Mohan Bhagwat Visit Dehradun News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत आगामी 22 और 23 फरवरी 2026 को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के दो दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। संघ के शताब्दी वर्ष (1925-2025/26) के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित किए जा रहे विशेष कार्यक्रमों की शृंखला के तहत यह दौरा अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लगभग सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद (इससे पूर्व 2019 में) डॉ. भागवत का देहरादून आगमन हो रहा है, जिसे लेकर स्वयंसेवकों और प्रबुद्ध वर्ग में भारी उत्साह है।
दो दिवसीय प्रवास का विस्तृत कार्यक्रम
संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख संजय कुमार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सरसंघचालक के इस प्रवास को मुख्य रूप से दो बड़े संवाद कार्यक्रमों में विभाजित किया गया है:
- 22 फरवरी: प्रबुद्ध जन सम्मेलन (Intellectual Meet)
- स्थान: गढ़ी कैंट स्थित संस्कृति विभाग का ऑडिटोरियम।
- उद्देश्य: इस गोष्ठी में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्ध वर्ग, शिक्षाविदों, डॉक्टरों, इंजीनियरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से संवाद किया जाएगा।
- मुख्य विषय: राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका, सामाजिक समरसता और वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत का उत्तरदायित्व।
- 23 फरवरी: पूर्व सैनिक सम्मेलन (Ex-Servicemen Conference)
- महत्व: उत्तराखंड को ‘वीर भूमि’ कहा जाता है, जहाँ हर घर से कोई न कोई सेना में सेवा दे रहा है।
- उद्देश्य: डॉ. भागवत पूर्व सैनिकों को संबोधित करेंगे और देश की सुरक्षा, सीमावर्ती क्षेत्रों की चुनौतियों तथा सेवानिवृत्ति के बाद समाज सेवा में सैनिकों के योगदान पर चर्चा करेंगे।
राजनीतिक दूरी और संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण
इस दौरे की एक खास बात यह है कि कार्यक्रमों को विशुद्ध रूप से सामाजिक और संगठनात्मक रखा गया है। संघ के सूत्रों के अनुसार, इन गोष्ठियों में मंत्रियों, विधायकों या अन्य सक्रिय राजनीतिक व्यक्तियों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
- शताब्दी वर्ष का लक्ष्य: संघ अपने 100 वर्ष पूरे होने पर “पंच परिवर्तन” (सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य) के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना चाहता है।
- कार्यकर्ताओं में ऊर्जा: 2019 के बाद हो रहे इस प्रवास से उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में कार्यरत स्वयंसेवकों को नई दिशा और वैचारिक ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
सुरक्षा और प्रशासन की तैयारियां
सरसंघचालक की ‘जेड प्लस’ (Z+) सुरक्षा श्रेणी को देखते हुए पुलिस प्रशासन और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। जौलीग्रांट एयरपोर्ट से लेकर तिलक रोड स्थित संघ मुख्यालय और कार्यक्रम स्थलों तक सुरक्षा का कड़ा पहरा रहेगा। संघ के पदाधिकारियों की टीमें भी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटी हैं।

देहरादून दौरा केवल एक औपचारिक प्रवास नहीं
डॉ. मोहन भागवत का यह देहरादून दौरा केवल एक औपचारिक प्रवास नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने का एक माध्यम है। पूर्व सैनिकों और बुद्धिजीवियों के साथ सीधा संवाद यह दर्शाता है कि संघ अपनी शताब्दी यात्रा के अगले चरण में समाज के हर वर्ग को साथ लेकर ‘विश्व गुरु’ भारत की संकल्पना को साकार करना चाहता है।
प्रमुख लोगों और संगठनों के साथ संवाद
सरसंघचालक का यह प्रवास केवल सार्वजनिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज के विभिन्न स्तंभों के साथ व्यक्तिगत और समूह स्तर पर वार्ता प्रस्तावित है:
- गढ़वाल मंडल के प्रतिनिधि: 22 फरवरी को आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में देहरादून सहित पूरे गढ़वाल मंडल के विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- प्रबुद्ध वर्ग से व्यक्तिगत भेंट: दौरे के दौरान डॉ. भागवत शिक्षाविदों, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों और आध्यात्मिक गुरुओं जैसे समाज के प्रभावशाली व्यक्तियों (Influencers) से अलग से मुलाकात कर सकते हैं। इन मुलाकातों का मुख्य उद्देश्य “पंच परिवर्तन” (जैसे सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण) के विचार को समाज के ऊपरी स्तर तक पहुँचाना है।
- गैर-राजनीतिक स्वरूप: संघ की रणनीति के तहत, इन मुलाकातों में सक्रिय राजनीतिक चेहरों (मंत्रियों या विधायकों) के बजाय उन लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है जो धरातल पर सामाजिक परिवर्तन ला रहे हैं।
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प्रमुख प्रस्तावित कार्यक्रम और वर्ग
| तिथि | मुख्य कार्यक्रम | लक्षित समूह |
| 22 फरवरी | प्रबुद्ध जन गोष्ठी | डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, और विभिन्न एनजीओ (NGO) प्रतिनिधि। |
| 23 फरवरी | पूर्व सैनिक सम्मेलन | सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी और जवान (उत्तराखंड के सैन्य बाहुल्य क्षेत्रों से)। |
| प्रवास के दौरान | संगठनात्मक बैठकें | संघ के क्षेत्रीय और प्रांत स्तरीय पदाधिकारियों के साथ शताब्दी वर्ष की तैयारियों की समीक्षा। |
मुलाकातों का मुख्य एजेंडा
- शताब्दी वर्ष का विजन: 2025-26 में संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर संघ की भविष्य की योजनाओं और राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक वर्ग की भागीदारी पर चर्चा।
- सामाजिक नब्ज टटोलना: प्रबुद्ध लोगों से फीडबैक लेकर प्रदेश की वर्तमान सामाजिक और वैचारिक स्थिति को समझना।
- कुटुंब प्रबोधन: भारतीय परिवार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए समाज के मार्गदर्शकों से सहयोग की अपील।
अतिरिक्त जानकारी: सरसंघचालक का यह दौरा सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत संवेदनशील है, जिसके लिए प्रशासन ने रूट डायवर्जन और सुरक्षा घेरे की योजना पहले ही तैयार कर ली है।









