Middle East Crisis News In Hindi: मध्य पूर्व में युद्ध के गहराते बादलों और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने के खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने “इमरजेंसी मोड” ऑन कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश की सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की तेल रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे घरेलू रसोई गैस (LPG) के उत्पादन को अधिकतम स्तर पर ले जाएं। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि युद्ध की स्थिति में भी भारतीय रसोई तक गैस की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।
आवश्यक वस्तु अधिनियम (ESMA) के तहत आदेश
भारत सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act) के तहत अपनी दुर्लभ शक्तियों का उपयोग करते हुए यह निर्देश जारी किया है। 5 मार्च 2026 की देर शाम जारी इस आदेश में रिफाइनरियों को स्पष्ट कहा गया है कि वे प्रोपेन (Propane) और ब्यूटेन (Butane) गैस की धाराओं का उपयोग केवल एलपीजी बनाने के लिए करें। आमतौर पर रिफाइनरियाँ इन गैसों का उपयोग पेट्रोकेमिकल उत्पाद बनाने के लिए करती हैं क्योंकि वहाँ मुनाफा अधिक होता है, लेकिन संकट को देखते हुए अब प्राथमिकता रसोई गैस को दी गई है।

भारत के लिए क्यों पैदा हुआ संकट?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है। देश की कुल एलपीजी खपत का लगभग 60-65% हिस्सा आयात के जरिए पूरा होता है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता: भारत अपनी एलपीजी का लगभग 85-90% हिस्सा सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी देशों से मंगवाता है। ये सभी जहाज ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से होकर गुजरते हैं, जो फिलहाल युद्ध के कारण प्रभावी रूप से ब्लॉक हो चुका है।
- कतर से आपूर्ति ठप: हालिया संघर्ष में कतर की एलएनजी उत्पादन इकाइयों पर ड्रोन हमलों के कारण उत्पादन बंद करना पड़ा है, जिससे भारत की गैस आपूर्ति का एक बड़ा स्रोत संकट में आ गया है।

रिफाइनरियों पर क्या पाबंदियाँ लगाई गई हैं?
मंत्रालय के आदेश के अनुसार:
- पेट्रोकेमिकल पर रोक: रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) जैसी निजी कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों को आदेश दिया गया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल बनाने के लिए डायवर्ट न करें।
- केवल सरकारी कंपनियों को बिक्री: रिफाइनरियों द्वारा उत्पादित अतिरिक्त एलपीजी को केवल तीन सरकारी तेल कंपनियों—IOC (इंडियन ऑयल), BPCL (भारत पेट्रोलियम) और HPCL (हिंदुस्तान पेट्रोलियम)—को ही बेचा जाएगा।
- घरेलू उपयोग अनिवार्य: यह गैस केवल घरेलू उपभोक्ताओं (Household Kitchens) के लिए उपलब्ध होगी, औद्योगिक उपयोग पर फिलहाल कटौती की जा सकती है।
वैकल्पिक स्रोतों की तलाश
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास वर्तमान में लगभग 30 दिनों का एलपीजी बफर स्टॉक है। आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए भारत अब गैर-खाड़ी देशों (Non-Strait countries) की ओर रुख कर रहा है। हाल ही में अमेरिका के साथ हुए एक समझौते के तहत 2026 में लगभग 2.2 मिलियन टन एलपीजी अमेरिका से आने की उम्मीद है। इसके अलावा, रूस से फंसे हुए तेल के लिए अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की विशेष छूट (Waiver) भी दी है ताकि ऊर्जा संकट को प्रबंधित किया जा सके।
आम जनता पर क्या होगा असर?
पेट्रोलियम मंत्री ने आश्वासन दिया है कि देश में स्टॉक की स्थिति फिलहाल आरामदायक है और लोगों को पैनिक बुकिंग (अफरा-तफरी में सिलेंडर बुक करना) करने की आवश्यकता नहीं है। सरकार का उद्देश्य यह है कि युद्ध लंबा खिंचने की स्थिति में भी सामान्य नागरिकों के रसोई घरों में चूल्हा जलता रहे। हालांकि, पेट्रोकेमिकल कंपनियों के मुनाफे और अन्य औद्योगिक गैस आपूर्ति पर इसका असर पड़ सकता है।

मध्य पूर्व संकट के कारण भारत में रसोई गैस की संभावित कमी को रोकने के लिए सरकार ने आपातकालीन कदम उठाए हैं। तेल रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल उत्पादन रोककर एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के चलते आयात बाधित होने की आशंका के बीच यह फैसला लिया गया है।









