Uttarakhand CBSE Board Exams 2026: उत्तराखंड में सीबीएसई (CBSE) बोर्ड की परीक्षाएं 17 फरवरी, 2026 से हर्षोल्लास और कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हो गई हैं। देवभूमि के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही छात्रों की चहल-पहल देखने को मिली। इस वर्ष देहरादून जिले में लगभग 41 हजार छात्र-छात्राएं इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक पड़ाव में शामिल हो रहे हैं, जो अपने भविष्य की दिशा तय करने के लिए परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे हैं। बोर्ड ने इस बार परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन की प्रक्रिया में कई क्रांतिकारी बदलाव किए हैं, जिनमें सबसे प्रमुख 12वीं कक्षा के लिए ‘डिजिटल मार्किंग’ यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम का लागू होना है। यह तकनीक न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी बल्कि परीक्षा परिणामों की घोषणा में लगने वाले समय को भी कम करेगी।

देहरादून में परीक्षा का माहौल और छात्रों का उत्साह
राजधानी देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में सीबीएसई ने परीक्षा को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। जिले के 41 हजार छात्रों के लिए दर्जनों परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। पहले दिन छात्रों के चेहरे पर थोड़ी घबराहट के साथ-साथ एक नई उमंग भी देखी गई। स्कूलों के बाहर अभिभावकों की भीड़ और शिक्षकों द्वारा बच्चों को दिए जा रहे अंतिम समय के निर्देशों ने एक गंभीर और अनुशासित माहौल तैयार किया। शिक्षा विभाग और बोर्ड के अधिकारियों ने केंद्रों का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित किया कि कहीं भी किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो और छात्रों को शांत वातावरण मिले।
12वीं में ‘डिजिटल मार्किंग’ की शुरुआत: एक नया युग
इस साल की सबसे बड़ी खबर 12वीं कक्षा के मूल्यांकन के तरीके में बदलाव है। अब तक शिक्षकों को कॉपियों के बंडल दिए जाते थे, जिन्हें वे पेन से चेक करते थे। लेकिन 2026 की परीक्षाओं से ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ प्रणाली को पूरी तरह से अपना लिया गया है। इस प्रक्रिया के तहत, छात्रों द्वारा लिखी गई भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं को परीक्षा के तुरंत बाद उच्च-गुणवत्ता वाले स्कैनर्स के माध्यम से स्कैन किया जाएगा। इन स्कैन की गई डिजिटल प्रतियों को बोर्ड के सुरक्षित सर्वर पर अपलोड किया जाएगा। इसके बाद, शिक्षक अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर लॉगिन करके सीधे स्क्रीन पर ही उत्तरों का मूल्यांकन करेंगे।
डिजिटल मार्किंग के आने से मूल्यांकन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। अक्सर यह देखा जाता था कि मानवीय त्रुटि के कारण अंकों की गणना (Totaling) में गलती रह जाती थी, जिससे छात्रों को बाद में स्क्रूटनी या पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करना पड़ता था। अब सॉफ्टवेयर खुद-ब-खुद अंकों को जोड़ देगा, जिससे गणना संबंधी त्रुटियां शून्य हो जाएंगी। साथ ही, यह प्रणाली पेपरलेस होने के कारण पर्यावरण के अनुकूल भी है और कॉपियों को एक शहर से दूसरे शहर भेजने में लगने वाले परिवहन खर्च और जोखिम को भी समाप्त करती है।
)
शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण और तकनीक की चुनौती
डिजिटल मार्किंग को लागू करने से पहले सीबीएसई ने शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र और वेबिनार आयोजित किए हैं। देहरादून के कई स्कूलों में शिक्षकों को इस सॉफ्टवेयर के उपयोग का अभ्यास कराया गया है ताकि वे कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपियों को बिना किसी परेशानी के जांच सकें। हालांकि, कई पुराने शिक्षकों के लिए तकनीक के साथ तालमेल बिठाना एक चुनौती हो सकती है, लेकिन बोर्ड ने भरोसा दिलाया है कि यह सिस्टम बहुत ही यूजर-फ्रेंडली है। शिक्षकों को अब कॉपियां चेक करने के लिए दूर-दराज के केंद्रों पर जाने की जरूरत नहीं होगी, वे अपने स्कूल या निर्धारित केंद्रों से ही यह कार्य कर सकेंगे, जिससे उनके समय और ऊर्जा की बचत होगी।

सुरक्षा और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान
परीक्षा केंद्रों पर नकल रोकने के लिए जैमर्स और सीसीटीवी के साथ-साथ उड़न दस्तों (Flying Squads) की भी तैनाती की गई है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए इस बार अधिक सख्त प्रोटोकॉल अपनाए गए हैं। डिजिटल मार्किंग के लागू होने से कॉपियों के गुम होने या उनमें छेड़छाड़ की संभावना भी न्यूनतम हो गई है। छात्र इस बात को लेकर आश्वस्त रह सकते हैं कि उनकी मेहनत का सही और निष्पक्ष मूल्यांकन होगा। बोर्ड का लक्ष्य है कि इस डिजिटल तकनीक के माध्यम से परिणामों को अप्रैल के अंत या मई के पहले सप्ताह तक जारी कर दिया जाए, ताकि छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए कॉलेजों में प्रवेश लेने में देरी न हो।








