हिंदू धर्म में मलमास (Malmas) या खरमास (Kharmas) का समय अत्यंत पवित्र माना जाता है, लेकिन यह अवधि किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित होती है। इस पूरे महीने को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब सूर्यदेव अपनी राशि बदलकर बृहस्पति (गुरु) की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो उस पूरे महीने को मलमास कहते हैं। इस दौरान, सूर्य का तेज कमजोर पड़ जाता है, जिस कारण शुभ मुहूर्त नहीं बनते।
आगामी मलमास 14 मार्च 2025 से शुरू होकर 13 अप्रैल 2025 तक चलेगा।

यह समय आध्यात्मिक विकास, आत्म-शुद्धि और दान-पुण्य के लिए सबसे उत्तम है। यदि आप मलमास में क्या करें और क्या न करें की सही जानकारी रखते हैं, तो आप इस माह का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं।
मलमास में क्या न करें (कामकाज करने से बचें)
यह वह समय है जब आपको भौतिक सुखों से जुड़े और नए जीवन की शुरुआत से जुड़े बड़े कार्य करने से बचना चाहिए। इन कार्यों को करना अशुभ माना जाता है:
- विवाह और सगाई: मलमास में विवाह जैसे मांगलिक कार्य करने से बचें। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान बनाए गए संबंधों में सुख और स्थिरता नहीं रहती है।
- गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश (गृह प्रवेश) या नए घर का निर्माण (कंस्ट्रक्शन) शुरू करना अशुभ माना जाता है। इससे घर में सुख-समृद्धि की कमी हो सकती है।
- नए व्यवसाय की शुरुआत: किसी भी नए व्यापार, नौकरी, या बड़े निवेश की शुरुआत इस महीने में नहीं करनी चाहिए। इससे सफलता की संभावना कम हो जाती है।
- नया वाहन/संपत्ति खरीदना: संपत्ति या वाहन की खरीदारी जैसे बड़े लेन-देन करने से बचें।
- उपहार और भेंट: कुछ लोग मानते हैं कि इस दौरान मूल्यवान वस्तुएं उपहार के रूप में नहीं देनी चाहिए।
- यज्ञोपवीत संस्कार (जनेऊ): बच्चों का मुंडन या जनेऊ संस्कार जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक संस्कार करना वर्जित होता है।
- तामसिक भोजन: मलमास के दौरान तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा और प्याज-लहसुन का सेवन करने से बचें और सात्विक आहार को अपनाएँ।
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✅ मलमास में क्या करें (भाग्य बनाएँ)
मलमास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं, जिसका अर्थ है ‘उत्तम पुरुष’ यानी भगवान विष्णु का महीना। यह समय तपस्या, पूजा और सादगी से जीवन जीने के लिए बनाया गया है।

- भगवान विष्णु की पूजा: इस पूरे माह प्रतिदिन भगवान विष्णु और उनके अवतार श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करें। ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।
- दान-पुण्य और सेवा: मलमास में दान करने का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। अनाज, वस्त्र, तिल, गुड़ और दीपक का दान करना चाहिए। गौ-सेवा करना भी पुण्यकारी माना गया है।
- पवित्र नदियों में स्नान: इस माह में गंगा, यमुना, गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना सभी पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। यदि नदी पर न जा सकें, तो घर पर ही जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- भागवत कथा श्रवण: मलमास में श्रीमद्भागवत पुराण की कथा का श्रवण करना या स्वयं पाठ करना मोक्षदायी होता है। यह मन और आत्मा को शुद्ध बनाने का सबसे अच्छा तरीका है।
- सात्विक जीवनशैली: पूरे माह ब्रह्मचर्य का पालन करें, फर्श पर सोएँ और केवल एक समय भोजन करने का नियम बनाएँ। यह तपस्या आपको आत्मिक शांति प्रदान करती है।
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मलमास में क्या करें — क्या न करें?
✔️ क्या करें:
- दान
- जप-तप
- ध्यान
- साधना
- परिवार के साथ धार्मिक कार्य
❌ क्या न करें:
- नए कार्य
- विवाह
- खरीदारी
- निवेश
मलमास 2025 आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य संग्रह का श्रेष्ठ काल है। यदि आप इस महीने के नियमों का पालन करें और बताए गए शुभ कार्य करें, तो जीवन में शांति, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।
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