Badrinath Dham Covered With Snow News: हिमालय की गोद में स्थित भगवान विष्णु के परम धाम, श्री बद्रीनाथ में इन दिनों कुदरत का अद्भुत और रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। जहां पूरा उत्तर भारत कड़ाके की ठंड से जूझ रहा है, वहीं समुद्र तल से 10,279 फीट की ऊंचाई पर स्थित बद्रीनाथ धाम पूरी तरह से सफेद मखमली चादर में लिपट गया है। ताज़ा बर्फबारी के बाद धाम में 2 से 3 फीट तक बर्फ जम चुकी है, और पारा गिरकर शून्य से 15 डिग्री नीचे (-15°C) जा पहुँचा है।
लेकिन इस हाड़ कंपा देने वाली ठंड और एकांत सन्नाटे के बीच भी ‘आस्था की लौ’ कम नहीं हुई है। वर्तमान में 15 साधु-संत इस विकट परिस्थिति में भी धाम में रहकर भगवान नारायण की साधना में लीन हैं।

सफेद चादर में लिपटा ‘भू-बैकुंठ’
फरवरी की शुरुआत के साथ ही उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो गया है। बद्रीनाथ मंदिर परिसर, ब्रह्म कपाल, तप्तकुंड और माणा गांव तक सब कुछ बर्फ की मोटी परत से ढक चुका है। मंदिर की भव्य वास्तुकला और उसके स्वर्ण कलश पर जमी बर्फ की परत इसे किसी स्वर्ग जैसा दृश्य प्रदान कर रही है। अलकनंदा नदी का वेग भी शांत हो गया है और किनारों पर पाला जमने लगा है।

15 साधुओं की ‘वज्र देह’ और अटूट विश्वास
आमतौर पर कपाट बंद होने के बाद बद्रीनाथ धाम में सन्नाटा पसर जाता है और केवल सुरक्षा बल (ITBP) के जवान ही वहां तैनात रहते हैं। लेकिन इस वर्ष प्रशासन की विशेष अनुमति लेकर 15 साधु-संतों ने वहीं रुकने का निर्णय लिया है।
- कठिन साधना: जब तापमान -15 डिग्री होता है, तो सामान्य व्यक्ति का खून जमने लगता है। ऐसी स्थिति में ये साधु अपनी कुटियाओं और गुफाओं में केवल एक कंबल या नाममात्र के कपड़ों में ध्यान लगा रहे हैं।
- प्रशासन की अनुमति: शीतकाल में यहाँ रहने के लिए ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) तहसील प्रशासन से विशेष अनुमति लेनी पड़ती है। पुलिस और स्वास्थ्य जांच के बाद ही इन साधकों को यहाँ रुकने दिया जाता है।
- दैनिक जीवन: बर्फबारी के कारण रास्ते बंद होने से ये साधु छह महीने का राशन और ईधन पहले ही जुटा लेते हैं। सुबह-शाम भगवान नारायण की स्तुति और दिनभर मौन साधना ही इनका मुख्य आधार है।

देवताओं की पूजा का समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सर्दियों में बद्रीनाथ के कपाट बंद होते हैं, तब वहां मनुष्य नहीं बल्कि देवता पूजा करते हैं। स्कंद पुराण के केदारखंड में उल्लेख है कि छह महीने मनुष्य और छह महीने देवता भगवान की अर्चना करते हैं। इन 15 साधुओं का मानना है कि इस दिव्य समय में साधना करने से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

सुरक्षा व्यवस्था और चुनौतियाँ
धाम की सुरक्षा का जिम्मा वर्तमान में आईटीबीपी (ITBP) की एक प्लाटून के पास है। अत्यधिक बर्फबारी के कारण कभी-कभी बिजली और संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाती है। चमोली जिले के पुलिस प्रशासन और मंदिर समिति के कर्मचारी भी बीच-बीच में इन साधुओं का हाल-चाल लेते रहते हैं।
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बद्रीनाथ धाम की बर्फबारी में साधु कर रहे तपस्या
बद्रीनाथ धाम की यह बर्फबारी न केवल प्रकृति के सौंदर्य को दर्शाती है, बल्कि भारत की उस प्राचीन ऋषि परंपरा का भी प्रमाण है जो भौतिक सुखों को त्यागकर आत्म-साक्षात्कार के लिए हिमालय की दुर्गम गुफाओं को अपना घर बनाती है। 3 फीट बर्फ और शून्य से नीचे का तापमान भी इन साधुओं के संकल्प को डिगा नहीं पाया है।










