गति में आए। इसी एक महीने की अवधि को ‘खरमास’ कहा जाता है।

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खरमास का महत्व

यद्यपि इसे ‘अशुभ’ मानकर मांगलिक कार्य वर्जित किए जाते हैं, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह महीना अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  1. साधना का समय: यह समय बाहरी आडंबरों को छोड़कर आत्म-चिंतन और ईश्वर की भक्ति में लीन होने का है।
  2. सूर्य उपासना: चूंकि सूर्य की ऊर्जा मंद होती है, इसलिए सूर्य देव को अर्घ्य देना आत्म-बल बढ़ाने वाला माना जाता है।
  3. विष्णु कृपा: इस मास को ‘पुरुषोत्तम मास’ के समान फलदायी माना गया है, जिसमें भगवान विष्णु की पूजा से अक्षय पुण्य मिलता है।

खरमास में क्या करें (Dos)

  • दान-पुण्य: जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना इस समय विशेष फलदायी होता है।
  • मंत्र जाप: ‘ओम सूर्याय नम:’ या ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना चाहिए।
  • नदी स्नान: पवित्र नदियों में स्नान करने से शारीरिक और मानसिक शुद्धि होती है।
  • गौ सेवा: गायों को हरा चारा खिलाना और उनकी सेवा करना शुभ माना जाता है।
  • सात्विक जीवन: इस दौरान सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।

खरमास में क्या न करें (Don’ts)

खरमास के दौरान सौर ऊर्जा और गुरु का शुभ प्रभाव कम होने के कारण निम्नलिखित कार्य वर्जित हैं:

  • विवाह और सगाई: इस अवधि में विवाह करने से दांपत्य जीवन में कलह और बाधाएं आने की आशंका रहती है।
  • गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश करने से सुख-शांति में कमी आ सकती है।
  • मुंडन और जनेऊ: बच्चों के संस्कार जैसे मुंडन या यज्ञोपवीत इस समय नहीं किए जाते।
  • नया व्यापार: नए बिजनेस की शुरुआत या बड़े निवेश से बचना चाहिए क्योंकि सफलता मिलने में संशय रहता है।
  • संपत्ति की खरीद: जमीन, मकान या नए वाहन की खरीदारी को इस महीने टाल देना चाहिए।

खरमास 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां

घटनातिथिसमय
आरंभ (मीन संक्रांति)15 मार्च 2026सुबह 01:08 बजे (सूर्य का मीन राशि में प्रवेश)
समाप्ति (मेष संक्रांति)14 अप्रैल 2026सुबह 09:38 बजे (सूर्य का मेष राशि में प्रवेश)

खरमास का समय डरने का नहीं, बल्कि धैर्य और विवेक का है। यह प्रकृति का संकेत है कि हमें भी सूर्य की तरह कभी-कभी अपनी बाहरी रफ्तार धीमी कर आंतरिक ऊर्जा को संचित करना चाहिए। जैसे ही 14 अप्रैल को सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे, मांगलिक कार्यों की शहनाइयां पुनः गूंजने लगेंगी।

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