King Charles’ brother Andrew arrested News In Hindi: ब्रिटिश राजपरिवार के इतिहास में एक अभूतपूर्व मोड़ तब आया जब किंग चार्ल्स III के छोटे भाई, एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर को थम्स वैली पुलिस (Thames Valley Police) ने गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी ‘पब्लिक ऑफिस में दुराचार’ (Misconduct in Public Office) के गंभीर संदेह में की गई है। एंड्रयू, जिन्हें कभी प्रिंस एंड्रयू और ड्यूक ऑफ यॉर्क के नाम से जाना जाता था, के खिलाफ यह कार्रवाई उनके 66वें जन्मदिन पर हुई, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
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गिरफ्तारी का मुख्य कारण: एपस्टीन फाइल्स का खुलासा
यह गिरफ्तारी हाल ही में जारी हुई ‘एपस्टीन फाइल्स’ के बाद हुई है। अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा सार्वजनिक किए गए लाखों पन्नों के दस्तावेजों में यह संकेत मिले हैं कि एंड्रयू ने 2001 से 2011 के बीच ब्रिटेन के ‘विशेष व्यापार दूत’ (Special Trade Envoy) के रूप में कार्य करते समय गोपनीय और संवेदनशील सरकारी जानकारी कुख्यात अपराधी जेफरी एपस्टीन के साथ साझा की थी।

दस्तावेजों के अनुसार, अक्टूबर 2010 में एंड्रयू ने अपनी वियतनाम, सिंगापुर और चीन की आधिकारिक व्यापारिक यात्राओं का विवरण एपस्टीन को भेजा था। इसके अलावा, उन पर आरोप है कि उन्होंने अफगानिस्तान में सोने और यूरेनियम के निवेश के अवसरों से जुड़ी ‘हाई-वैल्यू’ व्यापारिक जानकारी भी साझा की थी। एक व्यापार दूत के रूप में उन पर गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, जिसका कथित उल्लंघन ही इस गिरफ्तारी का आधार बना है।
पुलिस की कार्रवाई और किंग चार्ल्स का रुख
गुरुवार सुबह करीब 8:00 बजे, सादे कपड़ों में पुलिस अधिकारी आठ अचिह्नित वाहनों के साथ नॉरफ़ॉक स्थित एंड्रयू के निवास ‘वुड फार्म’ पहुंचे। इसके साथ ही बर्कशायर स्थित उनके पूर्व आवास ‘रॉयल लॉज’ की भी तलाशी ली गई। थम्स वैली पुलिस ने आधिकारिक बयान में कहा कि उन्होंने “नॉरफ़ॉक के 60 वर्षीय एक व्यक्ति” को गिरफ्तार किया है।
इस घटना पर किंग चार्ल्स III ने एक साहसिक और स्पष्ट रुख अपनाया है। बकिंघम पैलेस द्वारा जारी बयान में किंग ने कहा, “कानून को अपना काम करना चाहिए। अधिकारियों को हमारा पूर्ण सहयोग और समर्थन प्राप्त है।” किंग के इस बयान ने यह साफ कर दिया कि आधुनिक ब्रिटेन में राजशाही का कोई भी सदस्य कानून से ऊपर नहीं है।
11 घंटे की पूछताछ और रिहाई
लगभग 11 घंटे तक पुलिस हिरासत में रहने और गहन पूछताछ के बाद, एंड्रयू को ‘जांच के अधीन’ (Released under investigation) रिहा कर दिया गया। इसका अर्थ है कि उन पर अभी तक औपचारिक रूप से आरोप तय नहीं किए गए हैं, लेकिन पुलिस की जांच अभी भी जारी है। उन्हें आइलशम (Aylsham) पुलिस स्टेशन से बाहर निकलते हुए देखा गया, जहाँ वे मीडिया के सवालों पर खामोश रहे।

ब्रिटिश राजनीति और जनता की प्रतिक्रिया
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि न्याय प्रणाली का मूल सिद्धांत है कि हर कोई कानून के सामने समान है। वहीं, वर्जीनिया गिफ्रे (जो एपस्टीन मामले में एंड्रयू की मुख्य आरोप लगाने वाली रही हैं) के परिवार ने इस गिरफ्तारी का स्वागत करते हुए इसे “न्याय की जीत” बताया है।
यह मामला न केवल एंड्रयू के व्यक्तिगत भविष्य के लिए बल्कि ब्रिटिश राजशाही की छवि के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। यदि उन पर दोष सिद्ध होता है, तो उन्हें जेल की सजा भी हो सकती है, जो आधुनिक ब्रिटिश इतिहास में पहली बार किसी वरिष्ठ शाही सदस्य के साथ होगा।












